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बगैर सर्जरी के किया ऑस्टियोआर्थराइटिस का इलाज
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श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक अस्पताल में ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटनों का दर्द) का आयुर्वेदिक थेरेपी से सफल इलाज किया जा रहा है। बुर्जुगों के साथ नौजवान भी ऑस्टियोआर्थराइटिस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। प्रारंभिक दौर में अगर इस बीमारी के लक्षण पहचान लिया जाए तो इसका इलाज संभव है वरना डॉक्टरों ऑपरेशन की सलाह देते हैं, मगर आयुर्वेदिक अस्पताल में मात्र थेरेपी से इसका बिमारी का इलाज किया जा रहा है।
हरियाणा पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत मथाना वासी गुरचरण सिंह दो साल पहले ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थे। घुटनों में दर्द की वजह से उसको चलने-फिरने और उठने-बैठने में काफी परेशानी होने लगी थी। उन्होंने बताया कि वह स्पोर्ट्स कोटे से हरियाणा पुलिस में भर्ती हुआ था। साल 2020 में जिम में व्यायाम करते समय उनके दोनों घुटनों के एसिएल और लिगामेंट टूट गए थे। शहर और दूसरे प्रांतों के कई बड़े-बड़े चिकित्सकों को दिखाया, मगर सभी ने ऑपरेशन की सलाह दी। वहीं सर्जरी का खर्च भी बहुत ज्यादा था।
उन्हें श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल में ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज का पता चला। पंचकर्म विभाग के डॉक्टरों ने चार महीने पंचकर्म थेरेपी और आयुर्वेदिक औषधियां दी गई। अब उसके दोनों घुटने स्वस्थ हैं पहले की तरह ही व्यायाम भी कर रहा है और खेल भी सकता है। थोड़ी रीढ़ की हड्डी की समस्या हैं डिस्क के रोग का भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज चल रहा है। यह भी 90 प्रतिशत ठीक हो चुका है।
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पंचकर्म विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि घुटनों का दर्द (संधिवात) आम समस्या बनती जा रही है। देश का हर तीसरा व्यक्ति ऑस्टियोआर्थराइटिस की बीमारी से पीड़ित है। महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा मिलती है। गुरचरण सिंह पांच महीने पहले उनके पास इलाज के लिए आए थे। तब उसके घुटने के लिगामेंट पूरी तरह से खत्म हो चुके थे। चार महीने की पंचकर्म थेरेपी और आयुर्वेदिक औषधि लेने से अब वह स्वस्थ है।
बताया कि घुटनों में दर्द के कई लक्षण होते हैं। व्यक्ति के घुटने से आवाज आना, उठने-बैठने में कठिनाई, घुटनों में सूजन और कई बार समस्या इतनी गंभीर होती है कि घुटनों के अंदर के लिगामेंट टूट जाते हैं। इसकी मुख्य वजह बिगड़ती जीवनशैली, लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करना, अत्यधिक वजन उठाना या बिल्कुल काम न करने से घुटनों में दर्द की दिक्कत बढ़ती है। पंचकर्म में रोगी को बस्ती, अग्नि कर्म, लेप और स्वेदन थेरेपी दी जाती हैं जो काफी फायदेमंद सिद्ध हो रही है।हालंकि इस बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी और डी लेना चाहिए।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने कहा कि संस्थान में कुशल डॉक्टरों की मेहनत की बदौलत गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज हो रहा है। हरियाणा सहित दूसरे राज्यों और विदेशों से भी लोग इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। इसका श्रेय संस्थान के डॉक्टरों की मेहनत को जाता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी कई गंभीर बीमारियों पर शोध कर रहे हैं।
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हरियाणा पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत मथाना वासी गुरचरण सिंह दो साल पहले ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित थे। घुटनों में दर्द की वजह से उसको चलने-फिरने और उठने-बैठने में काफी परेशानी होने लगी थी। उन्होंने बताया कि वह स्पोर्ट्स कोटे से हरियाणा पुलिस में भर्ती हुआ था। साल 2020 में जिम में व्यायाम करते समय उनके दोनों घुटनों के एसिएल और लिगामेंट टूट गए थे। शहर और दूसरे प्रांतों के कई बड़े-बड़े चिकित्सकों को दिखाया, मगर सभी ने ऑपरेशन की सलाह दी। वहीं सर्जरी का खर्च भी बहुत ज्यादा था।
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उन्हें श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल में ऑस्टियोआर्थराइटिस के इलाज का पता चला। पंचकर्म विभाग के डॉक्टरों ने चार महीने पंचकर्म थेरेपी और आयुर्वेदिक औषधियां दी गई। अब उसके दोनों घुटने स्वस्थ हैं पहले की तरह ही व्यायाम भी कर रहा है और खेल भी सकता है। थोड़ी रीढ़ की हड्डी की समस्या हैं डिस्क के रोग का भी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से इलाज चल रहा है। यह भी 90 प्रतिशत ठीक हो चुका है।
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पंचकर्म विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा सिंगला ने बताया कि घुटनों का दर्द (संधिवात) आम समस्या बनती जा रही है। देश का हर तीसरा व्यक्ति ऑस्टियोआर्थराइटिस की बीमारी से पीड़ित है। महिलाओं में यह बीमारी ज्यादा मिलती है। गुरचरण सिंह पांच महीने पहले उनके पास इलाज के लिए आए थे। तब उसके घुटने के लिगामेंट पूरी तरह से खत्म हो चुके थे। चार महीने की पंचकर्म थेरेपी और आयुर्वेदिक औषधि लेने से अब वह स्वस्थ है।
बताया कि घुटनों में दर्द के कई लक्षण होते हैं। व्यक्ति के घुटने से आवाज आना, उठने-बैठने में कठिनाई, घुटनों में सूजन और कई बार समस्या इतनी गंभीर होती है कि घुटनों के अंदर के लिगामेंट टूट जाते हैं। इसकी मुख्य वजह बिगड़ती जीवनशैली, लगातार लंबे समय तक बैठकर काम करना, अत्यधिक वजन उठाना या बिल्कुल काम न करने से घुटनों में दर्द की दिक्कत बढ़ती है। पंचकर्म में रोगी को बस्ती, अग्नि कर्म, लेप और स्वेदन थेरेपी दी जाती हैं जो काफी फायदेमंद सिद्ध हो रही है।हालंकि इस बीमारी से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी और डी लेना चाहिए।
आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने कहा कि संस्थान में कुशल डॉक्टरों की मेहनत की बदौलत गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज हो रहा है। हरियाणा सहित दूसरे राज्यों और विदेशों से भी लोग इलाज कराने के लिए आ रहे हैं। इसका श्रेय संस्थान के डॉक्टरों की मेहनत को जाता है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी कई गंभीर बीमारियों पर शोध कर रहे हैं।