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Kurukshetra News: शॉपिंग मॉल में समय पर नहीं दिया दुकान का कब्जा, अब कंपनी को लौटाने होंगे 17 लाख रुपये

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 01:23 AM IST
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Possession of shop in shopping mall was not given on time, now the company will have to return 17 lakh rupees
कुरुक्षेत्र। उपभोक्ता फाेरम कुरुक्षेत्र। संवाद - फोटो : संवाद
कुरुक्षेत्र। शॉपिंग मॉल में दुकान का कब्जा समय पर न देने पर संबंधित कंपनी को अब आवेदनकर्ता को करीब 17 लाख रुपये लौटाने होंगे। मानसिक पीड़ा व मुकदमेबाजी में खर्च के रूप में भी 50 हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
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गैलेरिया शॉपिंग मॉल में दुकान लेने के लिए एक व्यक्ति ने 2011 में आवेदन किया था। आवेदन में दुकान अलाॅट होने पर 36 माह में दुकान पर कब्जा देने का क्रेता समझौता हुआ लेकिन मेसर्स जागरण डेवलपर व्यक्ति को दुकान पर कब्जा नहीं दे पाया। आवेदन कर्ता ने आखिर में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग दरवाजा खटखटाया।
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अब आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए मेसर्स जागरण डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को 17 लाख 2 हजार 244 रुपये की जमा राशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 45 दिनों के भीतर वापस करने का आदेश दिया है। साथ ही आयोग ने शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा भी प्रदान करने का निर्णय सुनाया।
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सेक्टर 13 के रहने वाली पुष्पा गौतम ने जागरण डेवलपर्स के खिलाफ ने 27 जून 2011 को द गैलेरिया नामक व्यावसायिक परियोजना में 368.25 वर्ग फुट की एक दुकान के लिए आवेदन किया था और 23 अप्रैल 2014 को डेवलपर के साथ क्रेता समझौता किया था। इसके लिए शिकायतकर्ता ने 17 लाख दो हजार 244 रुपये का भुगतान किया था लेकिन डेवलपर 36 महीनों के भीतर दुकान का कब्जा देने में विफल रहा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि परियोजना स्थल पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ और डेवलपर ने बार-बार राशि वापसी के अनुरोधों को टाल दिया।
जागरण डेवलपर ने दावा किया कि परियोजना पूरी हो चुकी थी और 21 फरवरी 2020 को शिकायतकर्ता को कब्जे का प्रस्ताव भेजा गया था। डेवलपर ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने भुगतान में देरी की थी जिसके कारण ब्याज लागू हुआ। उन्होंने दावा किया कि देरी के लिए 38,790 रुपये का मुआवजा शिकायतकर्ता के खाते में समायोजित किया था। डेवलपर ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता नहीं है, क्योंकि परियोजना व्यावसायिक थी।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला ने दोनों पक्षों के तर्कों और साक्ष्यों के अध्ययन उपरांत पाया कि डेवलपर ने समय पर कब्जा देने में विफलता के कारण शिकायतकर्ता के उद्देश्य को नुकसान पहुंचाया, जिसके लिए दुकान खरीदी गई थी। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए, आयोग ने डेवलपर को पूरी राशि सात प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक पीड़ा के लिए 50 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान किया गया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 72 के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें एक माह से तीन वर्ष तक का कारावास या 25 हजार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों शामिल हो सकते हैं।
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