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माइनस आठ डिग्री तापमान में 30 घंटे खड़े रहने के बाद पहुंचे रोमानिया
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ट्रनोपिल से लौटा छात्र हर्ष शर्मा। (बाएं से पहला)। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र/पिहोवा। ट्रनोपिल (यूक्रेन) से निकले तो पौलेंड का बॉर्डर पार आसान लग रहा था। ट्रनोपिल से पोलैंड का बॉर्डर चार-पांच घंटे की दूरी पर ही था। किराए पर बस लेकर पोलैंड बॉडर पहुंचे तो पता चला कि बॉर्डर पार करने के लिए 35 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है। इस पर उन्होंने रोमानिया बॉर्डर पर जाने का निर्णय लिया, मगर उन्हें नहीं पता था यहां यूक्रेनी सेना, माइनस आठ डिग्री तापमान और पैदल 10 किलोमीटर बॉर्डर पार करना पड़ेगा। यह आपबीती ट्रनोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी से पिहोवा लौटे छात्र विनायक और हर्ष शर्मा ने बताई।
विनायक ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर जाते समय यूक्रेनी सेना ने उनको बॉर्डर से 10 किलोमीटर पहले ही उतरने पर मजबूर कर दिया। यहां वे लोग अपने सामान के साथ पैदल ही बॉर्डर तक पहुंचे, मगर यहां के हालात भी कुछ अच्छे नहीं थे। यूक्रेनी सेना अपने नागरिकों को पूरी सुरक्षा के साथ बॉर्डर पार करा रही थी, मगर भारतीयों के बॉर्डर पार का समय आता तो वे पांच-छह घंटे के लिए बॉर्डर बंद कर देते थे। उसके बाद उनको बॉर्डर से दूर भेज दिया जाता था। उन पर दबाव बनाने के लिए यूक्रेनी सैनिक हवाई फायर भी करते थे। वहीं बॉर्डर पार करने की जिद करने पर मारपीट तक की जाती थी।
बॉर्डर पार करने के लिए उनको 30 घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान हो रही बर्फबारी ने उनकी रूह तक को कंपकंपा दिया था। माइनस आठ डिग्री में वे रात को खुले आसमान के नीचे थोड़ी देर आराम करने को मजबूर थे। उसके बाद फिर सुबह लाइन में लगते थे और बॉर्डर पार न होने पर उनको दोबारा से लाइन में लगना पड़ता था। यहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
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36 घंटे डर, कंपकंपाती ठंड और भूखे प्यासे रहने के बाद उन्होंने कड़ा संघर्ष करते हुए रोमानिया बॉर्डर पार किया। उसके बाद उन्हें एक होटल में अन्य भारतीय नागरिक के साथ ठहराया गया और भारतीय दूतावास ने कागजी कार्रवाई करके भारत भेज दिया। वापसी के बाद उनको अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है, युद्ध की वजह से उनकी पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। हालांकि यूनिवर्सिटी ने उनको हालात सामान्य होने पर ऑनलाइन कक्षा लगाकर पढ़ाई पूरी करने का आश्वासन दिया है।
पाकिस्तानी भी भारतीयों के साथ निकले
हर्ष ने बताया कि दूसरी बस में उनके साथियों के साथ कुछ पाकिस्तानी छात्र भी थे। बॉर्डर पहुंचने तक उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई, मगर बॉर्डर पर यूक्रेनी सेना का व्यवहार अमानवीय था। उनके साथ किसी तरह पाकिस्तानी छात्र भी रोमानिया बॉर्डर पार कर गए थे।
रोमानिया में सेवा कर रही स्वाति
गांव सारसा के दलबीर श्योकंद ने बताया कि उनकी बेटी स्वाति पिछले चार दिन से रोमनिया बॉर्डर पर ही लोगों की सेवा में लगी हुई है। उनका बैच चार दिन पहले रोमानिया पहुंच चुका था। उनकी फोन पर रोजाना स्वाति से बात हो रही है। सुबह तक वे गाजियाबाद एयरबेस पर पहुंच जाएंगे।
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कुरुक्षेत्र/पिहोवा। ट्रनोपिल (यूक्रेन) से निकले तो पौलेंड का बॉर्डर पार आसान लग रहा था। ट्रनोपिल से पोलैंड का बॉर्डर चार-पांच घंटे की दूरी पर ही था। किराए पर बस लेकर पोलैंड बॉडर पहुंचे तो पता चला कि बॉर्डर पार करने के लिए 35 किलोमीटर लंबी लाइन लगी है। इस पर उन्होंने रोमानिया बॉर्डर पर जाने का निर्णय लिया, मगर उन्हें नहीं पता था यहां यूक्रेनी सेना, माइनस आठ डिग्री तापमान और पैदल 10 किलोमीटर बॉर्डर पार करना पड़ेगा। यह आपबीती ट्रनोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी से पिहोवा लौटे छात्र विनायक और हर्ष शर्मा ने बताई।
विनायक ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर जाते समय यूक्रेनी सेना ने उनको बॉर्डर से 10 किलोमीटर पहले ही उतरने पर मजबूर कर दिया। यहां वे लोग अपने सामान के साथ पैदल ही बॉर्डर तक पहुंचे, मगर यहां के हालात भी कुछ अच्छे नहीं थे। यूक्रेनी सेना अपने नागरिकों को पूरी सुरक्षा के साथ बॉर्डर पार करा रही थी, मगर भारतीयों के बॉर्डर पार का समय आता तो वे पांच-छह घंटे के लिए बॉर्डर बंद कर देते थे। उसके बाद उनको बॉर्डर से दूर भेज दिया जाता था। उन पर दबाव बनाने के लिए यूक्रेनी सैनिक हवाई फायर भी करते थे। वहीं बॉर्डर पार करने की जिद करने पर मारपीट तक की जाती थी।
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बॉर्डर पार करने के लिए उनको 30 घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान हो रही बर्फबारी ने उनकी रूह तक को कंपकंपा दिया था। माइनस आठ डिग्री में वे रात को खुले आसमान के नीचे थोड़ी देर आराम करने को मजबूर थे। उसके बाद फिर सुबह लाइन में लगते थे और बॉर्डर पार न होने पर उनको दोबारा से लाइन में लगना पड़ता था। यहां खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
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36 घंटे डर, कंपकंपाती ठंड और भूखे प्यासे रहने के बाद उन्होंने कड़ा संघर्ष करते हुए रोमानिया बॉर्डर पार किया। उसके बाद उन्हें एक होटल में अन्य भारतीय नागरिक के साथ ठहराया गया और भारतीय दूतावास ने कागजी कार्रवाई करके भारत भेज दिया। वापसी के बाद उनको अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है, युद्ध की वजह से उनकी पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है। हालांकि यूनिवर्सिटी ने उनको हालात सामान्य होने पर ऑनलाइन कक्षा लगाकर पढ़ाई पूरी करने का आश्वासन दिया है।
पाकिस्तानी भी भारतीयों के साथ निकले
हर्ष ने बताया कि दूसरी बस में उनके साथियों के साथ कुछ पाकिस्तानी छात्र भी थे। बॉर्डर पहुंचने तक उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई, मगर बॉर्डर पर यूक्रेनी सेना का व्यवहार अमानवीय था। उनके साथ किसी तरह पाकिस्तानी छात्र भी रोमानिया बॉर्डर पार कर गए थे।
रोमानिया में सेवा कर रही स्वाति
गांव सारसा के दलबीर श्योकंद ने बताया कि उनकी बेटी स्वाति पिछले चार दिन से रोमनिया बॉर्डर पर ही लोगों की सेवा में लगी हुई है। उनका बैच चार दिन पहले रोमानिया पहुंच चुका था। उनकी फोन पर रोजाना स्वाति से बात हो रही है। सुबह तक वे गाजियाबाद एयरबेस पर पहुंच जाएंगे।