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कुरुक्षेत्र के 10 गांवों के खेतों में जली पराली
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कुरुक्षेत्र। जिला में प्रशासन के भरसक प्रयासों के बावजूद धान के खेतों में पराली जलाए जाने का सिलसिला लगातार बढ़ने लगा है। बुधवार को भी 10 गांवों में पराली जलाए जाने के मामले सामने आए, जिसके चलते विभाग के अधिकारियों में खलबली मची है। अब अधिकारी इन किसानों पर कार्रवाई की तैयारी में लगे हैं और देर रात तक संबंधित किसानों की जानकारी जुटाई जाती रही।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल के अनुसार बुधवार को सबसे ज्यादा मामले थानेसर खंड में ही सामने आए हैं। जहां गांव अढोन, किरमिच, मथाना, मोरथला, समसीपुर शामिल हैे। वह इस्माईलाबाद क्षेत्र के गांव झांसा व तंगौरी, शाहाबाद के गांव मोहिदीनपुर, कंकरशाहाबाद तथा लाडवा के गांव सौंटी में यह मामले सामने आए हैं। ये सभी मामले हरसेक के जरिए ही पता चले हैं। अब इन संबंधित किसानों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। बता दें कि इससे पहले भी पराली में आग लगाने के छह मामले सामने आ चुके हैं।
किसान पराली प्रबंधन कर ले सकते हैं आर्थिक लाभ
उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है कि प्रशासन का लक्ष्य है कि किसान पराली का प्रबंधन करके प्रति एक हजार रुपये का आर्थिक लाभ हासिल करे, यह नहीं कि किसानों पर जुर्माना किया जाए। इसलिए पर्यावरण को बचाने, भूमि के कीट मित्रों के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए पराली में आग ना लगाकर पराली का प्रबंधन करने के प्रति किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन के बार-बार अनुरोध और अपील करने के बावजूद जो किसान अभी भी फसल अवशेषों में आग लगा रहा है, उन किसानों पर सरकार के नियमानुसार जुर्माना भी किया जा रहा है।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल के अनुसार बुधवार को सबसे ज्यादा मामले थानेसर खंड में ही सामने आए हैं। जहां गांव अढोन, किरमिच, मथाना, मोरथला, समसीपुर शामिल हैे। वह इस्माईलाबाद क्षेत्र के गांव झांसा व तंगौरी, शाहाबाद के गांव मोहिदीनपुर, कंकरशाहाबाद तथा लाडवा के गांव सौंटी में यह मामले सामने आए हैं। ये सभी मामले हरसेक के जरिए ही पता चले हैं। अब इन संबंधित किसानों की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपी किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। बता दें कि इससे पहले भी पराली में आग लगाने के छह मामले सामने आ चुके हैं।
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किसान पराली प्रबंधन कर ले सकते हैं आर्थिक लाभ
उपनिदेशक डॉ. प्रदीप मिल का कहना है कि प्रशासन का लक्ष्य है कि किसान पराली का प्रबंधन करके प्रति एक हजार रुपये का आर्थिक लाभ हासिल करे, यह नहीं कि किसानों पर जुर्माना किया जाए। इसलिए पर्यावरण को बचाने, भूमि के कीट मित्रों के साथ-साथ भूमि की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने के लिए पराली में आग ना लगाकर पराली का प्रबंधन करने के प्रति किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। हालांकि प्रशासन के बार-बार अनुरोध और अपील करने के बावजूद जो किसान अभी भी फसल अवशेषों में आग लगा रहा है, उन किसानों पर सरकार के नियमानुसार जुर्माना भी किया जा रहा है।
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