{"_id":"64c2dda1371c840c61093cc8","slug":"shri-brahmapuri-annakshetra-ashram-trust-will-work-for-the-promotion-of-48-kos-pilgrimages-kurukshetra-news-c-45-1-sknl1005-1916-2023-07-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: 48 कोस तीर्थों के प्रचार के लिए काम करेगा श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: 48 कोस तीर्थों के प्रचार के लिए काम करेगा श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। महाभारत कालीन 48 कोस तीर्थ स्थानों के प्रचार प्रसार के लिए श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट द्वारा दिल्ली सहित बड़े शहरों से बस सेवा के माध्यम से उद्योपतियों व गणमान्यजनों को कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए लाया जाएगा। इसको लेकर श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी चिंरजीपुरी के नेतृत्व में 18 मंजिला ज्ञान मंदिर में बैठक का आयोजन किया गया।
ट्रस्ट के संस्थापक त्यागमूर्ति स्वामी चिरंजी पुरी ने बताया कि ज्ञान मंदिर का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के संदेश एवं महाभारत कालीन तीर्थ स्थानों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना है। ट्रस्ट के चेयरमैन सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि पांडवों ने भी अपने पूर्वजों का पिंडदान कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर किया था। ऐसी तपोभूमि पर विश्व स्तरीय ज्ञान मंदिर का निर्माण 48 कोस के अंतर्गत आने वाले तीर्थ स्थानों के महत्व को दर्शाने में अपनी भूमिका अदा करेगा। ज्ञान मंदिर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है।
ज्ञान मंदिर को दार्शनिक मंदिर बनाया जा रहा है ताकि कुरुक्षेत्र की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सके। इतना ही नही कुरुक्षेत्र के दर्शन के लिए ज्ञान मंदिर की एक मंजिल को तैयार किया जा रहा है ताकि उपर के तल से पूरे कुरुक्षेत्र को देखा जा सके। अध्यक्ष राजेश गोयल ने बताया कि प्रदेश सरकार भी धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 48 कोस में आने वाले 134 तीर्थ स्थानों को चिन्हित कर उनके जीर्णोद्धार के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट भी विशेष कार्य करने जा रहा है ताकि पर्यटकों को कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए आकर्षित किया जा सके।
विज्ञापन
बॉक्स
ज्ञान मंदिर व 48 कोस भ्रमण के लिए आएंगी चार बसें
ट्रस्ट के सदस्य अशोक गुप्ता, दीपाली, दिल्ली निवासी एवं कृष्ण अग्रवाल जोगीराम टोहाना ने बताया कि दो अगस्त को दिल्ली व अन्य क्षेत्रों से चार बसों के माध्यम से गणमान्यजनों व उद्योगपतियों को महाभारत ज्ञान मंदिर व कालीन 48 कोस भ्रमण करवाया जाएगा। इस दौरान ज्ञान मंदिर के अलावा ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, गीता जन्म स्थली ज्योतिसर, संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाय, काम्यकेश्वर तीर्थ सहित अन्य तीर्थों का भ्रमण करवाया जाएगा।
विज्ञापन
ट्रस्ट के संस्थापक त्यागमूर्ति स्वामी चिरंजी पुरी ने बताया कि ज्ञान मंदिर का मुख्य उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के संदेश एवं महाभारत कालीन तीर्थ स्थानों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना है। ट्रस्ट के चेयरमैन सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि पांडवों ने भी अपने पूर्वजों का पिंडदान कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर किया था। ऐसी तपोभूमि पर विश्व स्तरीय ज्ञान मंदिर का निर्माण 48 कोस के अंतर्गत आने वाले तीर्थ स्थानों के महत्व को दर्शाने में अपनी भूमिका अदा करेगा। ज्ञान मंदिर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर पूरा किया जा रहा है।
विज्ञापन
ज्ञान मंदिर को दार्शनिक मंदिर बनाया जा रहा है ताकि कुरुक्षेत्र की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो सके। इतना ही नही कुरुक्षेत्र के दर्शन के लिए ज्ञान मंदिर की एक मंजिल को तैयार किया जा रहा है ताकि उपर के तल से पूरे कुरुक्षेत्र को देखा जा सके। अध्यक्ष राजेश गोयल ने बताया कि प्रदेश सरकार भी धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत 48 कोस में आने वाले 134 तीर्थ स्थानों को चिन्हित कर उनके जीर्णोद्धार के लिए प्रयासरत है। इसी कड़ी में श्री ब्रह्मपुरी अन्नक्षेत्र आश्रम ट्रस्ट भी विशेष कार्य करने जा रहा है ताकि पर्यटकों को कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए आकर्षित किया जा सके।
विज्ञापन
बॉक्स
ज्ञान मंदिर व 48 कोस भ्रमण के लिए आएंगी चार बसें
ट्रस्ट के सदस्य अशोक गुप्ता, दीपाली, दिल्ली निवासी एवं कृष्ण अग्रवाल जोगीराम टोहाना ने बताया कि दो अगस्त को दिल्ली व अन्य क्षेत्रों से चार बसों के माध्यम से गणमान्यजनों व उद्योगपतियों को महाभारत ज्ञान मंदिर व कालीन 48 कोस भ्रमण करवाया जाएगा। इस दौरान ज्ञान मंदिर के अलावा ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, गीता जन्म स्थली ज्योतिसर, संगमेश्वर महादेव मंदिर अरूणाय, काम्यकेश्वर तीर्थ सहित अन्य तीर्थों का भ्रमण करवाया जाएगा।