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सरस्वती नदी के विकास से सभ्यता व संस्कृति का संरक्षण कर रही सरकार

Mon, 30 Jan 2017 11:46 PM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला Updated Mon, 30 Jan 2017 11:46 PM IST
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saraswati river, conference, minister, talk, government, kurukshetra
innogeration of conference - फोटो : अमर उजाला

कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने कहा कि सरस्वती नदी के विकास से प्रदेश सरकार भारत की महान वैदिक सभ्यता व संस्कृति के संरक्षण का काम कर रही है। सरकार सरस्वती के विकास के लिए संकल्पबद्ध है और पिछले एक वर्ष में जन-जन में जनचेतना पैदा करने के लिए निरंतर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। सरस्वती की निर्मल धारा हरियाणा में ही नहीं देश के 7 राज्यों में बहे इसके लिए सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल कर कमेटी का गठन किया गया है जो सरस्वती के विकास के लिए काम कर रहे हैं। वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग व हरियाणा सरस्वती हेरीटेज विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में सरस्वती नदी पर आयोजित 2 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्यातिथि बोल रही थी।

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उन्होंने कहा कि सरस्वती नदी होने के अब वैज्ञानिक, पुरातात्विक प्रमाण उपलब्ध हैं। इसरो ने 2002 में सरस्वती नदी के बहाव के रास्ते को बताकर इसके प्रमाण दिए थे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि प्रदेश सरकार सरस्वती को जीवंत करने का प्रयास कर रही है। कार्यक्रम के अध्यक्ष केयू के कुलपति डॉ. केसी शर्मा ने कहा है कि कुरुक्षेत्र से गीता व सरस्वती दोनों का संबंध है इसलिए कुरुक्षेत्र पावनधरा है। केयू ने गीता के बाद सरस्वती पर 2 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विद्वानों का सम्मेलन आयोजित किया है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय वैदिक सभ्यता को लेकर दुनियाभर के विद्वानों ने विभ्रम पैदा किए लेकिन अब यह प्रमाणित हो चुका है कि सरस्वती नदी के तट पर ही महान भारतीय वैदिक संस्कृति का जन्म हुआ है। विशिष्ट अतिथि स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सरस्वती भारत की गरिमा है। सरस्वती हेरीटेज विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रशांत भारद्वाज ने कहा कि संगोष्ठी में सरस्वती को लेकर कई प्रश्रों का उत्तर मिला है व कई प्रश्न अनसुलझे रहे हैं।      
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अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के सचिव डॉ बाल मुकुंद व पूर्व निदेशक खादी ग्रामोद्योग भारत सरकार व महानिदेशक साइंस एंड टेक्नोलॉजी मध्यप्रदेश डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि सरस्वती के विकास के लिए हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अमेेरिका के यूनिवर्सिटी आफ डर्टमाउंट के प्रोफेसर बलराम सिंह ने कहा कि सरस्वती नदी भी थी। इसके किनारे सभ्यता भी थी। कांफ्रेंस के संयोजक प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि यह दो दिवसीय कांफ्रेस पूरी तरह से सफल रही है। मंच का संचालन युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ सीडीएस कौशल ने किया। 

मौके पर हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष एवं सरस्वती शोध संस्थान के उपाध्यक्ष भारत भूषण भारती, केडीबी के सीईओ गौरव अंतिल, हिरमी के ज्वाइंट डायरेक्टर अरविंद कौशिक, केडीबी सदस्य, विद्या भारती संस्थान से रामेन्द्र सिंह, प्रो. एनएन डोगरा, प्रो. शुचिस्मिता शर्मा, कुटा के प्रधान डॉ संजीव शर्मा, सचिव महाबीर रंगा मौजूद रहे।             
       
शाम को ब्रह्म सरोवर पहुंची सरस्वती यात्रा                       

28 जनवरी को आदी बद्री से रवाना हुई सरस्वती यात्रा का ब्रह्मसरोवर पर स्वागत किया गया। सोमवार को यह यात्रा अंबाला से ठोल, इस्माईलाबाद, झांसा, शाहाबाद, पीपली, ब्रह्मसरोवर और उसके बाद गीता जन्मस्थली ज्योतिसर पहुंची, जबकि यात्रा रात्रि ठहराव पिहोवा में हुआ। इस यात्रा के साथ हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सदस्य एमआर राव, उनकी पत्नी पदमावती, प्रो. ओपी गर्ग, पंडित लख्मी चंद के परिवार के सदस्य दीपक कौशिक, बीडी मेहता, जीएस गौतम, आदित्य, कैलाश और देवेंद्र मुख्य रुप से शामिल हैं।

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