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‘ऋषि कन्नड़ और न्यूटन के गति के नियम समान’
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वेबिनार को संबोधित करते जेसी बोस विश्वविद्यालय से डॉ. अनुराग गौर। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विस फोरम ने विज्ञान कार्निवल 2022 के चौथे कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचीन भारतीय विज्ञान पर जेसी बोस विश्वविद्यालय से डॉ अनुराग के विशेष व्याख्यान से हुई। उन्होंने बताया कि ऋषि कन्नड़ की ओर से दिए गए गति के नियम वही हैं, जो न्यूटन ने दिए थे।
उन्होंने प्रतिभागियों को प्राचीन संतों (आर्यभट, नागार्जुन, भास्कराचार्य, पाराशर, लीलावती आदि) और आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तावेजीकरण की कमी के कारण इनके योगदानों पर ध्यान नहीं दिया गया है। भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति भी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। प्रतिभागियों को ऋषि सुश्रुत के युग के शल्य चिकित्सा उपकरण के चित्र भी दिखाए गए। जेसी बोस, होमी जहांगीर भाभा, पीसीरे और कई वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया गया।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि भारत प्राचीन काल में शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी रहा है और उभरते वैज्ञानिकों के साथ विश्व गुरु का दर्जा फिर से हासिल होगा। केयू की डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने भी कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराया। व्याख्यान के बाद दो अलग-अलग श्रेणियों में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन हुआ। मंच की समन्वयक प्रो. नीरा राघव ने बताया कि क्लीन-ग्रीन एनर्जी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, दवा, सतत पर्यावरण, एनर्जी हार्वेस्टिंग स्टोरेज, वीमेन इन स्टेम, भारत का विज्ञान में योगदान, कृत्रिम बुद्धि जैसे विभिन्न विषयों पर 27 प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दीं।
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कुरुक्षेत्र। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विस फोरम ने विज्ञान कार्निवल 2022 के चौथे कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्राचीन भारतीय विज्ञान पर जेसी बोस विश्वविद्यालय से डॉ अनुराग के विशेष व्याख्यान से हुई। उन्होंने बताया कि ऋषि कन्नड़ की ओर से दिए गए गति के नियम वही हैं, जो न्यूटन ने दिए थे।
उन्होंने प्रतिभागियों को प्राचीन संतों (आर्यभट, नागार्जुन, भास्कराचार्य, पाराशर, लीलावती आदि) और आधुनिक भारतीय वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान के बारे में बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दस्तावेजीकरण की कमी के कारण इनके योगदानों पर ध्यान नहीं दिया गया है। भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति भी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। प्रतिभागियों को ऋषि सुश्रुत के युग के शल्य चिकित्सा उपकरण के चित्र भी दिखाए गए। जेसी बोस, होमी जहांगीर भाभा, पीसीरे और कई वैज्ञानिकों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख किया गया।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि भारत प्राचीन काल में शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी रहा है और उभरते वैज्ञानिकों के साथ विश्व गुरु का दर्जा फिर से हासिल होगा। केयू की डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी ने भी कार्यक्रम के महत्व से अवगत कराया। व्याख्यान के बाद दो अलग-अलग श्रेणियों में पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन हुआ। मंच की समन्वयक प्रो. नीरा राघव ने बताया कि क्लीन-ग्रीन एनर्जी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, दवा, सतत पर्यावरण, एनर्जी हार्वेस्टिंग स्टोरेज, वीमेन इन स्टेम, भारत का विज्ञान में योगदान, कृत्रिम बुद्धि जैसे विभिन्न विषयों पर 27 प्रतिभागियों ने प्रस्तुति दीं।
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