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सन्निहित तीर्थ पर बनीं समाधियों को 20 दिन में हटाने के आदेश

Sun, 28 May 2017 12:00 AM IST
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला Updated Sun, 28 May 2017 12:00 AM IST
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Order to be removed in 20 days of samadhi made on embankment pilgrimage, Kurukshetra
सन्निहित तीर्थ पर बनीं समाधियों को 20 दिन में हटाने के आदेश - फोटो : अमर उजाला

सन्निहित सरोवर तीर्थ के घाटों से सटी ग्रीन बेल्ट में कई दशकों से बनी सैकड़ों समाधियों पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की वक्रदृष्टि पड़ चुकी है। बोर्ड ने इनको 20 दिन के भीतर हटाने का नोटिस बोर्ड समाधि स्थल पर टांग दिया है। अगले दिनों में ये समाधियां यहीं रहेंगी या उठेंगी, इससे पहले वे सैकड़ों परिवार हरकत में आ चुके हैं, जिनके पूर्वजों की समाधियां सन्निहित सरोवर के तट पर हैं।

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इतनी संख्या में ये समाधियां उठकर कहां जाएंगी, इसकी व्यवस्था कैसे होगी ? यह सवाल श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा भी उठा रही है। सभा का कहना है कि इनमें अधिकांश समाधियां इतनी पुरानी हैं कि तब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का भी कोई अस्तित्व नहीं था। इधर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि समाधियां निजी हैं, इन्हें सरकारी भूमि पर नहीं रखा जा सकता।
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सन्निहित सरोवर सहित कुरुक्षेत्र के कई तीर्थ केंद्र सरकार ने कृष्णा सर्किट में शामिल किए हैं। सन्निहित को भव्य रूप देने में यह समाधियां रुकावट बन सकती हैं, लिहाजा केडीबी ने परिवारों से अपील की है कि अपने शहर के तीर्थ को भव्य रूप देने में मददगार बने और बगैर किसी तनाव और विवाद के इस समस्या का हल कराने में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मदद करें। केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा ने बताया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने सन्निहित तीर्थ के सौंदर्यकरण की योजना बनाई है। इस पर करोड़ों रुपये खर्च होगा। इसका लाभ देश-दुनिया से यहां आने वाले लोगों और स्थानीय लोगों को भी मिलेगा।
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उन्होंने दो टूक कहा कि सरकारी भूमि से अगर समाधियां नहीं हटाईं तो 20 दिन बाद सख्ती से कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि केडीबी के अध्यक्ष हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी हैं, जबकि उपाध्यक्ष मुख्यमंत्री मनोहर लाल हैं। बताया जा रहा है कि केडीबी के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद ही समाधि स्थल पर नोटिस बोर्ड लगाया गया है।

विधि विधान और भारी भरकम खर्च से ही बदल सकता है स्थान
एक समाधि को हटाने में भारी भरकम खर्च होता। पंडित पवन शर्मा शास्त्री का कहना है कि सन्निहित तीर्थ पर जो समाधियां बनी हैं, वह कुरुक्षेत्र में रहने वाले हर बिरादरी के उन पुराने लोगों के पूर्वजों की हैं, जिनका युवा अवस्था में अकाल निधन हुआ था,वहीं इनमें कुछ समाधियां सतियों की हैं और इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर पूरे विधि विधान अनुष्ठान के बाद ही ले जाया जा सकता है,इसमें परिवार के सभी सदस्यों का होना और भारी भरकम खर्च होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे कार्यों पर कम से 25 से 50 हजार और बड़े परिवारों का लाखों रुपये खर्च होता है।

सन्निहित के साथ ये पितृ स्थान है आस्था का केंद्र : शर्मा
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के पूर्व अध्यक्ष जयनारायण शर्मा ने समाधियों को तीर्थ स्थल की ग्रीन बेल्ट से हटाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि घाट के निकट जो समाधियां बनी है वो करीब 1200 गज जगह में है। उनका कहना है कि बोर्ड की स्थापना करीब 50 साल पहले हुई, जबकि इनमें कई समाधियां उससे भी बहुत समय पहले की हैं। शर्मा के मुताबिक इन समाधियों को हटाना गलत है,क्योंकि यह पितृ स्थान है। उन्होंने कहा कि शहर के पुराने परिवारों के लिए जितनी आस्था इस सन्निहित तीर्थ में है,उतनी ही यह पितृ स्थान में भी है।   

पर्यटन मंत्री और विधायक के सामने रखेंगे मामला
श्रीब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के अध्यक्ष यशेंद्र शर्मा ने बोर्ड से मांग की है कि वह सन्निहित सरोवर के समाधि स्थल पर लगाए गए नोटिस बोर्ड को तत्काल प्रभाव से हटाए,क्योंकि लोगों में इस समाधि स्थल को हटाने से गुस्सा है। जल्द ही सभा अन्य समुदाय के लोगों से बात करके रणनीति बनाएगी,ताकि पितृस्थान अपनी ही जगह पर कायम रहे। उन्होंने बताया कि मामला विधायक और पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा के समक्ष भी रखा जाएगा।


कुछ लोगों ने समाधिस्थल को बदला
स्थानीय नागरिक राजकुमार शर्मा के मुताबिक उन्होंने और उनके अलावा अन्य कुछ लोगों ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का नोटिस लगाने के बाद सन्निहित से चार समाधियों को पूरे विधि विधान से उठवाया है। इस पर करीब 25 से 30 हजार रुपये खर्च हुए हैं। अगर उन्हें जमीन खरीदनी पड़ती यह खर्च 50 हजार से भी ज्यादा हो सकता था। उन्होंने बताया समाधियों को उठाने में सबसे बड़ी दिक्कत जगह की है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अगर यह समाधियां उठवानी पड़ी तो उन्हें काफी परेशानी होगी।

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