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Kurukshetra News: ऑटोमोटिव ईको फ्रेंडली ब्रेक मैटेरियल के लिए मिला पेटेंट, प्रदूषण से मिलेगी राहत
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय यूआईईटी संस्थान के मैकेनिकल विभाग के शिक्षकों का ऑटोमोटिव ईको फ्रेंडली ब्रेक मैटेरियल के लिए पेटेंट मिला है। इसमें संस्थान के पांच शिक्षक डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. संजय काजल, डॉ. सुनील नैन, डॉ. अनुराधा और डॉ. उपेंद्र ढुल के सहयोग से इस शोध पर कार्य किया गया।
शिक्षकों ने बताया कि मोबाइल डिस्क ब्रेक का चलन होने से ब्रेकिंग के समय जब ब्रेक घिसते हैं तो उसका ब्रेक डस्ट मैटेरियल हवा में मिलकर हवा को प्रदूषित करता है और पानी में मिलकर पानी को दूषित करने का कार्य करता है बल्कि समूचे पर्यावरण को प्रभावित करता है। इस समस्या के समाधान के लिए शोधकर्ता ने सी-शेल्स और फ्लाई ऐश समेत अन्य सात मैटेरियल का प्रयोग करके एक ऐसा ब्रेक पैड तैयार किया है जो कॉमर्शियल ब्रेक पैड से तुलनात्मक है और कम मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर रिलीज करेगा। इससे हमारे पर्यावरण को सीधे रूप से फायदा मिलेगा। इस उपलब्धि के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और कुलसचिव प्रो. संजीव शर्मा ने शिक्षकों प्रोत्साहित किया।
डीन इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी और यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने बताया कि शोध क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए हर समय प्रयत्नशील रहते हैं किसी भी शोध में पेटेंट मिलना बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। संस्थान के शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार कर सफलता हासिल की है, जिसके लिए यूआईईटी परिवार के लिए खुशी का पल है। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. सोमनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन से शिक्षा और शोध में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
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शिक्षकों ने बताया कि मोबाइल डिस्क ब्रेक का चलन होने से ब्रेकिंग के समय जब ब्रेक घिसते हैं तो उसका ब्रेक डस्ट मैटेरियल हवा में मिलकर हवा को प्रदूषित करता है और पानी में मिलकर पानी को दूषित करने का कार्य करता है बल्कि समूचे पर्यावरण को प्रभावित करता है। इस समस्या के समाधान के लिए शोधकर्ता ने सी-शेल्स और फ्लाई ऐश समेत अन्य सात मैटेरियल का प्रयोग करके एक ऐसा ब्रेक पैड तैयार किया है जो कॉमर्शियल ब्रेक पैड से तुलनात्मक है और कम मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर रिलीज करेगा। इससे हमारे पर्यावरण को सीधे रूप से फायदा मिलेगा। इस उपलब्धि के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा और कुलसचिव प्रो. संजीव शर्मा ने शिक्षकों प्रोत्साहित किया।
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डीन इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी और यूआईईटी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने बताया कि शोध क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए हर समय प्रयत्नशील रहते हैं किसी भी शोध में पेटेंट मिलना बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। संस्थान के शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार कर सफलता हासिल की है, जिसके लिए यूआईईटी परिवार के लिए खुशी का पल है। उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. सोमनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन से शिक्षा और शोध में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
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