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Kurukshetra News: कूल्हे की गल चुकी थी हड्डी, व्हीलचेयर पर आया मरीज, पैरों पर लौटा

Mon, 10 Nov 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 10 Nov 2025 12:31 AM IST
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Patient arrived in a wheelchair after his hip bone had decayed, but returned to his feet.
कुरुक्षेत्र।मरीज के साथ डॉ. राजा सिंगला। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। कूल्हे की हड्डी में एवीएन नाम की बीमारी के चलते कभी बिस्तर से उठना भी संभव नहीं था, किसी तरह व्हीलचेयर पर पहुंचा तो न केवल इलाज मिला बल्कि अपने पैरों पर भी चलकर गया। पानीपत के गांव खोदपुरा निवासी अमित कुमार को चिकित्सकों ने कूल्हा बदलने की सलाह दी थी लेकिन इसके बिना ही आयुर्वेद इलाज ने उसे नया जीवनदान दे दिया जिसके साथ ही उसके व परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में उपचार के बाद न केवल चलना-फिरना शुरू किया बल्कि खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करने लगा है।
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अमित को साल 2021 में कमर में दर्द होना शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे बढ़ता गया। उसने कई जगह इलाज कराया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। दर्द कूल्हे से होते हुए घुटनों तक पहुंचने लगा। साल 2023 में कराई गई एमआरआई में पता चला कि दोनों कूल्हे की हड्डी में एवीएन नाम की बीमारी है।
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अमित के मुताबिक करनाल के एक प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ से उसने कूल्हे का ऑपरेशन (फिब्लरग्राफटिंग) करवाया और करीब आठ माह तक बिस्तर पर रहा लेकिन फिर से दर्द शुरू हो गया। दोबारा जांच में चिकित्सक ने कूल्हा बदलने की सलाह दी। वह आईबीएस (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) से भी ग्रसित था जिसकी वजह से उसे दिन में सात-आठ बार शौच जाना पड़ता था और उनका वजन लगभग 20-30 किलोग्राम कम हो गया। अमित ने बताया कि वह चलने-फिरने में असमर्थ था, बिस्तर से उठना भी मुश्किल था। परिजन उसे श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग के डॉ. राजा सिंगला के पास लेकर पहुंचे तो इलाज शुरू हुआ।
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एवीएन गंभीर बीमारी, रुक जाती है खून की सप्लाई : डॉ. सिंगला


डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि मरीज की एमआरआई रिपोर्ट में ग्रेड-2 और ग्रेड-3 एवीएन की पुष्टि हुई। यह गंभीर बीमारी है जिसमें कूल्हे की हड्डी में खून की सप्लाई रुक जाती है। हड्डी को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और वह गलने लगती है। साथ ही मरीज को दिन में बार-बार शौच जाने की भी दिक्कत थी। मरीज को आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म चिकित्सा दी गई जिसमें मुख्य रूप से कटि बस्ति, पत्र पिंड स्वेदन, बस्ति चिकित्सा शामिल रहीं। लगातार उपचार और आहार-संयम से कुछ महीनों में मरीज की चलने-फिरने की क्षमता पूरी तरह लौट आई है।

कुरुक्षेत्र।मरीज के साथ डॉ. राजा सिंगला। विज्ञप्ति

कुरुक्षेत्र।मरीज के साथ डॉ. राजा सिंगला। विज्ञप्ति

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