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राइस मिलर्स ने खरीदा धान, हड़ताल पर गए

Sun, 27 Sep 2015 11:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र
ब्यूरो/अमर उजाला कुरुक्षेत्र Updated Sun, 27 Sep 2015 11:36 PM IST
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केंद्र और प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के कारण किसानों, आढ़तियों को इस वर्ष धान बेचने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि राइस मिलर्स ने धान खरीदने से स्पष्ट इनकार करते हुए, हड़ताल की घोषणा कर दी है।
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प्रदेश सरकार ने 25 सितंबर से सभी खरीद एजेंसियों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान खरीद के आदेश दे दिए हैं, लेकिन तीसरे तीन दिन भी खरीद एजेंसियों ने धान नहीं खरीदा। हालांकि, थोड़ा बहुत धान निजी खरीदारों ने अवश्य खरीदा।
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रविवार को राइस मिलरों ने सरकार की गलत नीतियों के कारण अनाजमंडी में बैठक कर पूर्ण रूप से हड़ताल कर दी है। इसके साथ 1509 और पीआर किस्म की धान की खरीद बिल्कुल बंद कर दी। बैठक के बाद राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान पुनीत मित्तल ने पत्रकारों को बताया कि धान खरीद के तीन माह पूर्व ही राइस मिल संचालकों ने सरकार को उनकी समस्यों के बारे में अवगत करवा दिया था।
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उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राइस मिलरों पर सरकार ने होल्डिंग चार्ज लगा दिए थे। डैमेज की 4 प्रतिशत की मात्रा बता कर राइस मिलरों से एक प्रतिशत डैमेज की रिकवरी कर ली थी। वर्षों पुराने कानून को तोड़ते हुए सरकार ने उनसे सी और एफ फार्म के बदले टैक्स काट लिया था।

उन्होंने कहा कि सरकार राइस मिलरों के साथ गलत नीति अपना रही है। उन्होंने बताया कि सरकार एक क्विंटल धान से 67 किलो चावल राइस मिलरों से लेती है, जबकि 1 क्विंटल धान से 62 से 63 किलो चावल ही निकलते हैं। इसीलिए कस्टम मिलिंग का कार्य राइस मिलरों के लिए घाटे का सौदा होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार की गलत के चलते ही उन्होंने धान खरीद से हड़ताल की है। यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती। इस मौके पर प्रहलाद भगत शर्मा, नरंजन नैन, दीपक सिंधवानी, पवन सिंगला, जगदीश पपनेजा मौजूद रहे।

1950 क्विंटल धान की हुई खरीद 
गीता नगरी की नई अनाज मंडी में रविवार को कुल 1509 किस्म धान की 1950 क्विंटल धान खरीद सरकारी एजैंसियों द्वारा खरीदा गया।

हालांकि रविवार होने के कारण अनाज मंडी में कम ही किसान अपने धान को मंडी में बिक्री के लिए लाए थे। मार्केट कमेटी के सचिव गौरव आर्य ने बताया कि विभाग धान खरीद को लेकर सजग है और मंडी में धान की खरीद को लेकर विभाग द्वारा कर्मियों को नियुक्त कर दिया गया है।

कमेटी अपने स्तर पर किसानों को सुविधाएं देने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने बताया कि अभी मंडी में 1509 धान की आवक हो रही है और रविवार को कुल 1950 क्विंटल धान की खरीद सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई।

धान की खरीद न होने पर किसानों ने रोका रास्ता 

बाबैन। धान की खरीद न होने से गुस्साए किसानों ने रविवार को हाईवे नंबर 7 बाबैन सुनारियों चौक पर जाम लगाकर लाडवा विधायक व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

किसान हाकम सिंह मंगौली, जगतार सिंह, रोशन सिंह भुखड़ी, मोहन कौलापुर, सुरेश, रोशलाल, बिन्द्र धनानी, रिकू मोरथला, राजबीर सिंह, सुनील ईशरहेड़ी, बलजीत रामपुरा, सतीश धनानी, राकेश धनानी, महिन्द्र सिंह, मनीष रामपुरा व अन्य किसानों का कहना था कि सरकार के नियमों के द्वारा 17 प्रतिशत नमी वाला धान सरकार खरीदेगी लेकिन 17 प्रतिशत नमी से कम धान को भी रविवार को नहीं खरीदा गया। किसानों का कहना है कि उनको धान बेचने के लिए कई दिन तक मंडी में रहना पड़ रहा है फिर भी उनकी सुखी धान को खरीदने में सरकार आनाकानी कर रही है।

किसानों का कहना था कि 25 सितंबर को लाडवा हलका विधायक पवन सैनी ने बाबैन अनाज मंडी में आकर धान की खरीद को शुरू करवाया था लेकिन आज सरकारी अधिकारियों के द्वारा सुखी धान को भी नहीं खरीदा गया।


किसानों का कहना है कि कम से कम सरकार सुखी धान को खरीदे। किसानों का आरोप है कि विधायक द्वारा खरीद शुरू करवाए जाने के बावजूद अधिकारी द्वारा 17 प्रतिशत नमी वाली धान की ढेरी को भी नहीं खरीदा।


इस दौरान किसानों ने लगभग डेढ़ घंटा जाम लगाए रखा। मौके पर पहुंचे बाबैन थाना प्रभारी यशदीप सिंह, लाडवा थाना प्रभारी सुरेंद्र सिंह, बीडीपीओ कवरभान नरवाल व मार्केट कमेटी सचिव छोटन राम, तहसीलदार ईश्वर सिंह व किसानों ने हैफेड के कर्मचारी अजय कुमार से बातचीत करके किसानों को आश्वासन दिलवाया कि अभी से उनकी धान की खरीद शुरू की जाएगी। इसके बाद किसानों ने जाम खोल दिया और किसानों ने सरकार व प्रशासन को चेतावनी दी अगर किसानों की धान को नहीं खरीदा गया तो दोबारा से रोड जाम करेंगे।

क्या कहते है हैफेड अधिकारी
हैफड अधिकारी अजय कुमार का कहना था कि रविवार को हैफेड की खरीद नहीं थी बल्कि दूसरी सरकारी एजेंसी को धान खरीदना था। उनकी खरीद लाडवा में थी फिर भी उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि आज भी हैफेड ही सरकारी मापदंडों के अनुसार खरीद करेगा।

सरकारी एजेंसियों ने नहीं खरीदा धान 

लाडवा। लाडवा अनाजमंडी में रविवार को सरकारी एजेंसियों ने धान की खरीद नहीं की। धान की सरकारी खरीद न होने से मंडी में दर्जनों सुपरफाइन धान की किस्म की ढेरियां बिना बिक्री के पड़ी रहीं।

पिछले दो दिनों में सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदे गए 5200 क्विंटल धान की बोरियां भी आढ़तियों की दुकानों पर पड़ी रही, लेकिन किसी भी एजेंसी ने खरीदा गया माल उठवाने का प्रबंध नहीं किया। उधर धान की 1509 किस्म के भाव में करीब सौ रुपये का उछाल आने से किसानों ने राहत की सांस ली है।

धान की 1509 किस्म रविवार को बोली पर 1400 से 1550 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी। आढ़तियों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान की बोरियों को उठवाने का प्रबंध किया जाए।

आढती मात्र एक कमीश्र एजेंट है:  अशोक
27केयूआरपी -16 लाडवा मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए मंडियों की संयुक्त कमेटी के प्रधान अशोक गुप्ता


आढ़ती मात्र एक कमीशन एजेंट: अशोक


लाडवा। आढ़ती एसोसिएशनों ने प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के अंबाला शहर में आढ़तियों के बारे में दिए गए बयान की कड़ी निंदा की है।

ओपी धनखड़ ने कहा था कि जो आढ़ती किसानों को धान के कम भाव देता है, उसके लिए किसान लट्ठ उठा लें। रविवार को लाडवा अनाजमंडी में तीन जिलों की 12 मंडियों की संयुक्त कमेटी के अध्यक्ष अशोक गुप्ता ने पत्रकार वार्ता में कृषि मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की।

अशोक गुप्ता ने कृषि मंत्री के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आढ़ती मात्र कमीश्र एजेंट है। उनका काम किसान की फसल को बिकवाना होता है। आढ़ती खुद खरीदार नहीं होता, बल्कि किसान की फसल को सरकारी एजेंसियों, पक्के आढ़तियों और व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता है।

मंत्री आढ़तियों और खरीदारों में फर्क नहीं कर पा रहे। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री यदि ऐसे गैर जिम्मेदाराना बयान देंगे, तो राज्य में कानून व्यवस्था कभी भी बिगड़ सकती है। उन्होंने कहा कि मंत्री को किसानों के प्रति इतनी ही हमदर्दी है, तो वे किसानों द्वारा मजबूरीवश कटवाए गए ज्यादा नमी वाले धान की सरकारी खरीद का प्रबंध कराएं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मंडियों में धान की सरकारी खरीद की घोषणा कर दी है, लेकिन सरकारी एजेंसियां धान खरीदने में आनाकानी कर रही हैं। उन्होंने किसानों को फसल के सीधे भुगतान के बयान पर भी कड़ा एतराज जताया। कहा कि सीधे भुगतान करने की कोशिश पर आढ़ती विरोध करेंगे।


उन्होंने कहा कि सरकार अपना पूरा ध्यान किसानों के धान की खरीद पर लगाए ताकि किसानों को इसका फायदा मिल सके। इस अवसर पर विकास सिंघल, राकेश खुराना, कर्ण सिंह मंढान, प्रेम सिंह धानोखेड़ी, रंजीत सिंह, नफे सिंह, रंजीत सैनी, मनजीत सिंह, विनोद कुमार आदि उपस्थित थ्ेा।
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