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Kurukshetra News: ‘चीफ की दावत’ से बुजुर्गों का तिरस्कार करने वाली संतान पर कटाक्ष
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कुरुक्षेत्र। कलाकृर्ति भवन में नाटक चीफ की दावत का मंचन करते करते कलाकार।
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कुरुक्षेत्र। कला कृति केंद्र में आयोजित उत्थान उत्सव के दूसरे दिन भीष्म साहनी की कहानी चीफ की दावत कहानी का नाटक के रूप में मंचन किया गया। मंचन के दौरान कलाकारों ने अपनी ही संतान द्वारा तिरस्कृत और मानसिक पीड़ा झेलने वाले बुजुर्गों की दयनीय दशा दिखाई। जिस पर वहां मौजूद दर्शक भावुक हो गए। कार्यक्रम में विद्या भारती संस्कृति शिक्षण संस्थान के निदेशक डाॅ. रामेंद्र सिंह मुख्यातिथि रहे।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि उपभोक्तावादी युग में अधिकाधिक धन, यश, आराम आदि ही जीवन का चरम लक्ष्य माना जाता है। ऐसी हालत में पारिवारिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं और मां-बाप अपनी संतान द्वारा उपेक्षित हो जाते हैं। नाटक में आधुनिकता के रंग में डूबकर अपने माता-पिता का तिरस्कार करने वाले बच्चों के ऊपर कटाक्ष किया गया। सूत्रधार के माध्यम से शुरू हुई नाटक की कहानी शामनाथ के इर्दगिर्द घूमती है, जहां अपने बॉस को खुश करने के लिए शामनाथ उन्हें घर पर दावत के लिए आमंत्रित करता है, लेकिन अपनी मां के अनपढ़ व गांव की होने के कारण उसे बॉस के सामने आने से मना कर देता है। मां दावत के लिए अपनी सहेली के घर जाने की बात करती है तो बेटा घर से बाहर जाने से मना कर देता है। बेटे के तिरस्कार और बहू की डांट के आगे मां कुछ नहीं बोल पाती। घर में शामनाथ के बॉस आ जाते हैं।
शामनाथ तरक्की पाने की चाह में अपने चीफ को खुश करने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ता। महंगी व्हीस्की और बढ़िया डिनर होने के बाद जब कहानी जब आगे बढ़ती है तो अचानक बॉस की नजर शामनाथ की मां पर पड़ती है। शामनाथ से बॉस जब बूढ़ी औरत के बारे में पूछते हैं, तो शामनाथ बताता है कि वह उसकी मां है। अनपढ़ और गांव की होने के कारण मां सबके सामने नहीं आना चाहती थी। मां को देखकर चीफ बहुत खुश होते हैं, और मां से ढेर सारी बातें करते हैं। मां का बॉस से मिलना शामनाथ की तरक्की में सहायक सिद्ध होता है। बॉस मां को एक फुलकारी बनाने को कहते हैं, मां के मना करने पर भी शामनाथ फुलकारी के लिए हां कर देता है, लेकिन जब बॉस के जाने के बाद मां मना करती है, तो शामनाथ मां को फटकार लगाता है और बुरा भला कहना शुरू कर देता है। ऐसे में मां अकेली पड़ जाती है और बेटे के तिरस्कार से आहत होकर अपने प्राण छोड़ देती है। न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत तथा भीष्म साहनी द्वारा लिखित कहानी ‘चीफ की दावत’ का निर्देशन रंगकर्मी विकास शर्मा द्वारा किया गया। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला तथा हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि समाजसेवी जयभगवान सिंगला उपस्थित रहे। मंच का संचालन डाॅ. मोहित गुप्ता ने किया। नाटक में मां की भूमिका में राजकुमारी शर्मा और बेटे शामनाथ की भूमिका में सागर शर्मा ने अपने अभिनय कौशल दिखाए। सूत्रधार अनुराग यदुवंशी रहे। वहीं शामनाथ की पत्नी निशा के किरदार में निकेता कौशिक, चीफ गौरव दीपक जांगड़ा, बॉस मनू महक माल्यान, नौकर फतेह रहे।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि उपभोक्तावादी युग में अधिकाधिक धन, यश, आराम आदि ही जीवन का चरम लक्ष्य माना जाता है। ऐसी हालत में पारिवारिक मूल्य खत्म होते जा रहे हैं और मां-बाप अपनी संतान द्वारा उपेक्षित हो जाते हैं। नाटक में आधुनिकता के रंग में डूबकर अपने माता-पिता का तिरस्कार करने वाले बच्चों के ऊपर कटाक्ष किया गया। सूत्रधार के माध्यम से शुरू हुई नाटक की कहानी शामनाथ के इर्दगिर्द घूमती है, जहां अपने बॉस को खुश करने के लिए शामनाथ उन्हें घर पर दावत के लिए आमंत्रित करता है, लेकिन अपनी मां के अनपढ़ व गांव की होने के कारण उसे बॉस के सामने आने से मना कर देता है। मां दावत के लिए अपनी सहेली के घर जाने की बात करती है तो बेटा घर से बाहर जाने से मना कर देता है। बेटे के तिरस्कार और बहू की डांट के आगे मां कुछ नहीं बोल पाती। घर में शामनाथ के बॉस आ जाते हैं।
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शामनाथ तरक्की पाने की चाह में अपने चीफ को खुश करने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ता। महंगी व्हीस्की और बढ़िया डिनर होने के बाद जब कहानी जब आगे बढ़ती है तो अचानक बॉस की नजर शामनाथ की मां पर पड़ती है। शामनाथ से बॉस जब बूढ़ी औरत के बारे में पूछते हैं, तो शामनाथ बताता है कि वह उसकी मां है। अनपढ़ और गांव की होने के कारण मां सबके सामने नहीं आना चाहती थी। मां को देखकर चीफ बहुत खुश होते हैं, और मां से ढेर सारी बातें करते हैं। मां का बॉस से मिलना शामनाथ की तरक्की में सहायक सिद्ध होता है। बॉस मां को एक फुलकारी बनाने को कहते हैं, मां के मना करने पर भी शामनाथ फुलकारी के लिए हां कर देता है, लेकिन जब बॉस के जाने के बाद मां मना करती है, तो शामनाथ मां को फटकार लगाता है और बुरा भला कहना शुरू कर देता है। ऐसे में मां अकेली पड़ जाती है और बेटे के तिरस्कार से आहत होकर अपने प्राण छोड़ देती है। न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत तथा भीष्म साहनी द्वारा लिखित कहानी ‘चीफ की दावत’ का निर्देशन रंगकर्मी विकास शर्मा द्वारा किया गया। कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला तथा हरियाणा कला परिषद अंबाला मंडल के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि समाजसेवी जयभगवान सिंगला उपस्थित रहे। मंच का संचालन डाॅ. मोहित गुप्ता ने किया। नाटक में मां की भूमिका में राजकुमारी शर्मा और बेटे शामनाथ की भूमिका में सागर शर्मा ने अपने अभिनय कौशल दिखाए। सूत्रधार अनुराग यदुवंशी रहे। वहीं शामनाथ की पत्नी निशा के किरदार में निकेता कौशिक, चीफ गौरव दीपक जांगड़ा, बॉस मनू महक माल्यान, नौकर फतेह रहे।

कुरुक्षेत्र। कलाकृर्ति भवन में नाटक चीफ की दावत का मंचन करते करते कलाकार।
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