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Kurukshetra News: कला उत्सव कार्यशाला में विद्यार्थियों ने सीखे चित्रकला के गुर
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कुरुक्षेत्र। चित्रकारी करते हुए कलाकार। संवाद
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की ओर से तीन दिवसीय कला उत्सव कार्यशाला का आयोजन क्रश हॉल में किया गया, जिसके तीसरे दिन विद्यार्थियों ने कलाकारों से चित्रकला के गुर सीखे और राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों से उनके अनुभवों को जाना। कलाकारों ने विद्यार्थियों को चित्रकला के सूक्ष्म पहलुओं से अवगत कराया और कहा कि जिस भी चित्र को बनाए पहले उसको अपने दिमाग में उतारें और आनंदमयी होकर उसे कागज पर उतारने करें।
कार्यशाला में राष्ट्रीय अवार्डी अमित दत्त, फ्रीलांसर आर्टिस्ट श्रीकांत कदम, ओडिशा के कलाकार मानस रंजन, एचपी यूनिवर्सिटी के प्रो. हिम चटर्जी, वाराणसी से राष्ट्रीय अवार्डी डॉ. सुनील विश्वकर्मा, गुरुग्राम से सुमित्रा अहलावत, आईजीएन ओपन यूनिवर्सिटी न्यू दिल्ली से डॉ. लक्ष्मण प्रसाद, नवल किशोर, आईजी कॉलेज आगरा से डॉ. विजय ढोर व चंडीगढ़ से कुवि एलुमनी डॉ. रविंद्र सिंह ने चित्रकारी की और उसके बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने और संयोजक डॉ. गुरुचरण सिंह ने कहा कि कार्यशाला में विद्यार्थियों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और अनुभवी कलाकारों के अनुभवों को जानना चाहिए।
प्रकृति की सुंदरता का किया वर्णन : डॉ. विजय
डॉ. विजय ढोर ने बताया कि उन्होंने अपनी चित्रकारी में पतझड़ ऋतु के सुहावने मौसम और पहाड़ियां में बादलों के मनमोहक दृश्य को दर्शाया है, जिसमें प्रकृति की सुंदरता का विस्तार से वर्णन किया गया है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपनी चित्रकार की विशेषता को पहचानते हुए इस क्षेत्र में रुचिपूर्ण कार्य करना चाहिए।
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रामलीला के दृश्य को दिखाया : डॉ. सुनील
वाराणसी से आए राष्ट्रीय अवार्डी कलाकार डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने चित्रकारी में रामलीला को दृश्य को दिखाया है, जिसे देख दर्शक उसी दृश्य में डूब जाते हैं। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को रंगों और अपने विषय की गहराई से जानकारी होनी चाहिए।
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कार्यशाला में राष्ट्रीय अवार्डी अमित दत्त, फ्रीलांसर आर्टिस्ट श्रीकांत कदम, ओडिशा के कलाकार मानस रंजन, एचपी यूनिवर्सिटी के प्रो. हिम चटर्जी, वाराणसी से राष्ट्रीय अवार्डी डॉ. सुनील विश्वकर्मा, गुरुग्राम से सुमित्रा अहलावत, आईजीएन ओपन यूनिवर्सिटी न्यू दिल्ली से डॉ. लक्ष्मण प्रसाद, नवल किशोर, आईजी कॉलेज आगरा से डॉ. विजय ढोर व चंडीगढ़ से कुवि एलुमनी डॉ. रविंद्र सिंह ने चित्रकारी की और उसके बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी। निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने और संयोजक डॉ. गुरुचरण सिंह ने कहा कि कार्यशाला में विद्यार्थियों को बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए और अनुभवी कलाकारों के अनुभवों को जानना चाहिए।
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प्रकृति की सुंदरता का किया वर्णन : डॉ. विजय
डॉ. विजय ढोर ने बताया कि उन्होंने अपनी चित्रकारी में पतझड़ ऋतु के सुहावने मौसम और पहाड़ियां में बादलों के मनमोहक दृश्य को दर्शाया है, जिसमें प्रकृति की सुंदरता का विस्तार से वर्णन किया गया है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को अपनी चित्रकार की विशेषता को पहचानते हुए इस क्षेत्र में रुचिपूर्ण कार्य करना चाहिए।
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रामलीला के दृश्य को दिखाया : डॉ. सुनील
वाराणसी से आए राष्ट्रीय अवार्डी कलाकार डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने चित्रकारी में रामलीला को दृश्य को दिखाया है, जिसे देख दर्शक उसी दृश्य में डूब जाते हैं। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को रंगों और अपने विषय की गहराई से जानकारी होनी चाहिए।

कुरुक्षेत्र। चित्रकारी करते हुए कलाकार। संवाद