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राजनीति का शुद्धिकरण जरूरी: चढूनी
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किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों की समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए अच्छे लोगों को राजनीति में लाकर राजनीति का शुद्धिकरण करना होगा। ये विचार उन्होंने शाहाबाद में पत्रकारों से बातचीत में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कर्जे के कारण देश में हर वर्ष 20 से 25 हजार किसान आत्महत्या करते हैं, लेकिन इसके विपरीत उनसे दुगने के कर्जे के डिफाल्टर एमाउंट कारपोरेट के हैं। इसके बाद भी उन्होंने कारपोरेट जगत के एक भी व्यक्ति को आज तक आत्महत्या करते नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के शिकंजे से किसानों को बचाने के लिए अच्छे लोगों का राजनीति में आना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस समय किसान एकत्रित हैं कोई ऐसा निर्णय लेना चाहिए ताकि किसानों की सभी समस्याएं एक साथ खत्म हो जाएं। पंचायत चुनाव में किसानों द्वारा चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि अभी इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा सस्पेंड किए जाने की बात पर चढूनी ने कहा कि सस्पेंड किए जाने से उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी और आज भी वह अपनी विचारधारा पर कायम हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों के साथ पंजाब व उत्तर प्रदेश में आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर 2020 को जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तो भाकियू की रणनीति थी कि वह बैरियर तोड़ कर आगे बढ़ेंगे जबकि पंजाब की रणनीति थी कि जब भी उन्हें रोका जाएगा वह रुक जाएंगे। कानूनों को रद्द कराने के लिए 22 जुलाई से किसान संसद सत्र में कूच करेंगे। इस अवसर पर जसबीर सिंह मामूमाजरा भी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि कर्जे के कारण देश में हर वर्ष 20 से 25 हजार किसान आत्महत्या करते हैं, लेकिन इसके विपरीत उनसे दुगने के कर्जे के डिफाल्टर एमाउंट कारपोरेट के हैं। इसके बाद भी उन्होंने कारपोरेट जगत के एक भी व्यक्ति को आज तक आत्महत्या करते नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के शिकंजे से किसानों को बचाने के लिए अच्छे लोगों का राजनीति में आना जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि इस समय किसान एकत्रित हैं कोई ऐसा निर्णय लेना चाहिए ताकि किसानों की सभी समस्याएं एक साथ खत्म हो जाएं। पंचायत चुनाव में किसानों द्वारा चुनाव लड़ने की बात पर उन्होंने कहा कि अभी इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया है। संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा सस्पेंड किए जाने की बात पर चढूनी ने कहा कि सस्पेंड किए जाने से उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी और आज भी वह अपनी विचारधारा पर कायम हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि किसानों के साथ पंजाब व उत्तर प्रदेश में आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर 2020 को जब आंदोलन की शुरुआत हुई थी तो भाकियू की रणनीति थी कि वह बैरियर तोड़ कर आगे बढ़ेंगे जबकि पंजाब की रणनीति थी कि जब भी उन्हें रोका जाएगा वह रुक जाएंगे। कानूनों को रद्द कराने के लिए 22 जुलाई से किसान संसद सत्र में कूच करेंगे। इस अवसर पर जसबीर सिंह मामूमाजरा भी मौजूद रहे।
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