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‘वेटलैंड बचाकर वन्यजीव संरक्षण में निभाएं भूमिका’
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने प्राणी शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक राय की पुस्तक बर्ड्स ऑफ बसई वेटलैंड का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति ने कहा है कि वेटलैंड्स को बचाकर हम वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 से रामसर कन्वेंशन के बाद हम विश्व वेटलैंड दिवस मना रहे हैं। आज के दिन भारत में 47 रामसर साइट्स हो चुकी हैं और देश में हजारों वेटलैंड्स को चिह्नित किया जा चुका है। ये वेटलैंड्स पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवासीय स्थान का काम करती है। इनके संरक्षण से हम भारत के पक्षियों की प्रजातियों का संरक्षण कर सकते हैं।
कुलपति प्रो. सचदेवा ने कहा कि बसई वेटलैंड के पक्षियों के संरक्षण के लिए यह पुस्तक जागरूकता लाएगी। कहा कि यह पुस्तक आने वाले समय में भी संकलन, शोध, डाक्यूमेंटेशन व मॉनिटरिंग के अहम पहलुओं में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि पक्षियों के डाक्यूमेंटेशन व जागरूकता में विवि. का प्राणी शास्त्र विभाग महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। कुलपति ने डॉ. दीपक राय बब्बर व उनकी पूरी टीम को इस पुस्तक के लेखन के लिए बधाई दी।
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पक्षियों के संरक्षण के प्रति जिज्ञासा पैदा करेगी पुस्तक
पुस्तक के लेखक डॉ. दीपक राय ने बताया कि यह पुस्तक एक अच्छे रिसर्च डिजाइन के साथ बसई वेटलैंड के पक्षियों के संरक्षण के उद्देश्य से लिखी गई है। यह पुस्तक प्राणिशास्त्र के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम विद्यार्थी व पाठकों में भी बसई वेटलैंड पक्षियों के प्रति जिज्ञासा पैदा करेगी।
बताया कि इस तरह के शोध कार्यों से देश में हजारों वेटलैंड्स को चिह्नित करके एक रिकॉर्ड के रूप में पक्षियों के संरक्षण के क्षेत्र में हम सब मिलकर अपनी भूमिका निभा सकते हैं। यह पुस्तक स्कूल के छात्रों में पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगी। इस अवसर पर लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. बृजेश साहनी, शोधार्थी व पुस्तक के लेखक विनीता व पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे।
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कुरुक्षेत्र। विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने प्राणी शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक राय की पुस्तक बर्ड्स ऑफ बसई वेटलैंड का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति ने कहा है कि वेटलैंड्स को बचाकर हम वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 से रामसर कन्वेंशन के बाद हम विश्व वेटलैंड दिवस मना रहे हैं। आज के दिन भारत में 47 रामसर साइट्स हो चुकी हैं और देश में हजारों वेटलैंड्स को चिह्नित किया जा चुका है। ये वेटलैंड्स पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवासीय स्थान का काम करती है। इनके संरक्षण से हम भारत के पक्षियों की प्रजातियों का संरक्षण कर सकते हैं।
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कुलपति प्रो. सचदेवा ने कहा कि बसई वेटलैंड के पक्षियों के संरक्षण के लिए यह पुस्तक जागरूकता लाएगी। कहा कि यह पुस्तक आने वाले समय में भी संकलन, शोध, डाक्यूमेंटेशन व मॉनिटरिंग के अहम पहलुओं में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि पक्षियों के डाक्यूमेंटेशन व जागरूकता में विवि. का प्राणी शास्त्र विभाग महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। कुलपति ने डॉ. दीपक राय बब्बर व उनकी पूरी टीम को इस पुस्तक के लेखन के लिए बधाई दी।
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पक्षियों के संरक्षण के प्रति जिज्ञासा पैदा करेगी पुस्तक
पुस्तक के लेखक डॉ. दीपक राय ने बताया कि यह पुस्तक एक अच्छे रिसर्च डिजाइन के साथ बसई वेटलैंड के पक्षियों के संरक्षण के उद्देश्य से लिखी गई है। यह पुस्तक प्राणिशास्त्र के विद्यार्थियों के साथ-साथ आम विद्यार्थी व पाठकों में भी बसई वेटलैंड पक्षियों के प्रति जिज्ञासा पैदा करेगी।
बताया कि इस तरह के शोध कार्यों से देश में हजारों वेटलैंड्स को चिह्नित करके एक रिकॉर्ड के रूप में पक्षियों के संरक्षण के क्षेत्र में हम सब मिलकर अपनी भूमिका निभा सकते हैं। यह पुस्तक स्कूल के छात्रों में पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगी। इस अवसर पर लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. बृजेश साहनी, शोधार्थी व पुस्तक के लेखक विनीता व पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे।