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गुप्त नवरात्र पर मां की विशेष पूजा अर्चना
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श्री देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में भोग लगाते मुख्यातिथि जयपाल साथ में पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा।
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। शक्तिपीठ देवीकूप भद्रकाली मंदिर में प्रथम गुप्त नवरात्र पर मां की विशेष पूजा अर्चना की गई। सर्वप्रथम मां को पंचामृत स्नान कराया गया, मां की आरती कर पंच मेवे का भोग लगाकर कलश पूजन किया गया। उसके बाद भंडारे का आयोजन भी किया गया।
पीठ अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि श्रीमद् देवी भागवत में महाशक्ति की महापूजा के लिए चार नवरात्रों का पूजन विधान है। चैत्र नवरात्र, आश्विन नवरात्र के अलावा दो बार माघ व आषाढ़ शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्र में सिद्धि के लिए विशेष पूजा का समय है। इस पुण्य काल में मां को जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है। इस काल में की गई पूजा फलदायी होती है।
बुधवार को मां के दरबार में दस महाविद्याओं में प्रथम मां काली की पूजा-अर्चना की गई। गुप्त नवरात्र में प्रतिदिन दस महाविद्या काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमलालिका, मातृ शक्तियों की पूजा की जाएगी। इस अवसर पर शिमला देवी, देवेंद्र गर्ग, सिकंदर अरोड़ा, मीना जोशी, हेमराज शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। शक्तिपीठ देवीकूप भद्रकाली मंदिर में प्रथम गुप्त नवरात्र पर मां की विशेष पूजा अर्चना की गई। सर्वप्रथम मां को पंचामृत स्नान कराया गया, मां की आरती कर पंच मेवे का भोग लगाकर कलश पूजन किया गया। उसके बाद भंडारे का आयोजन भी किया गया।
पीठ अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने बताया कि श्रीमद् देवी भागवत में महाशक्ति की महापूजा के लिए चार नवरात्रों का पूजन विधान है। चैत्र नवरात्र, आश्विन नवरात्र के अलावा दो बार माघ व आषाढ़ शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्र में सिद्धि के लिए विशेष पूजा का समय है। इस पुण्य काल में मां को जल्दी प्रसन्न किया जा सकता है। इस काल में की गई पूजा फलदायी होती है।
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बुधवार को मां के दरबार में दस महाविद्याओं में प्रथम मां काली की पूजा-अर्चना की गई। गुप्त नवरात्र में प्रतिदिन दस महाविद्या काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमलालिका, मातृ शक्तियों की पूजा की जाएगी। इस अवसर पर शिमला देवी, देवेंद्र गर्ग, सिकंदर अरोड़ा, मीना जोशी, हेमराज शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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