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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व एड्स दिवस पर विद्यार्थियों ने निकाली जागरुकता रैली
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में विश्व एड्स दिवस पर जागरुकता रैली निकालते स्वयंसेव?
- फोटो : Kurukshetra
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कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय की यूथ रेड क्रॉस यूनिट और यूटीडी के स्वयंसेवकों की ओर से बुधवार को विश्व एड्स दिवस पर जागरूकता रैली निकाली गई। इस दौरान रैली में शामिल स्वयंसेवकों ने लोगों को एड्स के लक्षण और उनसे बचाव के बारे में जानकारी दी। वहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में विश्व एड्स दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूथ रेडक्रॉस के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. अनिल वशिष्ठ ने स्वयंसेवकों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इस दिन उन लोगों को भी याद किया जाता है, जिन्होंने इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि विश्व एड्स दिवस की शुरुआत साल 1988 में हुई थी और तब से लेकर अभी तक एड्स आज भी लोगों के लिए एक लाइलाज बीमारी बनी हुई है। आज भी एड्स का सिर्फ एक ही इलाज है- बचाव और जागरुकता। तमाम रिसर्च के बावजूद दुनिया के वैज्ञानिक और डॉक्टर एड्स की दवा बनाने में नाकाम साबित रहे हैं। वे बुधवार को विश्व एड्स दिवस पर स्वयंसेवकों को जागरुक कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस बार विश्व एड्स दिवस की थीम एंड इनइक्वलिटी है। उन्होंने बताया कि समाज को एड्स के खतरे के प्रति जागरूक करना हम सबका दायित्व है। यूथ रेडक्रॉस फील्ड कोआर्डिनेटर राजेंद्र सैनी ने बताया प्रतिवर्ष एड्स से अनेकों मौतें होती हैं। यूथ रेडक्रॉस के प्रोग्राम काउंसिलर डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि किस प्रकार बीते कुछ दशकों से एड्स के बारे में फैले भ्रम दूर हुए हैं और लोग कैसे पहले की अपेक्षाकृत जागरुक हुए हैं। इस मौके पर प्रोग्राम काउंसलर डॉ. विजय कुमार, स्वयंसेवक कृष्ण, मनीषा, आईना, शिवानी, काजल, चेतना, तेजस्वी, रिचा व अजय सहित अन्य मौजूद रहे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में मनाया विश्व एड्स दिवस
उधर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में विश्व एड्स दिवस पर विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. नीरा राघव ने विश्व एड्स दिवस की महत्वता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यह एक लाइलाज रोग है तथा इसका कोई स्थाई उपचार नहीं है। इसलिए सभी को एड्स के प्रति जागरुक रहना चाहिए। डॉ.रमेश कुमार ने बताया कि एचआईवी वायरस का संक्रमण कैसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होता है। उन्होंने एचआईवी वायरस के संक्रमण को रोकने के उपाय भी बताएं। इस अवसर पर विभाग के छात्र कृष्ण कुमार, मनीषा तथा आईना ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर डॉ. हरदीप आनंद, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. संगीता सैनी व डॉ आशु चौधरी सहित अन्य मौजूद रहे।
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इस अवसर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के यूथ रेडक्रॉस के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. अनिल वशिष्ठ ने स्वयंसेवकों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इस दिन उन लोगों को भी याद किया जाता है, जिन्होंने इस बीमारी की वजह से अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि विश्व एड्स दिवस की शुरुआत साल 1988 में हुई थी और तब से लेकर अभी तक एड्स आज भी लोगों के लिए एक लाइलाज बीमारी बनी हुई है। आज भी एड्स का सिर्फ एक ही इलाज है- बचाव और जागरुकता। तमाम रिसर्च के बावजूद दुनिया के वैज्ञानिक और डॉक्टर एड्स की दवा बनाने में नाकाम साबित रहे हैं। वे बुधवार को विश्व एड्स दिवस पर स्वयंसेवकों को जागरुक कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस बार विश्व एड्स दिवस की थीम एंड इनइक्वलिटी है। उन्होंने बताया कि समाज को एड्स के खतरे के प्रति जागरूक करना हम सबका दायित्व है। यूथ रेडक्रॉस फील्ड कोआर्डिनेटर राजेंद्र सैनी ने बताया प्रतिवर्ष एड्स से अनेकों मौतें होती हैं। यूथ रेडक्रॉस के प्रोग्राम काउंसिलर डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि किस प्रकार बीते कुछ दशकों से एड्स के बारे में फैले भ्रम दूर हुए हैं और लोग कैसे पहले की अपेक्षाकृत जागरुक हुए हैं। इस मौके पर प्रोग्राम काउंसलर डॉ. विजय कुमार, स्वयंसेवक कृष्ण, मनीषा, आईना, शिवानी, काजल, चेतना, तेजस्वी, रिचा व अजय सहित अन्य मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में मनाया विश्व एड्स दिवस
उधर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग में विश्व एड्स दिवस पर विभाग के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. नीरा राघव ने विश्व एड्स दिवस की महत्वता के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि यह एक लाइलाज रोग है तथा इसका कोई स्थाई उपचार नहीं है। इसलिए सभी को एड्स के प्रति जागरुक रहना चाहिए। डॉ.रमेश कुमार ने बताया कि एचआईवी वायरस का संक्रमण कैसे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होता है। उन्होंने एचआईवी वायरस के संक्रमण को रोकने के उपाय भी बताएं। इस अवसर पर विभाग के छात्र कृष्ण कुमार, मनीषा तथा आईना ने भी अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर डॉ. हरदीप आनंद, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. संगीता सैनी व डॉ आशु चौधरी सहित अन्य मौजूद रहे।
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