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राजनेता बोले: पटाखा रहित fदवाली का संकल्प लेकर कोरोना महामारी का करें खात्मा
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दिवाली पर्व को लेकर बाजार सज चुके है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग अपने पसंद के सामान की खरीददारी कर रहे हैं। दिवाली को लेकर बच्चों और युवाओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। खासकर बच्चे अभी से पटाखों की लिस्ट तैयार रहे है तथा बच्चे अभी से अपने मनपसंद पटाखे खरीदकर उनको चेक कर रहे है। वहीं अमर उजाला पटाखा रहित दिवाली मनाने के लिए सभी को जागरूक कर रहा है। इस कड़ी में आज अमर उजाला ने राजनेताओं से बातचीत की। राजनेताओं ने बताया कि दिवाली पटाखा और प्रदूषण रहित होनी चाहिए। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार दिवाली को पटाखा रहित बनाने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि कोरोना का खात्मा हो सकें।
दीवाली पवित्र पर्व, नहीं होना चाहिए पटाखों का शोर : संदीप सिंह
खेल एवं युवा मामले मंत्री सरदार संदीप सिंह ने बताया कि दीपावली पटाखा रहित होनी चाहिए। पटाखों के प्रदूषण और ध्वनि से वातावरण दूषित होता है। सांस के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ऐसे में दीपावली मिट्टी के दीए जलाकर मनाई जा सकती है। इससे दीपक बेचने वाले परिवारों की आमदन भी होगी और वातावरण प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। इस प्रयास के लिए सभी को मिलजुलकर पहल करनी होगी। रामायण में भी साफ लिखा है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दीए जलाकर अयोध्या वासियों ने उनका अभिनंदन किया था। फिर ऐसे पवित्र पर्व पर पटाखों का शोर क्यों किया जाए।
दीवाली पर्व का उद्देश्य दूसरों को खुशी बांटना : सुभाष सुधा
थानेसर विधायक सुुभाष सुधा ने बताया कि पटाखे जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होगा, जिससे हमारे साथ-साथ कई लोग इसकी चपेट आ जाते है। दीवाली खुशियों का पर्व है और व्यर्थ का शोरशराबा नहीं करना चाहिए। दीवाली पर सरसों के तेल के दिए जलाए, जिससे पर्यावरण शुद्ध होगा। इसलिए इस बार दीवाली पर पटाखों से तौबा करके मिट्टी के दीपक जलाकर दूसरों को खुशी दे। दीवाली के पर्व का उद्देश्य भी खुशी देना है।
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पटाखा रहित दीवाली का संकल्प लेकर खत्म करें कोरोना का अंधकार : मेवा सिंह
लाडवा से कांग्रेस विधायक मेवा सिंह ने बताया कि दीवाली प्रकाश का पर्व है। इस दीवाली पर पटाखों की जगह दीए जलाकर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचना होगा। वहीं कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व पर संकट छाया हुआ है। ऐसे में हमें इस पवित्र पर्व पर विश्व कल्याण के लिए दीपक जलाकर कामना करनी चाहिए ताकि कोरोना रूपी अंधकार को अपने संकल्प से खत्म किया जा सकें।
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दीवाली पवित्र पर्व, नहीं होना चाहिए पटाखों का शोर : संदीप सिंह
खेल एवं युवा मामले मंत्री सरदार संदीप सिंह ने बताया कि दीपावली पटाखा रहित होनी चाहिए। पटाखों के प्रदूषण और ध्वनि से वातावरण दूषित होता है। सांस के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। ऐसे में दीपावली मिट्टी के दीए जलाकर मनाई जा सकती है। इससे दीपक बेचने वाले परिवारों की आमदन भी होगी और वातावरण प्रदूषण से भी बचा जा सकेगा। इस प्रयास के लिए सभी को मिलजुलकर पहल करनी होगी। रामायण में भी साफ लिखा है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने पर दीए जलाकर अयोध्या वासियों ने उनका अभिनंदन किया था। फिर ऐसे पवित्र पर्व पर पटाखों का शोर क्यों किया जाए।
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दीवाली पर्व का उद्देश्य दूसरों को खुशी बांटना : सुभाष सुधा
थानेसर विधायक सुुभाष सुधा ने बताया कि पटाखे जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होगा, जिससे हमारे साथ-साथ कई लोग इसकी चपेट आ जाते है। दीवाली खुशियों का पर्व है और व्यर्थ का शोरशराबा नहीं करना चाहिए। दीवाली पर सरसों के तेल के दिए जलाए, जिससे पर्यावरण शुद्ध होगा। इसलिए इस बार दीवाली पर पटाखों से तौबा करके मिट्टी के दीपक जलाकर दूसरों को खुशी दे। दीवाली के पर्व का उद्देश्य भी खुशी देना है।
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पटाखा रहित दीवाली का संकल्प लेकर खत्म करें कोरोना का अंधकार : मेवा सिंह
लाडवा से कांग्रेस विधायक मेवा सिंह ने बताया कि दीवाली प्रकाश का पर्व है। इस दीवाली पर पटाखों की जगह दीए जलाकर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचना होगा। वहीं कोरोना महामारी के कारण पूरे विश्व पर संकट छाया हुआ है। ऐसे में हमें इस पवित्र पर्व पर विश्व कल्याण के लिए दीपक जलाकर कामना करनी चाहिए ताकि कोरोना रूपी अंधकार को अपने संकल्प से खत्म किया जा सकें।