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सभ्यता से जुड़ने के लिए सरस्वती की पूजा जरूरी : सोलंकी
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:28 PM IST
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हरियाणा व पंजाब के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक सरस्वती के साथ देश की सभ्यता और संस्कृति जुड़ी हुई है। इसलिए प्रदेश सरकार ने देश के साथ आमजन को जोड़ने के लिए पहली बार सरस्वती हेरीटेज यात्रा का आयोजन किया।
इस जगजागरण यात्रा से लोगों को सभ्यता और संस्कृति का मनन करने का अवसर भी मिलेगा। राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी वीरवार को देर शाम ज्योतिसर तीर्थ स्थल पर सरस्वती महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
इससे पहले राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने ज्योतिसर सरोवर तट पर सरस्वती आरती में भी भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार, सरस्वती हेरीटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी, सरस्वती हेरीटेज बोर्ड के सीईओ विजेन्द्र कुमार, पूर्व मंत्री एमएल रंगा, एडीसी प्रभजोत सिंह सहित अन्य मेहमानों ने भी पूजा पाठ में भाग लिया।
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राज्यपाल ने सरस्वती महोत्सव एवं वसंत पंचमी की प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि सरस्वती हेरीटेज बोर्ड की तरफ से सरस्वती महोत्सव मनाया जा रहा है। इस पवित्र नदी के साथ विशाल महिमा जुड़ी हुई है। यह हरियाणा का सौभाग्य है कि यह नदी हरियाणा की पावन धरा पर बही। इस मौके पर एसपी सिमरदीप सिंह, एसडीएम थानेसर सतबीर कुंडू, एसडीएम पेहवा डॉ. किरण सिंह, सीटीएम डॉ. पूजा भारती आदि लोग मौजूद रहे।
सांस्कृतिक विरासत को खोजकर ही बनेंगे विश्व गुरु
राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि 21वीं सदी भारत की नियति एवं उसका भविष्य है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को खोजकर ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। वे वीरवार शाम केयू युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग और सरस्वती हेरीटेज बोर्ड की ओर से आयोजित सरस्वती महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने इस मौके पर सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की तरफ से तैयार सरस्वती आरती की सीडी का विमोचन भी किया। राज्यपाल प्रो. सोलंकी कहा कि सरस्वती नदी के किनारे ही भारतीय वैदिक संस्कृति का विकास हुआ था। सरस्वती नदी को खोजना उस प्राचीन वैदिक संस्कृति को खोजना है, जो भारत के गौैरवशाली इतिहास का आइना है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने कहा कि सरस्वती ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत की देवी हैं। सरस्वती मनुष्य की यात्रा को मानव से देवत्व की ओर ले जाती है। हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि 1981 में सरस्वती की खोज का काम शुरू हुआ।
निफा की सरस्वती की कहानी पर आधारित नृत्य नाटिका को डीएवी कालेज यमुनानगर की छात्राओं ने पेश किया। इस मौके पर केयू कुलपति हरदीप कुमार, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, लाडवा के विधायक पवन सैनी, कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार सैनी, एडीसी प्रभजोत सिंह, एसपी सिमरदीप सिंह, एसके रमन, हरिबान बजे, एसराम मोहन, हेरिटेज बोर्ड के सीईओ बिजेंद्र, भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, विद्या भारती संस्कृत शिक्षा संस्थान के निदेशक रामेन्द्र सिंह, प्रो.अनिल वोहरा, प्रो.अनिल वशिष्ठ, प्रो.श्याम कुमार आदि मौजूद रहे।
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इस जगजागरण यात्रा से लोगों को सभ्यता और संस्कृति का मनन करने का अवसर भी मिलेगा। राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी वीरवार को देर शाम ज्योतिसर तीर्थ स्थल पर सरस्वती महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
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इससे पहले राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने ज्योतिसर सरोवर तट पर सरस्वती आरती में भी भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार, सरस्वती हेरीटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज, थानेसर विधायक सुभाष सुधा, लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी, सरस्वती हेरीटेज बोर्ड के सीईओ विजेन्द्र कुमार, पूर्व मंत्री एमएल रंगा, एडीसी प्रभजोत सिंह सहित अन्य मेहमानों ने भी पूजा पाठ में भाग लिया।
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राज्यपाल ने सरस्वती महोत्सव एवं वसंत पंचमी की प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि सरस्वती हेरीटेज बोर्ड की तरफ से सरस्वती महोत्सव मनाया जा रहा है। इस पवित्र नदी के साथ विशाल महिमा जुड़ी हुई है। यह हरियाणा का सौभाग्य है कि यह नदी हरियाणा की पावन धरा पर बही। इस मौके पर एसपी सिमरदीप सिंह, एसडीएम थानेसर सतबीर कुंडू, एसडीएम पेहवा डॉ. किरण सिंह, सीटीएम डॉ. पूजा भारती आदि लोग मौजूद रहे।
सांस्कृतिक विरासत को खोजकर ही बनेंगे विश्व गुरु
राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि 21वीं सदी भारत की नियति एवं उसका भविष्य है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को खोजकर ही भारत विश्व गुरु बन सकता है। वे वीरवार शाम केयू युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग और सरस्वती हेरीटेज बोर्ड की ओर से आयोजित सरस्वती महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने इस मौके पर सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की तरफ से तैयार सरस्वती आरती की सीडी का विमोचन भी किया। राज्यपाल प्रो. सोलंकी कहा कि सरस्वती नदी के किनारे ही भारतीय वैदिक संस्कृति का विकास हुआ था। सरस्वती नदी को खोजना उस प्राचीन वैदिक संस्कृति को खोजना है, जो भारत के गौैरवशाली इतिहास का आइना है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने कहा कि सरस्वती ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत की देवी हैं। सरस्वती मनुष्य की यात्रा को मानव से देवत्व की ओर ले जाती है। हेरिटेज बोर्ड के वाइस चेयरमैन प्रशांत भारद्वाज ने बताया कि 1981 में सरस्वती की खोज का काम शुरू हुआ।
निफा की सरस्वती की कहानी पर आधारित नृत्य नाटिका को डीएवी कालेज यमुनानगर की छात्राओं ने पेश किया। इस मौके पर केयू कुलपति हरदीप कुमार, थानेसर के विधायक सुभाष सुधा, लाडवा के विधायक पवन सैनी, कुलसचिव डॉ. प्रवीण कुमार सैनी, एडीसी प्रभजोत सिंह, एसपी सिमरदीप सिंह, एसके रमन, हरिबान बजे, एसराम मोहन, हेरिटेज बोर्ड के सीईओ बिजेंद्र, भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर, विद्या भारती संस्कृत शिक्षा संस्थान के निदेशक रामेन्द्र सिंह, प्रो.अनिल वोहरा, प्रो.अनिल वशिष्ठ, प्रो.श्याम कुमार आदि मौजूद रहे।