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प्राथमिक स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का खाता खुलवाने के लिए कड़ी परीक्षा से गुजर रहे शिक्षक और अभिभावक
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दस साल के कम आयु वर्ग वाले विद्यार्थियों को सरकार की योजना के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति और भत्ते में अब सरकारी बैंकों के बदले नियम ही आड़े आ रहे हैं। प्राथमिक स्कूल के विद्यार्थियों का बैंक में खाता खुलवाना शिक्षकों और अभिभावकों के लिए गले की फांस बन गया है।
कोविड काल के दौरान पिछले डेढ़ साल से सरकारी बैंकों ने खाता खोलने के नियम में बदलाव कर दिया है। डेढ़ साल पहले लोकल स्तर पर आसानी ने खुलने वाला बैंक खाता अब मुख्यालय स्तर पर खुलने में कई माह का समय लग रहा है। यही कारण है कि जिलेभर के 483 राजकीय प्राथमिक स्कूलों के हजारों विद्यार्थी सरकार द्वारा दी जा रही छात्रवृत्ति एवं भत्ते से पांच माह से वंचित हैं।
हालात ऐसे बने हुए हैं कि शिक्षकों और अभिभावकों को एक-एक बच्चे का खाता खुलवाने के लिए बैंक के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मई माह में दस्तावेज जमा कराने के बावजूद विद्यार्थियों का खाता अभी तक नहीं खुल सका। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार जिले में अब तक पहली कक्षा के 97 फीसदी विद्यार्थियों के नहीं खुल पाए हैं। वहीं, निजी बैंक जीरो बैलेंस पर विद्यार्थियों का खाता नहीं खोला रहे। संवाद
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सरकार द्वारा कक्षा पहली से आठवीं तक दी जाने वाली छात्रवृत्ति
- मेधावी छात्र एवं छात्राओं को प्रति वर्ष 750 रुपये।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक अनुसूचित जाति के छात्रों को 150 रुपये प्रति माह।
- सभी अनुसूचित जाति की छात्राओं को 225 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के अनुसूचित जाति के छात्रों को 200 रुपये प्रति माह।
- अनुसूचित जाति की छात्राओं को 300 रुपये प्रति माह।
बीपीएल के तहत आठवीं कक्षा तक दिया जाने वाला भत्ता
- कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्रों को 75 रुपये प्रति माह।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक की छात्राओं को 150 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों को 100 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक की छात्राओं को 200 रुपये प्रति माह।
कक्षा पहली से आठवीं तक के बीसी-ए के विद्यार्थियों को दिया जाने वाला भत्ता
- कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्रों को 75 रुपये प्रति माह।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक की छात्राओं को 150 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों को 100 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक की छात्राओं को 200 रुपये प्रति माह।
कक्षा पहली से आठवीं तक के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली नकद पुरस्कार योजना
- कक्षा पहली में 740 रुपये।
- कक्षा दूसरी में 750 रुपये।
- कक्षा तीसरी में 960 रुपये।
- कक्षा चौथी में 970 रुपये।
- कक्षा पांचवीं में 980 रुपये।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 1250 रुपये प्रति वर्ष दिए जाते हैं।
चक्कर काट-काट कर थक चुके, नहीं खुला बच्चे का खाता : संजय सैनी
गांव बारवा निवासी संजय सैनी ने बताया कि उन्होंने अपने छह वर्षीय बेटे विनय का दाखिला गांव के प्राथमिक स्कूल में कराया है। शिक्षकों ने कहा था कि बच्चे का बैंक में खाता खुलवाना अनिवार्य है। वह बच्चे का खाता बैंक में खुलवाने के लिए बैंक के चक्कर काट काट कर थक चुका है, लेकिन खाता नहीं खुला।
जिलेभर में कक्षा पहली के 97 प्रतिशत बच्चों के नहीं खुले खाते : सूबे सिंह
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रेस सचिव सूबे सिंह सुजान का कहना है कि पहली में पढ़ाई कर रहे 97 प्रतिशत बच्चों के बैंक में खाते नहीं खुल सके। इसके लिए शिक्षक संघ की ओर से कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि निजी बैंक जीरो बैलेंस पर खाता नहीं खोल रहे और सरकारी बैंकों में कड़ी परीक्षा से गुजरने के बाद भी कई-कई माह तक खाते नहीं खुल रहे। अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए, ताकि कोई बच्चा छात्रवृत्ति और भत्ते से वंचित न रहे।
शिक्षकों को पीएनबी बैंक के एलडीएम से संपर्क करने का दिया था सुझाव : सतनाम भट्टी
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम भट्टी का कहना है कि बच्चों का खाता खुलवाने में आ रही परेशानी संबंधित शिक्षकों को सुझाव दिया था कि वे पीएनबी बैंक के एलडीएम से संपर्क करें। शिक्षक सरकारी बैंक में ही नहीं निजी बैंक में भी बच्चों का खाता खुलवा सकते हैं।
बदल गई खाता खोलने की प्रक्रिया, इसलिए दिक्कतों का करना पड़ रहा है सामना : एलडीएम
पीएनबी के एलडीएम राजीव रंजन का कहना है कि पहले लोकल ब्रांच में ही खाता खोला जाता था। उस समय एक घंटे का समय लगता था, लेकिन अब सभी खाते बैंक की मुख्य ब्रांच से खोले जा रहे हैं। इसी वजह से खाता खोलने में समय लग रहा है। यहां से दस्तावेज स्कैन होकर मुख्य ब्रांच में भेजे जाते हैं। वहां से जांच होने के बाद खाता खोला जाता है।
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कोविड काल के दौरान पिछले डेढ़ साल से सरकारी बैंकों ने खाता खोलने के नियम में बदलाव कर दिया है। डेढ़ साल पहले लोकल स्तर पर आसानी ने खुलने वाला बैंक खाता अब मुख्यालय स्तर पर खुलने में कई माह का समय लग रहा है। यही कारण है कि जिलेभर के 483 राजकीय प्राथमिक स्कूलों के हजारों विद्यार्थी सरकार द्वारा दी जा रही छात्रवृत्ति एवं भत्ते से पांच माह से वंचित हैं।
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हालात ऐसे बने हुए हैं कि शिक्षकों और अभिभावकों को एक-एक बच्चे का खाता खुलवाने के लिए बैंक के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मई माह में दस्तावेज जमा कराने के बावजूद विद्यार्थियों का खाता अभी तक नहीं खुल सका। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार जिले में अब तक पहली कक्षा के 97 फीसदी विद्यार्थियों के नहीं खुल पाए हैं। वहीं, निजी बैंक जीरो बैलेंस पर विद्यार्थियों का खाता नहीं खोला रहे। संवाद
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सरकार द्वारा कक्षा पहली से आठवीं तक दी जाने वाली छात्रवृत्ति
- मेधावी छात्र एवं छात्राओं को प्रति वर्ष 750 रुपये।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक अनुसूचित जाति के छात्रों को 150 रुपये प्रति माह।
- सभी अनुसूचित जाति की छात्राओं को 225 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के अनुसूचित जाति के छात्रों को 200 रुपये प्रति माह।
- अनुसूचित जाति की छात्राओं को 300 रुपये प्रति माह।
बीपीएल के तहत आठवीं कक्षा तक दिया जाने वाला भत्ता
- कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्रों को 75 रुपये प्रति माह।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक की छात्राओं को 150 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों को 100 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक की छात्राओं को 200 रुपये प्रति माह।
कक्षा पहली से आठवीं तक के बीसी-ए के विद्यार्थियों को दिया जाने वाला भत्ता
- कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्रों को 75 रुपये प्रति माह।
- कक्षा पहली से पांचवीं तक की छात्राओं को 150 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के छात्रों को 100 रुपये प्रति माह।
- कक्षा छठी से आठवीं तक की छात्राओं को 200 रुपये प्रति माह।
कक्षा पहली से आठवीं तक के अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली नकद पुरस्कार योजना
- कक्षा पहली में 740 रुपये।
- कक्षा दूसरी में 750 रुपये।
- कक्षा तीसरी में 960 रुपये।
- कक्षा चौथी में 970 रुपये।
- कक्षा पांचवीं में 980 रुपये।
- कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 1250 रुपये प्रति वर्ष दिए जाते हैं।
चक्कर काट-काट कर थक चुके, नहीं खुला बच्चे का खाता : संजय सैनी
गांव बारवा निवासी संजय सैनी ने बताया कि उन्होंने अपने छह वर्षीय बेटे विनय का दाखिला गांव के प्राथमिक स्कूल में कराया है। शिक्षकों ने कहा था कि बच्चे का बैंक में खाता खुलवाना अनिवार्य है। वह बच्चे का खाता बैंक में खुलवाने के लिए बैंक के चक्कर काट काट कर थक चुका है, लेकिन खाता नहीं खुला।
जिलेभर में कक्षा पहली के 97 प्रतिशत बच्चों के नहीं खुले खाते : सूबे सिंह
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रेस सचिव सूबे सिंह सुजान का कहना है कि पहली में पढ़ाई कर रहे 97 प्रतिशत बच्चों के बैंक में खाते नहीं खुल सके। इसके लिए शिक्षक संघ की ओर से कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि निजी बैंक जीरो बैलेंस पर खाता नहीं खोल रहे और सरकारी बैंकों में कड़ी परीक्षा से गुजरने के बाद भी कई-कई माह तक खाते नहीं खुल रहे। अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए, ताकि कोई बच्चा छात्रवृत्ति और भत्ते से वंचित न रहे।
शिक्षकों को पीएनबी बैंक के एलडीएम से संपर्क करने का दिया था सुझाव : सतनाम भट्टी
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सतनाम भट्टी का कहना है कि बच्चों का खाता खुलवाने में आ रही परेशानी संबंधित शिक्षकों को सुझाव दिया था कि वे पीएनबी बैंक के एलडीएम से संपर्क करें। शिक्षक सरकारी बैंक में ही नहीं निजी बैंक में भी बच्चों का खाता खुलवा सकते हैं।
बदल गई खाता खोलने की प्रक्रिया, इसलिए दिक्कतों का करना पड़ रहा है सामना : एलडीएम
पीएनबी के एलडीएम राजीव रंजन का कहना है कि पहले लोकल ब्रांच में ही खाता खोला जाता था। उस समय एक घंटे का समय लगता था, लेकिन अब सभी खाते बैंक की मुख्य ब्रांच से खोले जा रहे हैं। इसी वजह से खाता खोलने में समय लग रहा है। यहां से दस्तावेज स्कैन होकर मुख्य ब्रांच में भेजे जाते हैं। वहां से जांच होने के बाद खाता खोला जाता है।