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Kurukshetra News: जर्मन संस्था के अधिकारियों ने देखा प्राकृतिक खेती का मॉडल

Sun, 09 Jun 2024 05:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Sun, 09 Jun 2024 05:49 AM IST
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Officials of German organization saw the model of natural farming
कुरुक्षेत्र। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय और जर्मन एजेंसी फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जीआईजेड) से 16 सदस्यों का एक दल शनिवार को गुरुकुल पहुंचा। इस दल में शामिल अधिकारियों ने कुरुक्षेत्र में केवल प्राकृतिक खेती का जायजा लिया बल्कि गुरुकुल की अत्याधुनिक गोशाला का भी अवलोकन किया। दल में ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के साथ जर्मनी की जीआईजेड संस्था के डायरेक्टर और टेक्निकल विशेषज्ञ भी शामिल रहे। गुरुकुल में पहुंचने पर व्यवस्थापक रामनिवास आर्य और विख्यात कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डाॅ. हरिओम ने उनका स्वागत किया।
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इंडो-जर्मन जैव विविधता परियोजना के तहत पहुंचे दल में शामिल राजीव अहल ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत में प्राकृतिक खेती तथा अग्रिएकोलोजी को लेकर जर्मनी सरकार भारत को सहयोग देगी। इस समझौते को लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और नाबार्ड के साथ मिलकर जर्मनी की जीआईजेड संस्था परियोजना पर कार्य कर रही है जिससे दोनों देशों में कृषि एवं ग्रामीण आजीविका को लेकर सूचनाओं का आदान-प्रदान हो और विकास की नई इबारत लिखी जाए। इसी परियोजना के तहत ग्रामीण विकास मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव चरणजीत सिंह (आईएफएस ), जीआईजेड संस्था के डायरेक्टर राजीव अहल और परियोजना निदेशक उते रिकमैन 16 सदस्यीय दल के साथ गुरुकुल में पहुंचे। उनके साथ वेरा जर्मन अधिकारि के अलावा जयराम किली,राजीव आहूजा , योगिराज शेटे, अनमोल चौहान, आशीर्वाद दास, दीपक चामोला, सुबुही परवेज, पारूल थापा, किम अरोड़ा, दिव्या शर्मा, वैभव शर्मा और हर्षा आदि टेक्निकल टीम के सदस्य शामिल रहे। वहीं रामनिवास आर्य ने गुरुकुल की गोशाला में मौजूद देशी गाय के दुग्ध-क्षमता और उनके रखरखाव के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी। गुरुकुल के फार्म और गोशाला का अवलोकन करने उपरांत उन्होंने कहा कि गुरुकुल के फार्म की तर्ज पर उक्त परियोजना के तहत कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आसाम में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि देश के अधिक से अधिक महिला किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सकें।
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राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक कृषि माडल को जमकर सराहा
गुरुकुल फार्म पर इस दल का ‘मल्चिंग’ और ‘सह-फसलें’ प्रोजेक्ट पर विशेष फोकस रहा। मल्चिंग किस प्रकार से खेती में सहायक है और इसका सही तरीका क्या है। इस बारे डाॅ. हरिओम ने विस्तृत जानकारी दी। साथ ही उन्होंने फार्म पर सेब, आम और लीची के बाग और फलों की गुणवत्ता के बारे में बताया। डाॅ. प्रदीप ने टीम सदस्यों को जीवामृत और घनजीवामृत को बनाने की पूरी प्रक्रिया और उसे खेतों में किस प्रकार और कब-कब डाला जाए इसका पूरा विवरण दिया। सभी सदस्यों ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक कृषि माडल की जमकर प्रशंसा की।
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