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किसी ने सुनाई कविता तो किसी ने टीचर से मन की बात की साझा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 12:12 AM IST
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Somebody recited poetry, some shared Mann ki Baat with the teacher
कक्षा छठी से आठवीं के विद्यार्थी के शुक्रवार को लंबे समय के बाद स्कूल पहुंचे। तीन घंटे की कक्षा में उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ टीचर के साथ मन की बातें भी साझा की। हालांकि पहले दिन जिलेभर के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 46 प्रतिशत रही। स्कूल में विद्यार्थियों ने घर बिताए समय के बारे टीचर को बताया वहीं टीचर भी इतने दिनों बाद विद्यार्थियों से मिलकर काफी खुशी महसूस कर रहे थे। सुबह जब विद्यार्थी स्कूल पहुंचना शुरू हुए तो विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही सबसे उनकी थर्मल स्क्रीनिंग हुई, जिसके पश्चात हाथों को सैनिटाइज कराते हुए कक्षा में प्रवेश मिला। विद्यार्थी पीने का पानी अपने घर से ही लेकर आए। जिले में 297 राजकीय मिडल और करीब 300 निजी स्कूल हैं। सभी स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ-साथ उनका व उनके अभिभावकों का हालचाल भी जाना गया। राजकीय कन्या विद्यालय थानेसर में छात्राओं ने कोरोना के जल्द से जल्द खत्म करने की प्रार्थना की। वहीं कक्षा में पढ़ाई के साथ साथ भी सुनाई। इस दौरान कुछ छात्राओं ने टीचर के साथ पारिवारिक बातें भी साझा की कि किस तरह से कोरोना काल में उनका परिवार जीवन यापन कर रहा है। इतने दिनों बाद स्कूल पहुंचने पर विद्यार्थियों की खुशी उनके चेहरे से झलक रही थी। अमर उजाला के साथ उन्होंने अपने-अपने शब्दों में इस खुशी को बयां किया।
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आठवीं कक्षा की छात्रा मुस्कान ने बताया कि बेशक घर रहकर भी हर क्लास लगा रहे थे, लेकिन स्कूल में आकर जो खुशी महसूस कर रहे हैं। इसका कोई ठिकाना नहीं है। घर पर रहकर अपनी सहेलियों को बहुत मिस किया।
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आठवीं कक्षा की छात्रा नैना ने कहा कि उसने इसी वर्ष राजकीय कन्या स्कूल में एडमिशन लिया। कक्षाएं शुरू होते ही लॉकडाउन लग गया। ऑनलाइन कक्षा में तो सबको देखती रहती थी, लेकिन आज सामने से सबसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।
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छात्रा योगिमा ने स्कूल पहुंच टीचर के साथ मन की सभी बातें साझा की और घर पर रहकर वह किस प्रकार खाली समय का सदुपयोग करती थी सब बताया। ऑनलाइन कक्षा में कुछ विषय टेक्निकल एरर के वजह से कंपलीट नहीं हो पाते उन सबके बारे जानकारी ली।
आठवीं कक्षा की छात्रा मोनिका ने कक्षा में कविता सुनाई, जिस पर कक्षा की सभी छात्राओं ने तालियां बजाई। मोनिका ने कविता में बेटी के महत्व के बारे बताया। कहा- बेटी हूं मैं बेटी हूं, तारा बनूंगी मैं और माता पिता का सहारा बनूंगी मैं।
मास्क पहनना कितना जरूरी है इस बारे में आठवीं कक्षा की गीता ने सभी को बताया। गीता ने कहा कि अब हम घर से बाहर निकलकर स्कूल आ रहे हैं। घर पर मम्मी पापा हमारा ख्याल रखते हैं और स्कूल में टीचर, लेकिन घर से स्कूल तक के रास्ते में हमें हमारा ध्यान खुद रखना होगा। जरूरी है मास्क को न उतारें और घर व स्कूल पहुंचते ही हाथों को अच्छे से सैनिटाइज कर लें।
आठवीं की छात्रा दीक्षा ने बताया कि उनके घर पर एक ही फोन है, जिसे भी पापा काम पर जाते समय साथ ले जाते। ऑनलाइन कक्षा से कई बार वंचित रह जाती थी। अब स्कूल में आकर वो सारा सिलेबस जल्द से जल्द कवर करूंगी जो घर पर रहकर रह गया था।
कई बच्चों के पास मोबाइल न होने के कारण वे ऑनलाइन क्लास नहीं लगा पा रहे थे। ऐसे में आठवीं कक्षा की प्रिया ने उनकी मजबूरी समझी और अपनी क्लास खत्म होते ही अपना मोबाइल पड़ोस में अपनी सहेलियों को दे देती थी, ताकि वे भी अपनी-अपनी क्लास लगा सकें।
सातवीं कक्षा की भावना ने बताया कि ऑनलाइन कक्षा में भी टीचर बहुत अच्छे से पढ़ाते थे, लेकिन कई बार नेटवर्क चले जाने से या किसी अन्य कारण बहुत सी बातें रह जाती थीं। अब स्कूल में पढ़ाई करेंगे तो ऐसी कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सातवीं की छात्रा गुड़िया ने कहा कि उसे घर पर रहकर स्कूल की बहुत याद आती थी। ऑनलाइन कक्षा में बेशक सब दिखाई दे जाते थे, लेकिन बात नहीं हो पाती थी। अब स्कूल में टीचर से अपनी सहेलियों से बातें भी कर सकती हूं।
सलोनी ने बताया कि वह घर पर रहकर क्लासरूम को बहुत मिस किया करती थी। वहीं भगवान से भी प्रार्थना करती थी जल्द से जल्द यह महामारी खत्म हो जाए, ताकि लोग पहले की तरह सामान्य जिंदगी जी सकें। अब हालात थोड़े सुधरने पर क्लास रूम में बैठक काफी खुश हूं।
सातवीं की छात्रा तमन्ना ने बताया कि उसके घर एक ही फोन था, जिस पर हम तीन भाई बहन एक-एक करके ऑनलाइन क्लास लगाते थे। जब पापा को काम पर जाना होता था तो वो भी हमारे पास नहीं रहता। उन्हें पढ़ने में काफी परेशानी होती थी। अब स्कूल आ गई हूं तो खूब पढूंगी।

राजकीय कन्या विद्यालय जूनियर विंग की प्राचार्या पूनम ने बताया कि कक्षा छठी से लेकर आठवीं तक कुल 273 विद्यार्थी हैं, जिनमें से पहले दिन 79 स्कूल आए। कक्षा छठी में 18, सातवीं में 30 और आठवीं में 31 बच्चे आए। कक्षा में प्रवेश से पहले सभी की थर्मल स्क्रीनिंग करते हुए हाथों को सैनिटाइज कराया। कक्षा में सोशल डिस्टेंस का पूरा ख्याल रखा गया।
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