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रियो ओलंपिक में जाने वाली भारतीय महिला हाकी टीम की रीतू रानी को किया टीम से बाहर
अमर उजाला/ब्यूरो/कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:27 AM IST
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हॉकी
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भारतीय महिला हॉकी टीम को अपनी कप्तानी में रियो ओलंपिक का टिकट दिलवाने वाली रीतू रानी को टीम से बाहर का ही रास्ता दिखा दिया गया है। बताया जाता है कि बुधवार देर सायं ही टीम के कोच ने रीतू को घर जाने के लिए बोल दिया था। इस संदर्भ में रीतू रानी से बात करने का कईं बार प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। जबकि रीतू के पिता जयपाल ने इस बात की पुष्टि की और कहा कि टीम के बाहर होने से रीतू का ओलंपिक खेलने का सपना चूर-चूर हो गया है। उन्होंने बताया कि मात्र 12 वर्ष की उम्र में ही उसने हॉकी स्टिक को पकड़ा था और उसका सपना भारतीय महिला टीम को ओलंपिक में पहुंचाने का था। जयपाल ने बताया कि रीतू ने कड़ी मेहनत और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम का नेत़ृत्व किया और रियो ओलंपिक के लिए टीम को क्वालीफाई करवाया। रीतू के टीम से पत्ता कटने पर क्षेत्र के हाकी प्रेमियों में भारी रोष है और उन्होंने हाकी इंडिया से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
12 जुलाई को होगी टीम घोषित
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरेंद्र बत्तरा ने फोन पर बताया कि उन्हें रीतू के टीम से बाहर होने का नहीं पता है। उन्होंने बताया कि अधिकारिक तौर पर टीम की घोषणा 12 जुलाई को दिल्ली में होगी। रीतू को कैंप से बाहर करने की बात पर बत्तरा ने कहा कि सभी खिलाड़ियों की कैंप की छुट्टी की गई है और पूरी टीम 11 जुलाई को दोबारा कैंप में पहुंचेगी।
डेढ़ माह पहले ही हो गया था अंदेशा
रीतू को टीम से बाहर करने के पीछे कोच व कप्तान के बीच खींचातानी माना जा रहा है। इस बात का अंदेशा लगभग डेढ़ माह पहले ही हो गया था जब 23 मई को चार देशों के टूर्नामेंट में डार्विन जाने वाली भारतीय महिला हाकी टीम से रीतू रानी की जगह सुशीला चानू को टीम का कप्तान बनाया गया था। हालांकि उस समय कहा गया था कि रीतू रानी को विश्राम दिया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह थी कि रीतू 2011 से लगातार भारतीय टीम की कप्तान चली आ रही थी। रियो ओलंपिक की तैयारियों को लेकर इस टूर्नामेंट को बड़ा अहम समझा जा रहा था क्योंकि इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों में अस्ट्रेलिया की रेंकिंग तीसरे, न्यूजीलैंड की चौथे व जापान की दसवें नंबर पर थी जबकि भारत का स्थान 13वें नंबर पर था। इतने अहम मुकाबले से रीतू रानी को बाहर करना ही शक पैदा करता था। हालांकि इससे मात्र 12 दिन पूर्व 11 मई को हॉकी इंडिया ने रीतू रानी का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया था, जिसमें कहा गया था कि रियो ओलंपिक में स्थान दिलवाने में रीतू के नेतृत्व की अहम भूमिका थी। ऐसे मेें इतने अहम मौके पर टीम की संभावित कप्तान को ही बाहर कर देने का फैसला समझ से परे था।
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उपलब्धियों से भरा रहा है रीतू का कैरियर
रीतू का पूरा कैरियर उपलब्धियों से भरा रहा है। द्रोणाचार्य अवार्डी बलदेव कोच के मार्गदर्शन में उसने 12 वर्ष की आयु में शाहाबाद हाकी नर्सरी में खेलना शुरू किया था और मात्र 14 वर्ष की आयु में ही 2006 में मैड्रिड में संपन्न हुए वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थी। पूरी टीम में सबसे छोटी थी। 2009 में रूस में हुए चैंपियन चैलेंज में भारतीय टीम ने जीत हासिल की थी, जिसमें रीतू रानी 8 गोल करके टूर्नामेंट की टोप स्कोरर रही थी। इन्ही उपलब्धियों को बदौलत उसे 2011 में भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया था और उसकी अगुवाई में 2013 के एशिया कप और 2014 की एशियन खेलों में टीम तीसरे स्थान पर रही थी। 2014-15 की वुमैन एफआईएच हाकी वैल्ड लीग में रानी ने भारत में हुए दूसरे राउंड में नेतृत्व करते हुए टीम को प्रथम स्थान दिलवाया था और उसने वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में भी टीम को लीड किया था। इसी बदौलत भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान में हुए क्लासिफिकेश्न मैच में पांचवां स्थान पाया था जिसके बदौलत भारत ने रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। रीतू में न केवल रक्षा पद्धति में खेलने का महारथ हासिल बल्कि एक बहुत अच्छी फारवर्ड भी रही। कोच बलदेव सिंह ने उसे कईं बार फारवर्ड खेलने का मौका भी दिया और टीम इंडिया से भी ऐसी सिफारिश की थी।
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12 जुलाई को होगी टीम घोषित
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरेंद्र बत्तरा ने फोन पर बताया कि उन्हें रीतू के टीम से बाहर होने का नहीं पता है। उन्होंने बताया कि अधिकारिक तौर पर टीम की घोषणा 12 जुलाई को दिल्ली में होगी। रीतू को कैंप से बाहर करने की बात पर बत्तरा ने कहा कि सभी खिलाड़ियों की कैंप की छुट्टी की गई है और पूरी टीम 11 जुलाई को दोबारा कैंप में पहुंचेगी।
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डेढ़ माह पहले ही हो गया था अंदेशा
रीतू को टीम से बाहर करने के पीछे कोच व कप्तान के बीच खींचातानी माना जा रहा है। इस बात का अंदेशा लगभग डेढ़ माह पहले ही हो गया था जब 23 मई को चार देशों के टूर्नामेंट में डार्विन जाने वाली भारतीय महिला हाकी टीम से रीतू रानी की जगह सुशीला चानू को टीम का कप्तान बनाया गया था। हालांकि उस समय कहा गया था कि रीतू रानी को विश्राम दिया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह थी कि रीतू 2011 से लगातार भारतीय टीम की कप्तान चली आ रही थी। रियो ओलंपिक की तैयारियों को लेकर इस टूर्नामेंट को बड़ा अहम समझा जा रहा था क्योंकि इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली टीमों में अस्ट्रेलिया की रेंकिंग तीसरे, न्यूजीलैंड की चौथे व जापान की दसवें नंबर पर थी जबकि भारत का स्थान 13वें नंबर पर था। इतने अहम मुकाबले से रीतू रानी को बाहर करना ही शक पैदा करता था। हालांकि इससे मात्र 12 दिन पूर्व 11 मई को हॉकी इंडिया ने रीतू रानी का नाम अर्जुन अवार्ड के लिए प्रस्तावित किया था, जिसमें कहा गया था कि रियो ओलंपिक में स्थान दिलवाने में रीतू के नेतृत्व की अहम भूमिका थी। ऐसे मेें इतने अहम मौके पर टीम की संभावित कप्तान को ही बाहर कर देने का फैसला समझ से परे था।
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उपलब्धियों से भरा रहा है रीतू का कैरियर
रीतू का पूरा कैरियर उपलब्धियों से भरा रहा है। द्रोणाचार्य अवार्डी बलदेव कोच के मार्गदर्शन में उसने 12 वर्ष की आयु में शाहाबाद हाकी नर्सरी में खेलना शुरू किया था और मात्र 14 वर्ष की आयु में ही 2006 में मैड्रिड में संपन्न हुए वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का हिस्सा थी। पूरी टीम में सबसे छोटी थी। 2009 में रूस में हुए चैंपियन चैलेंज में भारतीय टीम ने जीत हासिल की थी, जिसमें रीतू रानी 8 गोल करके टूर्नामेंट की टोप स्कोरर रही थी। इन्ही उपलब्धियों को बदौलत उसे 2011 में भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया था और उसकी अगुवाई में 2013 के एशिया कप और 2014 की एशियन खेलों में टीम तीसरे स्थान पर रही थी। 2014-15 की वुमैन एफआईएच हाकी वैल्ड लीग में रानी ने भारत में हुए दूसरे राउंड में नेतृत्व करते हुए टीम को प्रथम स्थान दिलवाया था और उसने वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में भी टीम को लीड किया था। इसी बदौलत भारतीय महिला हॉकी टीम ने जापान में हुए क्लासिफिकेश्न मैच में पांचवां स्थान पाया था जिसके बदौलत भारत ने रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। रीतू में न केवल रक्षा पद्धति में खेलने का महारथ हासिल बल्कि एक बहुत अच्छी फारवर्ड भी रही। कोच बलदेव सिंह ने उसे कईं बार फारवर्ड खेलने का मौका भी दिया और टीम इंडिया से भी ऐसी सिफारिश की थी।