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Kurukshetra News: टांग को काटने की थी तैयारी, इलिजारोव तकनीक बनी वरदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 May 2025 01:52 AM IST
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Preparations were being made to amputate the leg, but Ilizarov technique proved to be a boon
कुरुक्षेत्र। टूटी हड्डियों को ऑपरेशन के बाद जुड़ने में कई-कई माह लग जाते हैं और मरीज को उतने समय बेड पर ही दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है, परंतु अब ऐसा नहीं होगा। अब जिला नागरिक अस्पताल में इलिजारोव तकनीक से ऑपरेशन होना शुरू हो गए हैं।
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इस तकनीक के माध्यम से लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल में कुरुक्षेत्र के रहने वाले सतबीर की हादसे में चूर-चूर हुई टांग की हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया है, जिसे काटने की तैयारी थी। उन्होंने ऑपरेशन के महज कुछ घंटे बाद ही चलना शुरू कर दिया। यह करिश्मा हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन ने कर दिखाया है। उन्होंने इस तकनीक के माध्यम से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए पैरों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव का वादा किया है। इस ऑपरेशन का श्रेय उन्होंने सीएमओ डॉ. सुखबीर सैनी, पीएमओ साराह अग्रवाल, डॉ. शैली, ऑर्थो ईश्म सिंह के प्रोत्साहन को दिया है।
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ऐसे काम करती है इलिजारोव तकनीक
इलिजारोव तकनीक जटिल हड्डी टूटने, हड्डियों के गलत जुड़ाव और जन्मजात विकृतियों के इलाज में अत्यंत प्रभावी है। इस तकनीक में एक बाहरी फ्रेम का उपयोग किया जाता है। यह फ्रेम पेन की निब से भी पतली इलिजारोव तार पर टिकी रहती है, जो हड्डियों को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाता है और नई हड्डी के निर्माण को प्रोत्साहित करता है। यह तकनीक पचास से ज्यादा हड्डी रोगों में कारगर साबित होती है। क्याेंकि इस तकनीक में टूटी ही जगह पर हर रोज पट्टी बदलने में आसानी होती है और इसमें रेशा व इंफेक्शन फैलने का खतरा नहीं रहता है और मरीज अपने रोजमर्रा कार्य के लिए दूसरे के आसरे नहीं रहता है। वहीं मरीज सतबीर सिंह का कहना है कि इस तकनीक व डॉ. गुंजन के प्रयास से उन्हें नया जीवन मिला है। उन्हें उम्मीद नहीं रही थी कि वह कभी अपने पांव पर चल सकेगा।
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जर्मनी की एलएमयू विश्वविद्यालय से फैलोशिप है डॉ. गुंजन
डॉ. गुंजन ने यह तकनीक जर्मनी के एलएमयू विश्वविद्यालय से फेलोशिप प्राप्त कर प्रो. पीटर थालर से विशेष प्रशिक्षण लेकर सीखी है, जहां इसे व्यापक रूप से अपनाया गया है। एयरफोर्स में भी अपनी मेडिकल क्षेत्र में सेवाएं दे चुके डॉ. गुजन पहले दिल्ली एम्स व कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में इस तकनीक से मरीजों का सफल ऑपरेशन करते रहे हैं। डॉ. गुंजन ने एक रोचक तथ्य साझा करते हुए कहा कोलकाता का प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज भी इस तकनीक से प्रेरित है। जिस तरह ब्रिज की संरचना तनाव को संतुलित करती है, उसी तरह इलिजारोव फ्रेम हड्डियों पर नियंत्रित तनाव डालकर उन्हें ठीक करता है। यह तकनीक न केवल तेजी से रिकवरी सुनिश्चित करती है, बल्कि मरीजों को जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में भी मदद करती है।




रूसी डॉ. गवरिल इलिजारोव ने किया इस तकनीक को विकसीत
इलिजारोव तकनीक को रूसी चिकित्सक डॉ. गवरिल इलिजारोव ने विकसित किया था, हड्डियों के जटिल फ्रैक्चर, गलत जुड़ाव, हड्डी की कमी, या जन्मजात विकृतियों के इलाज में अत्यंत प्रभावी है। यह तकनीक हड्डियों को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाती है और नई हड्डी के निर्माण को प्रोत्साहित करता है। इस प्रक्रिया में मरीज की रिकवरी तेज होती है और जटिल सर्जरी की आवश्यकता कम हो जाती है।
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