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Kurukshetra News: बाबैन के स्कूल होंगे मर्ज, विरोध में उतरा अध्यापक संघ
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कुरुक्षेत्र। बाबैन ब्लॉक के कई सरकारी स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी चल रही है। जिसके विरोध में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ उतर आया है। संघ ने आरोप लगाया कि सरकार कम छात्र संख्या का हवाला देकर स्कूलों को बंद करने जा रही है। जबकि असली समस्या स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि स्कूल मर्जर की योजना वापस नहीं ली गई तो प्रदेशभर में इसका विरोध किया जाएगा।
शुक्रवार को संघ के पदाधिकारियों ने बाबैन ब्लॉक के मिर्चहेड़ी, जालखेड़ी और सुनारियां गांवों में ग्रामीणों के साथ बैठक कर स्कूल मर्जर के खिलाफ जनसमर्थन जुटाया। संघ के राज्य प्रधान प्रभु सिंह ने कहा कि सरकार ने फिलहाल बाबैन (कुरुक्षेत्र) और निसिंग (करनाल) ब्लॉक को इस योजना के लिए चिह्नित किया है, लेकिन भविष्य में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 198 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है, जबकि 1051 स्कूल केवल एक अध्यापक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे हालात में अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा उठना स्वाभाविक है और छात्र निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार शिक्षकों के रिक्त पद भरने की बजाय स्कूलों को मर्ज करने का रास्ता अपना रही है।
अध्यापक नेताओं ने कहा कि शिक्षा के सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नए स्कूल खोलने और शिक्षकों की भर्ती करने की जरूरत है।
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संगठन ने चेतावनी दी कि यदि स्कूल मर्जर की योजना वापस नहीं ली गई तो प्रदेशभर में इसका विरोध किया जाएगा।
शुक्रवार को संघ के पदाधिकारियों ने बाबैन ब्लॉक के मिर्चहेड़ी, जालखेड़ी और सुनारियां गांवों में ग्रामीणों के साथ बैठक कर स्कूल मर्जर के खिलाफ जनसमर्थन जुटाया। संघ के राज्य प्रधान प्रभु सिंह ने कहा कि सरकार ने फिलहाल बाबैन (कुरुक्षेत्र) और निसिंग (करनाल) ब्लॉक को इस योजना के लिए चिह्नित किया है, लेकिन भविष्य में इसका दायरा और बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 198 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है, जबकि 1051 स्कूल केवल एक अध्यापक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे हालात में अभिभावकों का सरकारी स्कूलों से भरोसा उठना स्वाभाविक है और छात्र निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार शिक्षकों के रिक्त पद भरने की बजाय स्कूलों को मर्ज करने का रास्ता अपना रही है।
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अध्यापक नेताओं ने कहा कि शिक्षा के सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नए स्कूल खोलने और शिक्षकों की भर्ती करने की जरूरत है।