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Kurukshetra News: अब महाभारत की धरती से किसानों ने फिर भरी हुंकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 07:56 AM IST
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Now the farmers from the land of Mahabharata once again roared
कुरुक्षेत्र। महाभारत की धरती से किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में रविवार को फिर हुंकार भरी है। विधानसभा चुनाव के बीच पिपली की अनाजमंडी में जुटे किसानों ने बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है, जिससे भाजपा की चुनौती बढ़ सकती है। भले ही भाजपा की ओर से प्रदेश भर में कमल खिलाने व पूर्ण बहुमत से फिर सत्ता में आने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन अब दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए जहां कांग्रेस तैयार है तो वहीं अब किसानों का भी सामना करना पड़ेगा। रविवार को पिपली में हुई महापंचायत में भी न केवल खुला एलान किया गया बल्कि रणनीति भी बनाई गई।
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करीब चार घंटे तक चली महापंचायत में मुख्य तौर पर भाजपा ही निशाने पर रही, जिसमें किसानों ने न केवल अपनी एक-एक मांग पर मंथन किया बल्कि इनको लेकर अब सीधे सवाल किए जाने का भी फैसला लिया गया। किसान नेता गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे कि कैसे वोट के लिए आने वाले नेताओं का सामना करना है। यही नहीं उन्हें एक-एक मांग से फिर अवगत कराते हुए इनका जवाब लिया जाएगा, जिस दौरान वीडियो भी बनाई जाएगी। नेताजी ने सवालों का जवाब नहीं दिया तो उसी अंदाज में वीडियो भी वायरल की जाएगी।
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किसान नेता बोले, साफ लें हिसाब जुमलों में न फंसे, कांग्रेसी नेताओं से भी पूछें

महापंचायत को संबोधित करने वाले अधिकतर किसानों ने भाजपा को ही मुख्य तौर पर निशाने पर रखा तो वहीं सरवन सिंह पंढेर व कुछ किसानों ने यह भी कहा कि उनके लिए सभी पार्टियां एक समान है। किसानों को भाजपा ही नहीं कांग्रेस के नेताओं से भी सीधे सवाल करने हैं। भाजपा नेताओं से पूछना होगा कि फसलों की एमएसपी पर खरीद गारंटी कानून क्यों नहीं लाया गया। लखीमपुर खीरी कांड के दोषियों को सजा क्यों नहीं मिल पाई। बार्डर पर किसानों को क्यों रोका गया, आंदोलन कर रहे किसानों पर गोलियां क्यों चलाईं गईं। यही नहीं कई अन्य सवाल भी होंगे। वादे करने के बाद भी मुकर क्यों गए। अब आगे मांगें पूरी करने पर क्या गारंटी है। वहीं कांग्रेस नेताओं से भी पूछा जाएगा कि किसानों की मांगों पर उनका क्या रवैया है। किसान कैसे यकीन करें कि वे उनकी मांगें पूरी कर करेंगे। किसान नेताओं ने आह्वान किया कि वे जुमलों में न फंसें और सीधी टक्कर लें।
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बिखरे हुए नेताओं को एकजुट कर बढ़ाया जाएगा आंदोलन

अपनी-अपनी विचारधारा के चलते बिखरे किसान संगठनों को भी एकजुट करने का प्रयास किया जाएगा। सरवन सिंह पंढेर का कहना था कि तीन अक्तूबर को रेलवे ट्रैक जाम करने से पहले ही यह प्रयास किए जाएंगे। इस आंदोलन में देश के सभी किसान संगठनों की भागीदारी के प्रयास होंगे। जो किसान संगठन राजनीतिक मैदान में उतर चुके हैं उनसे दूरी रखी जाएगी जबकि गैर राजनीतिक संगठनों को एक साथ किया जाएगा, क्योंकि किसान पूरे देश का एक ही है और सभी की अधिकतर मांगें भी एक जैसी ही है। सभी को साथ लेकर मजबूती के साथ अगला आंदोलन चलाया जाएगा।




इन्होंने भी किया संबोधित
भाकियू शहीद भगत सिंह के प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत सिंह मोहड़ी, अभिमन्यु कुहाड़, मनजीत राय, सतनाम सिंह, प्रीतपाल सिंह, जसविंद्र सिंह लोंगोवाल, नवदीप जलबेहड़ा, सतीश कुमार, हरजिंद्र कौर, सुरजीत सिंह, गुरअमनीत सिंह, गुरप्रीत सिंह, संजीव आलमपुर, संजू नंबरदार, जयभगवान काला। संवाद
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