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सैनिकों की पीड़ा : सेवानिवृत्ति के बाद सम्मान की कमी, टोल प्लाजा हो नि:शुल्क
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कुरुक्षेत्र। सेवानिवृत कैप्टन गुरमेल सिंह।
देश की रक्षा में 24 घंटे मुस्तैद रहने वाले सैनिक -50 डिग्री से लेकर 50 डिग्री तापमान तक देश की सीमाओं पर अपनी जान की बाजी लगाकर डटे रहते हैं। परंतु जब यही सैनिक सेवानिवृत्त होकर समाज में लौटता है तो उसे अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाता। यह कहना है सेवानिवृत्त कैप्टन गुरमेल सिंह का।
उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा देखने को मिला है जब युद्ध से लौटते हुए सैनिकों को ट्रेन से उतार दिया जाता है या टोल प्लाजा पर उनसे कहासुनी हो जाती है। ऐसे व्यवहार से सैनिक का मन आहत होता है। देश सेवा के बाद जब उन्हें पेंशन के रूप में बेहद सीमित धनराशि मिलती है तो उनका गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को कम से कम टोल प्लाजा की नि:शुल्क सुविधा मिलनी चाहिए ताकि उन्हें सम्मान का अनुभव हो। साथ ही सरकार को अग्निवीर योजना को बंद कर पारंपरिक नियमित भर्ती प्रणाली को फिर से लागू करना चाहिए जिससे युवा स्थायी रूप से देश सेवा कर सकें। उन्होंने कहा कि आज का नौजवान सेना में कॅरिअर के साथ-साथ स्थायित्व चाहता है, न कि सिर्फ चार साल की सेवा।
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यह आवश्यक है कि सरकार सैनिकों की पीड़ा को समझे और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी गरिमा और सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा देखने को मिला है जब युद्ध से लौटते हुए सैनिकों को ट्रेन से उतार दिया जाता है या टोल प्लाजा पर उनसे कहासुनी हो जाती है। ऐसे व्यवहार से सैनिक का मन आहत होता है। देश सेवा के बाद जब उन्हें पेंशन के रूप में बेहद सीमित धनराशि मिलती है तो उनका गुजारा करना भी मुश्किल हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को कम से कम टोल प्लाजा की नि:शुल्क सुविधा मिलनी चाहिए ताकि उन्हें सम्मान का अनुभव हो। साथ ही सरकार को अग्निवीर योजना को बंद कर पारंपरिक नियमित भर्ती प्रणाली को फिर से लागू करना चाहिए जिससे युवा स्थायी रूप से देश सेवा कर सकें। उन्होंने कहा कि आज का नौजवान सेना में कॅरिअर के साथ-साथ स्थायित्व चाहता है, न कि सिर्फ चार साल की सेवा।
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यह आवश्यक है कि सरकार सैनिकों की पीड़ा को समझे और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी गरिमा और सुविधाएं प्रदान की जाएं।