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पांच हजार करोड़ से भी ज्यादा हुआ धान घोटाला : भाकियू ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:37 AM IST
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Paddy scam worth more than Rs 5,000 crore: BKU sends letter to Chief Minister
कुरुक्षेत्र। करोड़ों के धान घोटाले पर 39 मंडी सचिव व अन्य अधिकारियों को चार्जशीट किया गया है और पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए खाद्य एवं पूर्ति विभाग के प्रधान सचिव डी सुरेश को फील्ड में उतारा है।
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हकीकत में यह घोटाला कितना बड़ा है, यह अभी सरकार की ओर से पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन भारतीय किसान यूनियन के अनुसार यह पांच हजार करोड़ से भी अधिक का घोटाला है।
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इसके लिए भाकियू ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवगत कराते हुए सीबीआई जांच की मांग उठाई है और इसके पूरा न होने पर हाईकोर्ट का रुख करने का भी मन बनाया है। सरकार ने 39 मंडी सचिवों पर कार्रवाई की लेकिन भाकियू इसे नाकाफी मान रही है। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने रविवार को ही किसानों से ऑनलाइन चर्चा में इस कार्रवाई पर सवाल उठाए और प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस ने भी इसे बड़े अधिकारियों व अन्य लोगों को बचाने का प्रयास करार दिया है। भाकियू इसे किसानों की मेहनत व अधिकारों का उल्लंघन मान रही है और केंद्र व प्रदेश सरकार को भी बड़ा राजस्व नुकसान करार दे रही है।
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भाकियू ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उठाए सवाल

- मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 4,83,897 किसानों ने 28,80,192 एकड़ गैर-बासमती धान पंजीकृत की, परंतु कृषि विभाग ने 30,16,285 एकड़ भूमि वेरिफाई की। ऐसे में 1,36,116 एकड़ अधिक रकबा कैसे दर्शाया गया। यह भूमि किसकी है, कहां स्थित है, किसने सत्यापित की यह स्पष्ट नहीं।
-- कई जगह नदी, नाले, अवैध कॉलोनियों, पॉपलर, गन्ना व अन्य फसलों वाले खेतों को भी धान का रकबा दिखाकर सत्यापित किया गया जो गंभीर जालसाजी है।
-- इस वर्ष बाढ़ के कारण कई जिलों में लाखों एकड़ फसल खराब हुई है, जो ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर दर्ज है और अधिकारियों की ओर से सत्यापित किया गया है।
-- छह जिलों भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और चरखी दादरी में 64,726 एकड़ धान दिखाया गया, परंतु खरीद एक दाना भी नहीं। यह धान का रकबा दिखाकर सत्यापित किया गया, यदि धान की फसल पैदा हुई तब खरीद एजेंसियों ने इन जिलों में खरीद क्यों नहीं की। यह रिकार्ड में पैदा धान किस किस जिले व किस किस मंडी में बिकी जिसका अन्य प्रदेशों से धान या चावल मंगवाकर सरकारी खरीद में कैसे दर्शाया गया।
-- विवादित रकबा 2,00,842 एकड़ का, पराली प्रबंधन ही 24 करोड़ 10 लाख 10 हजार 400 रुपये बनते हैं।
-- बिना वाहन आए व बिना तुलाई गाड़ियों के गेट पास काटे गए। मंडी व मिलों के कैमरे जांचे नहीं गए।
-- दूसरे राज्यों से पुराना चावल मंगवाकर वैध दिखाने के लिए मार्केट फीस भरवाई गई।
-- एमएफएमबी पोर्टल के सत्यापन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं। न तो कृषि विभाग और न ही मंडी प्रशासन ने सत्यापन अधिकारियों, खरीद निरीक्षकों, मंडी कर्मचारियों, सेलर मालिकों, अधिकारियों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की है।
-- फिजिकल वेरिफिकेशन में भी भ्रष्टाचार आरोपी अधिकारी स्वयं जांच में लगे।
-- गरीबों के लिए निर्धारित पीडीएस चावल का दुरुपयोग। अन्य राज्यों से मंगवाकर पीडीएस का चावल सस्ते में सेलरों को बेचा गया। उसे सरकारी स्टॉक में मिलाकर एफसीआई को दिया गया।

-- खरीद के समय किसानों को 17 फीसदी नमी या जानबूझकर अन्य कारण बताकर 200-1500 प्रति क्विंटल तक का अवैध कट लगाया गया, जिससे सही खरीद 40 लाख टन मानने पर 800 करोड़ का नुकसान किसानों को हुआ।
-- फतेहाबाद 32.81 किवंटल, कुरुक्षेत्र 31.67 किवंटल खरीद आंकड़ों अनुसार प्रदेश की सबसे ज्यादा पैदावार हुई लेकिन कई बार बाहरी गाड़ियां पकड़े जाने के बाद भी घोटाला दबा दिया गया। करनाल में पैदावार 22.64 किवंटल की पैदावार आने के उपरांत भी कई मामले दर्ज कर करोडों का राजस्व बचाया गया है।
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