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Kurukshetra News: शिक्षक बनेंगे नवभारत के अग्रदूत, एनईपी से बदलेगा शिक्षण का स्वरूप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Apr 2025 01:16 AM IST
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Teachers will become the pioneers of New India, NEP will change the nature of teaching
कुरुक्षेत्र। नई शिक्षा नीति-2020 (एनईपी) के तहत भारतीय शिक्षा प्रणाली एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहां शिक्षकों की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रह जाएगी, बल्कि वे विकसित भारत 2047 की नींव रखेंगे। भारतीय परंपरा से आधुनिक ज्ञान को जोड़ते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। इस नीति से शिक्षक, बदलाव और नवभारत के अग्रदूत होंगे।
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यह निष्कर्ष शिक्षक शिक्षा में परिवर्तन विकसित भारत 2047 की दिशा में, विषय पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) और हरियाणा स्टेट हायर एजुकेशन काउंसिल (एचएसएचईसी) के सहयोग में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षाविद् और विषय विशेषज्ञों द्वारा किए गए मंथन में निकाला गया। उनका कहना है कि केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना से युक्त शिक्षक ही भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। एनईपी के विजन के साथ शिक्षक अब बदलाव के वाहक बनेंगे, जो न केवल विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देंगे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
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सम्मेलन के समापन समारोह में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हमें अपनी समृद्ध भारतीय परंपराओं को आगे बढ़ाना होगा और इसमें सबसे अहम भूमिका शिक्षकों की होगी। हमें मजबूत राजनीतिक सोच व छात्रों की प्रतिभा को पहचान कर आगे बढ़ना होगा। भारत की सोच बदल रही है। हमें आवश्यकता है नए चिंतन के साथ आगे बढ़ने की। इस मौके पर एनसीटीई की सदस्य सचिव अभिलाषा झा मिश्रा, प्रो. केके अग्निहोत्री, डॉ. सुरेंद्र गक्खड़, प्रो. दिब्याज्योति महंता, कुलसचिव डॉ. वीरेंद्र पॉल, डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. रीटा, प्रो. अनिता दुआ सहित नौ राज्यों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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शिक्षक-शिक्षा में परिवर्तन लाकर उद्यमिता व कौशल विकास की ओर कदम बढ़ाना : प्रो. पंकज अरोड़ा
एनसीटीई के चेयरपर्सन प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि एनसीटीई राष्ट्र के सभी प्रदेशों को जोड़ते हैं और इस राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बनाते हैं। अध्यापक शिक्षा के माध्यम से हम विकसित भारत के उद्देश्य की तरफ बढ़ रहे हैं। एनईपी-2020 ने आज से पांच साल पहले विकसित भारत का बीज बो दिया है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने-अपने संस्थान से इसमें अपना योगदान दे सकें। शिक्षक-शिक्षा में परिवर्तन लाकर उद्यमिता व कौशल विकास की ओर बढ़ना है।


आईटीईपी के तहत शिक्षकों को तराशा जाएगा : प्रो. कैलाश चंद्र
एचएसएचईसी के अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि आईटीईपी के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कैसे हो यह सोचने का विषय है। इसमें क्षमतावान शिक्षक एनईपी के अनुसार होने चाहिए। कैंपस बहुसंकायी प्रकार के होने चाहिए। किसी भी राष्ट्र की अवस्था उसकी शिक्षा निर्धारित करती है। समाज को आगे बढ़ाने का प्रमुख दायित्व शिक्षक का है। आईटीईपी के तहत शिक्षकों को तराशा जाएगा जो देश के भविष्य को निखार विकसित भारत में अपना अहम योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि गुरु एक श्रेष्ठ स्थान होता है। हमें दुनिया का अंधकार छोड़कर आगे बढ़ने वाला व्यक्ति बनना है।



2030 तक आईटीईपी शिक्षक-शिक्षा के लिए हो अनिवार्य : प्रो. सोमनाथ सचदेवा
कुवि कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि 2030 तक आईटीईपी (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम) को शिक्षक शिक्षा के लिए अनिवार्य हो, जिससे शिक्षकों की गुणवत्ता और संवेदनशीलता में निखार आएगा। शिक्षक ही असली मायने में देश के भविष्य के निर्माता हैं। भारत विश्व का सबसे युवा देश है जहां 15 से 29 आयु के 37 करोड़ युवा हमारी ताकत है और इस ताकत के सही उपयोग की जिम्मेदारी शिक्षक की है। युवा शक्ति के माध्यम से ही विजन 2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कुवि में इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के सेकेंडरी स्तर प्रोग्राम को आर्टस, कॉमर्स एवं साइंस प्रोग्राम्स में लगाया गया है। आईटीईपी प्रोग्राम में बीए के साथ बीएड तथा संबंधित आईटेप में एमकॉम, एमएससी आदि पीजी भी कर सकते हैं। 12वीं के बाद शिक्षक बनने वाले के विद्यार्थियों को उद्यमिता एवं स्किल, स्वरोजगार अच्छे नागरिक बनाने एवं राष्ट्र निर्माण के योग्य बनाने का दायित्व भी शिक्षक का होना चाहिए।
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