फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Shivling was worshiped here first

श्रृष्टि में पहली बार धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के आदी तीर्थ स्थाणु पर ही हुई शिवलिंग की पूजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Mar 2021 02:40 AM IST
विज्ञापन
Shivling was worshiped here first
देश-दुनिया में जहां भी शिवलिंग विराजमान हैं, वहां पूजा और जलाभिषेक की परंपरा है, लेकिन धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान शिव के शिवलिंग की पहली बार पूजा धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के स्थाणु तीर्थ पर ही हुई थी। मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण के साथ पांडवों ने यहां पूजा कर भगवान शिव से विजयीश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया था। महाशिवरात्रि पर हर साल यहां जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगता है।
विज्ञापन

स्थाणु महादेव मंदिर, यानी शिव का स्थान। स्थाणु मंदिर के मुख्य महंत एवं भारत साधु समाज के प्रांतीय अध्यक्ष बंशीपुरी के मुताबिक धर्मग्रंथों में इस तीर्थ को शिव का आदि स्थान कहा गया है। धर्मग्रंथों और इतिहास के पन्नों पर स्थाणु तीर्थ का उल्लेख सदियों से नहीं, बल्कि युग युगांतर से है। स्थाणु, स्थाणीश्वर, स्थाणेश्वर का अपभ्रंश ही अब थानेसर है। यही थानेसर करीब 1400 साल पहले अंतिम हिंदू सम्राट हर्षवर्धन की राजधानी रहा। यहां वर्धनवंश के शासनकाल के दौरान ही चीन के इतिहासकार ह्वेनसांग कुरुक्षेत्र आए थे। उन्होंने यहां 100 देव मंदिरों और भगवान शिव के इस भव्य एवं समृद्ध मंदिर का भी उल्लेख किया था, जिसमें अकूत संपत्ति हीरे जवाहरात और सोना,चांदी था। इस उल्लेख के करीब 400 साल बाद, यानी सन 1014 में विदेशी आततायी महमूद गजनी ने भारत के जिन प्रमुख मंदिरों को लूटा, उनमें प्रमुख मंदिर थानेसर का यह शिव मंदिर भी था। थानेसर के इस मंदिर की लूट का उल्लेख इतिहास के पन्नों पर दर्ज है।
विज्ञापन

राजा अनंगपाल की प्रार्थना को गजनी ठुकराकर लूटा था मंदिर
इतिहासकार एवं बीपीआर कालेज के प्रिंसिपल योगेश्वर जोशी के मुताबिक गजनी ने थानेसर के मंदिर को लूटने के उद्देश्य से राजा अनंगपाल को संदेश भेजा था कि वह अपनी सेना के विश्वसनीय लोगों को सेवा में भेजे। अनंगपाल ने महमूद की सेना के लिये भोजन आदि की व्यवस्था की। उसने अपने भाई के साथ गजनी सेवा में दो हजार सैनिक भेजे और प्रार्थना की कि थानेसर के मंदिर को न तोड़े और इसके बदले में बड़ी रकम ले ले, मगर गजनी ने इस प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया था। दिल्ली के राजा ने हिंदू महाराजाओं का लिखा कि थानेसर की रक्षा करनी चाहिये, लेकिन इन राजाओं के थानेसर पहुंचने के पहले ही महमूद गजनी ने मंदिर की अकूत संपत्ति लूट ली थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

यहां की पवित्र बूंदों से राजा बान को मिली थी कुष्ट रोग से मुक्ति
स्थाणु मंदिर के मुख्य महंत बंशीपुरी महाराज के मुताबिक मंदिर के सामने एक सरोवर है और इस सरोवर के मध्य प्राचीन कूप भी था। एक पौराणिक उल्लेख के अनुसार इस सरोवर की कुछ पवित्र बूंदों से ही राजा बान का कुष्ठ रोग ठीक हुआ था। मान्यता है कि कुरुक्षेत्र की 8 कोसी और 48 कोसी परिक्रमा स्थाणु तीर्थ के दर्शन के बिना अधूरी होती है।

गुरु तेगबहादुर जी ने स्थाणु तीर्थ पर दिया था उपदेश
स्थाणु तीर्थ के सरोवर के एक किनारे पर सिखों के नौवें गुरु साहिबान तेगबहादुर जी की एतिहासिक गुरुद्वारा नौवीं पातशाही है। एसजीपीसी के धर्मप्रचारक हरकीरत सिंह के मुताबिक जींद धमतान साहिब से लौटते समय गुरु महाराज जी परिवार सहित यहां आए थे। इस मौके पर उन्होंने स्थाणु तीर्थ पर वास करने वाले पंडित पुरोहितों व अन्य सेवकों को पुण्य उपदेश दिया था। हरकीरत सिंह के मुताबिक गुरु तेगबहादुर महाराज जी जनवरी 1665 (15 माघ 1722 विक्रमी) में आए थे और तीन दिन तक उन्होंने यहां प्रवास किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed