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सरस्वती तट पर बह रहा बेजुबानों का लहू
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Mon, 30 Jan 2017 11:29 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सरस्वती के जिस पावन तट पर गौरवशाली प्राचीन सभ्यता का विकास हुआ और वेद लिखे गए, उसके तट पर बेजुबानाों का लहू बह रहा है। यह हालात उस धर्मभूमि कुरुक्षेत्र के हैं, जहां प्रदेश सरकार 28 जनवरी से 1 फरवरी तक राष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार के साथ सरस्वती यात्राएं निकाल रही हैं।
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यहां बता दें कि 2018 में गीता जयंती की तरह सरस्वती महोत्सव को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित करने की घोषणा हो चुकी है। अमर उजाला ने कुरुक्षेत्र शहर में मोहन नगर-सिलसिला रोड से गुजर रही सरस्वती नदी का रीयलिटी चेक किया। सिलसिला रोड पर सरस्वती नदी के पुल के नीचे और पानी में गंदगी के अंबार लगे थे। इससे भी शर्मसार और चिंताजनक स्थिति यह है कि सरस्वती के किनारे पत्थर रखकर काटे गए बकरे और मुर्गों का खून पानी में बह रहा था। इतना ही नहीं बचे हुए हिस्सों को भी इसी पानी में डाला जा रहा है, जबकि इसी पवित्र नदी में मोक्ष के लिए अस्थियों का विसर्जन किया जाता है।
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कसाईखाना चलाने वाला जानता है नदी का महत्व
मोबाइल के कैमरे में कैद करते समय जब सरस्वती किनारे कसाईखाना चलाने वाले दुकानदार से बात की गई तो उसने माना कि पशु-पक्षियों को काटते समय खून सरस्वती नदी में जाता है। उसने माना कि वह इस नदी की पवित्रता और उसके महत्व के बारे में भी जानता है पर यह उसका पेशा है, वह क्या करे। हालांकि उसने एक सप्ताह के भीतर दुकान हटाने की बात कही है।
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शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
सिरसिला रोड सरस्वती नदी के पुल के साथ शिवपुरी र्स्वगाश्रम सटा है। वहां काम करने वाले रामेश्वर का कहना है कि इस बारे में कई बार शिकायत कर चुके हैं। सरस्वती पुल से 10 कदम की दूरी पर एक घर में रहने वाली महिला महेंद्र कौर ने कहा कि इसकी शिकायत विधायक सुभाष सुधा और भाजपा के नेता जयभगवान शर्मा डीडी को भी की थी। आश्वासन तो मिला, पर पवित्र नदी के साथ मांस काटने का सिलसिला बंद नहीं हुआ।
तस्वीरें देख आहत हुए बोर्ड सदस्य
सरस्वती नदी के उद्गम स्थल आदी बद्री से 28 जनवरी को सरस्वती यात्रा का नेतृत्व कर रहे हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के मेंबर एमआर राव को जब इन हालात के बारे में बताया गया और चित्र दिखाए तो उन्होंने भी हैरानी जताई। राव तस्वीरों में तट पर टपकते खून को देख वे आहत हुए। उन्होंने आश्वासन दिया कि बोर्ड इसे तत्काल प्रभाव से हटाने की व्यवस्था करेगा। उन्होंने अमर उजाला का आभार व्यक्त किया कि इन हालात से अवगत कराया।
पवित्रता की बहाली पर है बोर्ड का फोकस : सीईओ
हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर अरविंद कौशल को जब इन हालात के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में स्थानीय प्रशासन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड का पहला उद्देश्य ही यह है कि सबसे पहले नदी क्षेत्र की पवित्रता को बहाल करने पर ही फोकस किया जाए।
वायु पुराण में सरस्वती में अस्थि विसर्जन का उल्लेख
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के वरिष्ठ उपप्रधान, सरस्वती विद्यापीठ वेद पाठशाला के संचालक पंडित पवन शर्मा शास्त्री ने बताया कि वायु पुराण में इस बात का उल्लेख है कि कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि क्षेत्र में अंतिम सांस लेने वाले व्यक्ति की अस्थियों का विसर्जन हरिद्वार गंगा की बजाय सरस्वती नदी में ही होता है। वर्तमान में इसके जो हालात हैं, उसकी वजह से अब कई लोग हरिद्वार गंगा में अस्थि विसर्जन करने लगे हैं।
दो साल से ज्यादा हो चुके हैं सरस्वती बोर्ड बने
प्रदेश की भाजपा सरकार को हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की स्थापना किए करीब दो वर्ष से ज्यादा समय हो चुका है। वहीं बोर्ड के मेंबर एमआर राव की मानें तो तीन कारणों से सरस्वती उपेेक्षित रही। इसकी पहली वजह है कि पूर्व की सरकारें इस मुद्दे को नदी का ना मानकर धार्मिक मुद्दा मानती रही। दूसरा कारण पश्चिमी वैज्ञानिक और इतिहासकार रहे। उन्होंने तथ्यों को घुमाकर तोड़ मरोड़ कर पेश किया, ताकि देश को इस नदी का लाभ ना मिल सके। इन दो कारणों की वजह से सरस्वती नदी की उपेक्षा हुई और लोगों ने अतिक्रमण कर लिया, अब हालात को ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है।
अभी संज्ञान में आया है मामला,ठोस कार्रवाई होगी : डीसी
डीसी सुमेधा कटारिया के व्हाट्सऐप पर सरस्वती नदी पर टपकते खून और मौजूदा हालात की तस्वीर और वीडियो भेजी गई हैं। हालात देखने के बाद डीसी ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में आया है। किसी भी सूरत में सरस्वती नदी के तट पर कसाईखाना नहीं चलने दिया जाएगा। मंगलवार को अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने के साथ उचित कार्रवाई कराई जाएगी,ताकि धर्मनगरी से गुजर रही सरस्वती नदी की पवित्रता को बरकरार रखा जा सके। उन्होंने कहा कि देश दुनिया के करोड़ों लोगों में सरस्वती नदी के प्रति गहरी श्रद्धा और आस्था है और उसके साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।