कुरुक्षेत्र। सरस्वती नदी को उत्तराखंड, हिमाचल, हरियाणा से होते हुए राजस्थान और गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक बहाने की मुहिम को अब नई गति मिल रही है। सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में राजस्थान सरकार ने सरस्वती नदी आरक्षण के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें इसरो और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि राजधानी जयपुर स्थित बिरला इंस्टीट्यूट में राजस्थान के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, सिंचाई विभाग और इसरो के अधिकारियों की एक बैठक आयोजित की गई, इसमें यह निर्णय लिया गया कि राजस्थान में सरस्वती नदी के प्रवाह को पुनः सक्रिय करने के लिए एक समर्पित समिति बनाई जाएगी। यह समिति हरियाणा सरस्वती बोर्ड के सहयोग से कार्य करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में हरियाणा सरस्वती बोर्ड न केवल प्रदेश में, बल्कि अन्य राज्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सरस्वती नदी के पुनर्जीवन का यह अभियान अब अंतरराज्यीय स्वरूप ले चुका है, जिसमें वैज्ञानिक, प्रशासनिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है। इस पवित्र कार्य में निरंतर सफलता मिल रही है।