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Kurukshetra News: किसानों, वाहन ऋणधारकों और दंपति को लाखों रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश

Fri, 15 May 2026 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Fri, 15 May 2026 03:08 AM IST
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Orders to refund lakhs of rupees with interest to farmers, vehicle loan holders and couples
कुरुक्षेत्र। जिले की अलग-अलग सिविल अदालतों ने तीन अलग-अलग ऋण वसूली मामलों में बैंकों के पक्ष में फैसले सुनाते हुए ऋण लेने वाले लोगों को बकाया राशि ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए हैं।
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अदालतों ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित बैंकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, ऋण समझौते, खाते के प्रमाणित विवरण और गवाहों की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय एवं प्रमाणित हैं। वहीं प्रतिवादियों के अदालत में उपस्थित न होने और दावों का खंडन न करने के कारण बैंक के दावे निर्विवाद साबित हुए। अदालतों ने बैंकों को कानून के अनुसार गिरवी संपत्तियों, हाइपोथिकेटेड वाहनों और अन्य संपत्तियों के माध्यम से वसूली करने की अनुमति भी प्रदान की है।
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केस एक
किसान क्रेडिट कार्ड और गोल्ड लोन मामले में एसबीआई को राहत, 8.28 लाख वसूलने के आदेश
सिविल जज जूनियर डिवीजन रेनू बाला की अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक की ओर से दायर किसान ऋण वसूली मामले में गांव भूस्थला निवासी घनश्याम लाल उर्फ घनश्याम सिंह को 8,28,339 रुपये ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए। मामले के अनुसार घनश्याम लाल ने वर्ष 2011 में एसबीआई की थानेसर शाखा से दो लाख रुपये की किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सीमा तथा दो लाख रुपये का किसान गोल्ड कार्ड कृषि ऋण लिया था। ऋण सुरक्षा के रूप में उसने अपनी 32 कनाल आठ मरला कृषि भूमि बैंक के पास गिरवी रखी थी।
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बैंक ने अदालत में बताया कि किसान ने ऋण समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और समय पर किस्तें जमा नहीं करवाई। कई बार मांग करने तथा 31 अगस्त 2018 को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। अदालत में प्रतिवादी के उपस्थित न होने पर उसे 16 दिसंबर 2022 को एकतरफा घोषित कर दिया गया। अदालत ने कहा कि सभी दस्तावेज यह सिद्ध करते हैं कि प्रतिवादी ने ऋण लिया था और अदायगी करने में विफल रहा। अदालत ने मुकदमा दायर होने की तारीख से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के आदेश भी दिए।
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केस दो
कार लोन डिफॉल्ट मामले में भी एसबीआई के पक्ष में निर्णय

एक अन्य मामले में सिविल जज रेनू बाला की अदालत ने गांव कदमी निवासी दीप कुमार को एसबीआई का 1,39,178 रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए।
रिकॉर्ड के अनुसार दीप कुमार ने वर्ष 2014 में एसबीआई थानेसर शाखा से सीजीटीएसएमई योजना के तहत 4.30 लाख रुपये का ऋण लिया था। यह ऋण टाटा वेंचर वाहन खरीदने के लिए स्वीकृत किया गया था। बैंक ने वाहन की राशि सीधे मेट्रो मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर की थी और वाहन बैंक के पक्ष में हाइपोथिकेट किया गया था।
बैंक ने अदालत को बताया कि आरोपी ने निर्धारित मासिक किश्तें जमा नहीं करवाईं। कई बार मांग करने और 1 अप्रैल 2019 को कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम भुगतान 28 अक्टूबर 2016 को किया गया था। सुनवाई के दौरान दीप कुमार अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसे 12 सितंबर 2019 को एकतरफा घोषित कर दिया गया। अदालत ने बैंक के दावे को साक्ष्यों से सिद्ध मानते हुए आरोपी को बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने के आदेश दिए। साथ ही बैंक को हाइपोथिकेटेड वाहन और अन्य संपत्तियों से वसूली की अनुमति दी गई।
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केस तीन
यूनियन बैंक को भी मिली बड़ी राहत, 2.86 लाख की वसूली का आदेश
सिविल जज जूनियर डिवीजन अनमोल कक्कड़ की अदालत ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर ऋण वसूली मामले में थानेसर के आकाश नगर निवासी राजेश कुमार और उनकी पत्नी माया को संयुक्त रूप से 2,86,436 रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए। मामले के अनुसार दंपति ने 30 अगस्त 2023 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की गीता निकेतन स्कूल शाखा से तीन लाख रुपये का टर्म लोन लिया था। ऋण पर 14.4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज निर्धारित था, जो आरबीआई की रेपो रेट आधारित ईबीएलआर प्रणाली से जुड़ा हुआ था।

बैंक ने अदालत में बताया कि उधारकर्ताओं ने ऋण की नियमित अदायगी नहीं की, जिसके चलते 29 जुलाई 2024 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। कई बार मांग करने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद बैंक ने अदालत में वसूली का मुकदमा दायर किया। सुनवाई के दौरान दोनों प्रतिवादी अदालत में पेश नहीं हुए और 2 जनवरी को उन्हें एकतरफा घोषित कर दिया गया। अदालत ने कहा कि बैंक के मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय हैं तथा प्रतिवादियों की अनुपस्थिति में उनका कोई खंडन नहीं हुआ। अदालत ने दंपति को तीन महीने के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए, अन्यथा बैंक को कानून के अनुसार वसूली की कार्रवाई करने की अनुमति प्रदान की गई।
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