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Kurukshetra News: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने में छूट रहे पसीने, 74 फीसदी मतदाताओं की हो पाई मैपिंग
Fri, 06 Mar 2026 02:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 06 Mar 2026 02:08 AM IST
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी के मतदाताओं की सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करना बीएलओ के लिए चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कम जागरूकता और पलायन के कारण पात्र मतदाताओं की पहचान मुश्किल हो रही है। बड़े स्तर पर लोग जरूरी विवरण या फॉर्म भरने में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते बीएलओ का तय लक्ष्य पाना भी आसान नहीं। जिले में 7.84 लाख मतदाता हैं जबकि अभी 74.16 फीसदी ही एसआईआर हो पाई है। जिले भर में एसआईआर के लिए 810 बीएलओ फील्ड में उतारे गए हैं।
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन, पारदर्शी और पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से एसआईआर प्रक्रिया को इस बार और भी सख्ती व तेजी के साथ लागू किया है। आयोग को कई राज्यों से यह महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया मिली थी कि पहले चरण के सर्वे में बड़ी संख्या में पात्र मतदाता छूट गए हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन व बीएलओ टीम दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ ओर ही हैं। बिना आमजन के सहयोग के उन्हें यह प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं लग रहा।
ग्रामीणों की कम जागरूकता और पलायन चुनौती
करीब दो माह से प्रक्रिया में लगे बीएलओ की मानें तो सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों की कम जागरूकता और पलायन है। जहां प्रवासी मजदूर अधिक हैं वहां और भी जटिलता बढ़ जाती है। अनेक परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतों में ही व्यस्त हैं जो बार-बार समझाने के बाद भी वह एसआईआर फॉर्म को लेकर जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। यहीं नहीं कईं ग्राम पंचायतों से लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीएलओ भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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बॉक्स
2002 की वोटर लिस्ट का 2026 से किया जा रहा मिलान : संदीप
निर्वाचन तहसीलदार संदीप कुमार का कहना है कि आयोग के निर्देशानुसार मतदाताओं की मैपिंग की जा रही है, जिसमें 2002 की वोटर सूची का 2026 से मिलान किया जा रहा है। बड़े स्तर पर ऐसे लोग हैं, जिनका इस समय के बीच पता ही बदल चुका है। कोई नौकरी व मजदूरी के चलते कहीं दूसरी जगह रहने लगा है। युवतियां शादी के बाद ससुराल में जा चुकी है। उनका कहना है कि लोगों की ओर से की जा रही अनदेखी से काम बाधित हो रहा है
अभी तक यह तस्वीर आई है सामने
विधानसभा क्षेत्र-- -- कुल मतदाता-- -- -- 40 साल से ऊपर के मतदाता
थानेसर-- -- -- -- -- 2,24,147-- -- -- -- -- -- -1,21,277
लाडवा-- -- -- -- -- 1,98,294-- -- -- -- -- -- - 1,04,609
शाहाबाद-- -- -- -1,72,996-- -- -- -- -- -- - 93,580
पिहोवा-- -- -- - 1,89,426-- -- -- -- -- -- -- 1,02,086
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निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन, पारदर्शी और पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से एसआईआर प्रक्रिया को इस बार और भी सख्ती व तेजी के साथ लागू किया है। आयोग को कई राज्यों से यह महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया मिली थी कि पहले चरण के सर्वे में बड़ी संख्या में पात्र मतदाता छूट गए हैं। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए जिला प्रशासन व बीएलओ टीम दिन-रात जुटे हुए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ ओर ही हैं। बिना आमजन के सहयोग के उन्हें यह प्रक्रिया पूरी करना आसान नहीं लग रहा।
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ग्रामीणों की कम जागरूकता और पलायन चुनौती
करीब दो माह से प्रक्रिया में लगे बीएलओ की मानें तो सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीणों की कम जागरूकता और पलायन है। जहां प्रवासी मजदूर अधिक हैं वहां और भी जटिलता बढ़ जाती है। अनेक परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतों में ही व्यस्त हैं जो बार-बार समझाने के बाद भी वह एसआईआर फॉर्म को लेकर जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। यहीं नहीं कईं ग्राम पंचायतों से लेकर राजनीतिक पार्टियों के बीएलओ भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
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2002 की वोटर लिस्ट का 2026 से किया जा रहा मिलान : संदीप
निर्वाचन तहसीलदार संदीप कुमार का कहना है कि आयोग के निर्देशानुसार मतदाताओं की मैपिंग की जा रही है, जिसमें 2002 की वोटर सूची का 2026 से मिलान किया जा रहा है। बड़े स्तर पर ऐसे लोग हैं, जिनका इस समय के बीच पता ही बदल चुका है। कोई नौकरी व मजदूरी के चलते कहीं दूसरी जगह रहने लगा है। युवतियां शादी के बाद ससुराल में जा चुकी है। उनका कहना है कि लोगों की ओर से की जा रही अनदेखी से काम बाधित हो रहा है
अभी तक यह तस्वीर आई है सामने
विधानसभा क्षेत्र
थानेसर
लाडवा
शाहाबाद
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