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विश्व अर्थराइटिस दिवस पर विशेष : दिल की बीमारी का कारण बन सकता है गठिया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 13 Oct 2024 04:03 AM IST
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Special on World Arthritis Day: Arthritis can cause heart disease
कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में 53 वर्षीय महिला मीना के हाथ में जोड़ों के दर्द की जांच करते ड
कुरुक्षेत्र। जोड़ों में दर्द और सूजन है। साथ ही रोजमर्रा के काम करने में काफी परेशानी आ रही है तो इसको नजरअंदाज करने की भूल न करें। यह अर्थराइटिस यानी गठिया हो सकता है। गठिया सिर्फ जोड़ों की नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का कारण भी बन सकता है। महिलाओं में गठिया के ज्यादातर मामले देखने को मिलते हैं।
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आजकल बच्चों में भी इस बीमारी होने लगी है, जिसे जुवेनाइल अर्थराइटिस कहा जाता है। हालांकि बच्चों और युवाओं में यह बहुत ही कम देखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक आज दुनियाभर में 34 करोड़ से ज्यादा लोग गठिया की समस्या से ग्रसित हैं। अमूमन लोगों में यह समस्या 50 साल के बाद शुरू होती है। बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या बढ़ भी सकती है, जो चिरकाल तक चल सकती है।
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एलएनजेपी अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन, हृदय एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि इस अस्पताल में गठिया से पीड़ित करीब 15 लोग प्रतिदिन उपचार के लिए आते हैं। इनमें 80 फीसदी महिलाएं शामिल होती है। इस जिले में बच्चों और युवाओं में गठिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। पुरुषों में यह समस्या 50 और 60 की उम्र आरंभ होती है, जबकि महिलाओं में 40 से 50 की उम्र जोड़ों में दर्द शुरू हो सकता है। इस साल यह आपके हाथ में है, थीम पर विश्व गठिया दिवस मनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि गठिया का निदान और उपचार आपके हाथ में है।
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अर्थराइटिस के लक्षण
यहां पर अर्थराइटिस बीमारी के लक्षण देखने के लिए मिलते है जिसमें अर्थराइटिस में जोड़ों का दर्द, जकड़न, सूजन जैसे लक्षण आम हैं। ये लक्षण सुबह सोकर उठने पर ज्यादा महसूस हो सकते हैं। अगर कहीं एक जगह पर बहुत देर तक बैठे रहने के बाद उठें, तो भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हम कितना प्राकृतिक और केमिकल मुक्त खाना खाते हैं और कितना अपने शरीर को चलाते हैं यानी हमारा बॉडी मूवमेंट कितना है यह अर्थराइटिस का कारण बनता है।


बचाव के उपाय
- प्रतिदिन व्यायाम करें, इससे मांसपेशियां मजबूत होगी और जोड़ों में लचक बनी रहेगी।
-अपने शरीर के वजन को नियंत्रित रखें। अच्छा और संतुलित भोजन करें।
-ज्यादा वजन लेकर सीढ़ियों से न उतरें। फर्श पर बैठने से बचें।
-दिनभर में कम-से-कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं।
-मीठी और कैफीन युक्त चीजें खाने-पीने से बचें।
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