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Kurukshetra News: एचपीएससी की शर्तों के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र-छात्राएं
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में लागू 35 प्रतिशत स्क्रीनिंग टेस्ट (एसकेटी) कट-ऑफ और बड़ी संख्या में पद खाली छोड़ने के विरोध में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) परिसर में मंगलवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी एचपीएससी अभ्यर्थी संघर्ष समिति के बैनर तले रोज गार्डन से थर्ड गेट तक रोष मार्च निकालकर पहुंचे और एचपीएससी चेयरमैन आलोक वर्मा का पुतला फूंका।
प्रदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की, जिनमें एसएफआई, एनएसयूआई, एएसएपी, दासफी जन संघर्ष मंच हरियाणा आदि प्रमुख थे। संगठनों के पदाधिकारियों ने अभ्यर्थियों की मांगों का खुलकर समर्थन किया और चेयरमैन आलोक वर्मा के अभ्यर्थियों को नालायक करार देने तथा हरियाणा की उच्च शिक्षा को कमजोर बताने वाले बयान की कड़ी निंदा की। अभ्यर्थियों व एसएफआई राज्य प्रधान अक्षय ने बताया कि वे 29 दिसंबर से पंचकूला के सेक्टर-पांच में धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार और आयोग की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि 35 प्रतिशत कट-ऑफ भेदभावपूर्ण और अव्यवहारिक है, जिसके कारण हजारों योग्य उम्मीदवार बेरोजगार हैं और सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
अक्षय ने बताया कि अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगे स्क्रीनिंग टेस्ट में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया तत्काल रद्द किया जाए। विज्ञापित पदों के कम से कम दोगुने अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए, स्क्रीनिंग टेस्ट की सभी ओएमआर शीट्स आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएं व आरक्षित वर्ग की भागीदारी बढ़ाई जाए, जो वर्तमान में नगण्य है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा तथा इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
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प्रदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्र संगठनों ने सक्रिय भागीदारी की, जिनमें एसएफआई, एनएसयूआई, एएसएपी, दासफी जन संघर्ष मंच हरियाणा आदि प्रमुख थे। संगठनों के पदाधिकारियों ने अभ्यर्थियों की मांगों का खुलकर समर्थन किया और चेयरमैन आलोक वर्मा के अभ्यर्थियों को नालायक करार देने तथा हरियाणा की उच्च शिक्षा को कमजोर बताने वाले बयान की कड़ी निंदा की। अभ्यर्थियों व एसएफआई राज्य प्रधान अक्षय ने बताया कि वे 29 दिसंबर से पंचकूला के सेक्टर-पांच में धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार और आयोग की ओर से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि 35 प्रतिशत कट-ऑफ भेदभावपूर्ण और अव्यवहारिक है, जिसके कारण हजारों योग्य उम्मीदवार बेरोजगार हैं और सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।
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अक्षय ने बताया कि अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगे स्क्रीनिंग टेस्ट में 35 प्रतिशत क्राइटेरिया तत्काल रद्द किया जाए। विज्ञापित पदों के कम से कम दोगुने अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए, स्क्रीनिंग टेस्ट की सभी ओएमआर शीट्स आयोग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएं व आरक्षित वर्ग की भागीदारी बढ़ाई जाए, जो वर्तमान में नगण्य है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा तथा इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।
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