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प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव से प्रदूषण

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Sep 2022 01:30 AM IST
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pollution due to pressure on natural resources, Kurukshetra
केयू में पर्यावरण चुनौतियां मुद्दे एवं उपाय विषय पर ऑनलाइन रिफ्रेशर को संबोधित करते केयू कुलपत? - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। गत वर्षों में जनसंख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण अन्न, जल, घर, बिजली, सड़क वाहन और अन्य वस्तुओं की मांग में भी वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर काफी दबाव पड़ रहा है और वायु, जल तथा भूमि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। ये बातें केयू कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहीं।
वे शुक्रवार को यूजीसी मानव संसाधन विकास केंद्र तथा पर्यावरण अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण चुनौतियां : मुद्दे एवं उपाय विषय पर 22 सितंबर तक चलने वाले ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स के शुक्रवार को उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। कुलपति ने कहा कि आज सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दे ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन है। प्रकृति को नियंत्रित करने के प्रयास में मनुष्य ने निरंतर धरती के अस्तित्व को खतरे में डाला है। हमारा पर्यावरण गतिशील है और इसमें निरंतर बदलाव और विकास होता रहता है। हमारे क्रियाकलाप अब पर्यावरण में बदलाव उत्पन्न कर रहे हैं।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. बलदेव सेतिया ने कहा कि जल प्रबंधन का आशय जल संसाधनों के प्रयोग से है और जल की लगातार बढ़ती मांग के कारण देशभर में जल के उचित प्रबंधन की आवश्यकता कई वर्षों से महसूस की जा रही है। जल प्रबंधन के तहत पानी से संबंधित विषयों जैसे- बाढ़, सूखा और संदूषण आदि के प्रबंधन को भी शामिल किया जाता है। जल संरक्षण के लिए भूमिगत बांधों का निर्माण किया जाए, जिससे गैर मानसूनकें महीनों में भूमिगत नाली के जल को नदी के चैनलों में जाने से रोका जाए। छोटे और बड़े पोखर और तालाबों का निर्माण करना चाहिए।
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प्रोफेसर एनसी गुप्ता, पूर्व डीन और प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जीजीएसआईपीयू, नई दिल्ली ने विश्वविद्यालयों में अनुसंधान के तरीके पर व्याख्यान दिया। डॉ. सीएस झा उत्कृष्ट वैज्ञानिक एवं मुख्य महाप्रबंधक एनआरएससी इसरो हैदराबाद ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए भू-स्थानिक अनुप्रयोग पर व्याख्यान दिया। कोर्स कोआर्डिनेटर तथा पर्यावरण अध्ययन संस्थान की निदेशक प्रो. स्मिता चौधरी ने बताया कि कोर्स में पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा के विभिन्न कॉलेजों से विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषयों से संबंधित लगभग 30 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
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