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हमारा संविधान गीता, गुरुग्रंथ साहिब और बाइबिल की तरह पवित्र : प्रो. बघेल
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कुरुक्षेत्र। गीता, गुरुग्रंथ साहिब और बाइबिल की तरह ही हमारे देश का संविधान भी पवित्र है। हर नागरिक को संविधान का मान सम्मान और आदर करना चाहिए। देश हित में संविधान में संशोधन किए जाएं लेकिन अपने व्यक्तिगत या कुर्सी के लिए संशोधन करना संविधान की हत्या के समान है। भाजपा संविधान को बचाने में लगी है। ये विचार केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं पंचायती राज्यमंत्री प्रो. एसपी बघेल ने व्यक्त किए। वे बुधवार को पंचायत भवन में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने संविधान हत्या दिवस को लेकर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान जेल में बंद होने वाले और उनके परिजनों को सम्मानित भी किया।
प्रो. बघेल ने कहा कि देश को कुरुक्षेत्र की भूमि से धर्म-अधर्म, न्याय-अन्याय, नीति और अनीति के विषय में ज्ञान दिया है, जिसका हमारे देश में नहीं बल्कि पूरे विश्व में अनुसरण किया है। अब तक अधर्म, अन्याय और अनीति हारती आई है। यही सीख संविधान की हत्या करने वालों को भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में डेमोक्रेसी बहुत ही बड़ी और पुरानी है। देश के पास द्वापर और त्रेता युग का प्रमाण मौजूद है, जबकि अमेरिका के पास स्टैचू ऑफ यूनिटी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका आज खुद की डेमोक्रेसी को सबसे पुराना बता रहा है। अब समय बदल चुका है, उसकी डेमोक्रेसी को भारत के नागरिक चैलेंज करते हैं, क्योंकि सबसे पुरानी और सबसे बड़ी डेमोक्रेसी भारत की रही है और आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अब तक दो महिलाएं राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित हो चुकी हैं। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष तिजेंदर सिंह गोल्डी, भाजपा नेता जवाहर सैनी, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, जिला परिषद चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सत्य प्रकाश, आत्मप्रकाश मनचंदा, जिला मीडिया प्रभारी शैलेश वत्स सहित अन्य लोग भी रहे।
लोकतंत्र पर सिर्फ 19 महीने की इमरजेंसी ही एक काला धब्बा
केंद्रीय राज्य मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि हमारे देश की डेमोक्रेसी पर सिर्फ 19 महीने की इमरजेंसी ही एक काला धब्बा है। यह वो समय है जब देश के नागरिकों को छिप कर रहना पड़ा, दुकानदारों के रोजगार बंद हो गए, किसान अपने खेत में काम नहीं कर सकते थे, जो भी व्यक्ति बाहर मिलता था उसे जेल में बंद कर देते थे। नसबंदियां होती थी, लोगों को बहुत सी यातनाएं सहन करनी पड़ी थी। आपातकाल के दौरान करीब एक लाख 10 हजार लोगों को जेल में बंद किया गया, इनमें पत्रकार भी शामिल रहे। वर्ष 1975 में हमारे देश में तब इनमें से कोई भी कारण नहीं था जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए यह सब किया, जिससे देश पूरी दुनिया में शर्मसार भी हुआ। वे उनके द्वारा किए गए इस निंदनीय कार्यों की पीडीएफ राहुल गांधी को भी भेजेंगे, ताकि उन्हें पता चल सके कि संविधान को किसने खत्म करने का प्रयास किया।
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प्रो. बघेल ने कहा कि देश को कुरुक्षेत्र की भूमि से धर्म-अधर्म, न्याय-अन्याय, नीति और अनीति के विषय में ज्ञान दिया है, जिसका हमारे देश में नहीं बल्कि पूरे विश्व में अनुसरण किया है। अब तक अधर्म, अन्याय और अनीति हारती आई है। यही सीख संविधान की हत्या करने वालों को भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश में डेमोक्रेसी बहुत ही बड़ी और पुरानी है। देश के पास द्वापर और त्रेता युग का प्रमाण मौजूद है, जबकि अमेरिका के पास स्टैचू ऑफ यूनिटी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका आज खुद की डेमोक्रेसी को सबसे पुराना बता रहा है। अब समय बदल चुका है, उसकी डेमोक्रेसी को भारत के नागरिक चैलेंज करते हैं, क्योंकि सबसे पुरानी और सबसे बड़ी डेमोक्रेसी भारत की रही है और आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारे देश में अब तक दो महिलाएं राष्ट्रपति के पद पर सुशोभित हो चुकी हैं। इस मौके पर भाजपा जिला अध्यक्ष तिजेंदर सिंह गोल्डी, भाजपा नेता जवाहर सैनी, चेयरमैन धर्मवीर मिर्जापुर, उपाध्यक्ष धुमन सिंह किरमच, जिला परिषद चेयरपर्सन कंवलजीत कौर, एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सत्य प्रकाश, आत्मप्रकाश मनचंदा, जिला मीडिया प्रभारी शैलेश वत्स सहित अन्य लोग भी रहे।
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लोकतंत्र पर सिर्फ 19 महीने की इमरजेंसी ही एक काला धब्बा
केंद्रीय राज्य मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि हमारे देश की डेमोक्रेसी पर सिर्फ 19 महीने की इमरजेंसी ही एक काला धब्बा है। यह वो समय है जब देश के नागरिकों को छिप कर रहना पड़ा, दुकानदारों के रोजगार बंद हो गए, किसान अपने खेत में काम नहीं कर सकते थे, जो भी व्यक्ति बाहर मिलता था उसे जेल में बंद कर देते थे। नसबंदियां होती थी, लोगों को बहुत सी यातनाएं सहन करनी पड़ी थी। आपातकाल के दौरान करीब एक लाख 10 हजार लोगों को जेल में बंद किया गया, इनमें पत्रकार भी शामिल रहे। वर्ष 1975 में हमारे देश में तब इनमें से कोई भी कारण नहीं था जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए यह सब किया, जिससे देश पूरी दुनिया में शर्मसार भी हुआ। वे उनके द्वारा किए गए इस निंदनीय कार्यों की पीडीएफ राहुल गांधी को भी भेजेंगे, ताकि उन्हें पता चल सके कि संविधान को किसने खत्म करने का प्रयास किया।
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