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Kurukshetra News: सुविधाओं के लिए तरस रहा अभिमन्युपुर का ग्रामीण स्टेडियम
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कुरुक्षेत्र। स्टेडियम में लगाए गए बास्केटबॉल कोर्ट। संवाद
कुरुक्षेत्र। जिले के अभिमन्युपुर (अमीन) गांव का सुनील कुमार ग्रामीण स्टेडियम की हालत खस्ता है। स्टेडियम में न तो अच्छा ट्रैक है, न लाइट की उचित व्यवस्था और न ही नियमित रखरखाव किया जाता है। खिलाड़ियों के अनुसार बरसात में ट्रैक पर पानी भर जाता है और घास बढ़ जाती है जिससे अभ्यास रुक जाता है। स्टेडियम में गर्मियों में सांप और कीट-पतंगों का खतरा रहता है, वहीं सर्दियों में अंधेरा जल्दी होने से खासकर महिला खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित होता है। इससे अलसुबह भी खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हो रहा है। सुबह-शाम यहां करीब 200 खिलाड़ी अभ्यास करते हैं पर सुविधाएं न के बराबर हैं।
स्टेडियम में पीने के पानी की व्यवस्था भी सरकारी नहीं है बल्कि गांव की एक समाजसेवी संस्था के सहयोग से चल रही है। मल्टीपर्पज हॉल में पंखे तक नहीं लगे जिससे गर्मियों में खिलाड़ियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। मुख्य द्वार पर ब्लॉक और मिट्टी भराव न होने से बरसात के मौसम में कोच व खिलाड़ियों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। हालांकि बास्केटबॉल कोर्ट कुछ माह पहले ही नए पोल लगाए गए थे। खिलाड़ियों का कहना है कि बिजली और स्टेडियम के रखरखाव का कार्य होना चाहिए।
यह स्टेडियम कभी अपनी उपलब्धियों के लिए जाना जाता था। इस गांव को वॉलीबाल गांव कहा जाता है। जब अर्जुन अवार्डी डॉ. दलेल सिंह ने 1986 के सियोल एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया तब इस पहचान की शुरुआत हुई। उनके बाद गांव ने लगभग 15 अंतरराष्ट्रीय और 150 राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए, साथ ही पांच एनआईएस प्रमाणित कोच भी तैयार किए।
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2008 में हुआ था अपग्रेड, अब दोबारा सुधार की उम्मीद
स्टेडियम का निर्माण वर्ष 2003 में पंचायत की ओर से जमीन देने के बाद हुआ था और 2008 में इसे राजीव गांधी खेल स्टेडियम योजना के तहत अपग्रेड किया गया। वर्तमान में यहां चार खेल नर्सरियां चल रही हैं जिनमें कोच शिव कुमार (लड़के, वॉलीबाल), कोच रजनी देवी (लड़कियां, वॉलीबाल), कोच मंदीप सिंह (कुश्ती), कोच नीरज (साइक्लिंग) और कोच राजेंद्र (बास्केटबॉल) खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि स्टेडियम के नवीनीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी के पास ग्रांट पहुंच चुकी है। जल्द ही सुधारात्मक कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
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स्टेडियम में पीने के पानी की व्यवस्था भी सरकारी नहीं है बल्कि गांव की एक समाजसेवी संस्था के सहयोग से चल रही है। मल्टीपर्पज हॉल में पंखे तक नहीं लगे जिससे गर्मियों में खिलाड़ियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। मुख्य द्वार पर ब्लॉक और मिट्टी भराव न होने से बरसात के मौसम में कोच व खिलाड़ियों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। हालांकि बास्केटबॉल कोर्ट कुछ माह पहले ही नए पोल लगाए गए थे। खिलाड़ियों का कहना है कि बिजली और स्टेडियम के रखरखाव का कार्य होना चाहिए।
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यह स्टेडियम कभी अपनी उपलब्धियों के लिए जाना जाता था। इस गांव को वॉलीबाल गांव कहा जाता है। जब अर्जुन अवार्डी डॉ. दलेल सिंह ने 1986 के सियोल एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया तब इस पहचान की शुरुआत हुई। उनके बाद गांव ने लगभग 15 अंतरराष्ट्रीय और 150 राष्ट्रीय खिलाड़ी दिए, साथ ही पांच एनआईएस प्रमाणित कोच भी तैयार किए।
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2008 में हुआ था अपग्रेड, अब दोबारा सुधार की उम्मीद
स्टेडियम का निर्माण वर्ष 2003 में पंचायत की ओर से जमीन देने के बाद हुआ था और 2008 में इसे राजीव गांधी खेल स्टेडियम योजना के तहत अपग्रेड किया गया। वर्तमान में यहां चार खेल नर्सरियां चल रही हैं जिनमें कोच शिव कुमार (लड़के, वॉलीबाल), कोच रजनी देवी (लड़कियां, वॉलीबाल), कोच मंदीप सिंह (कुश्ती), कोच नीरज (साइक्लिंग) और कोच राजेंद्र (बास्केटबॉल) खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
जिला खेल अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि स्टेडियम के नवीनीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी के पास ग्रांट पहुंच चुकी है। जल्द ही सुधारात्मक कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

कुरुक्षेत्र। स्टेडियम में लगाए गए बास्केटबॉल कोर्ट। संवाद