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अब यूक्रेन में फंसे भारतीयों के सामने उत्पन्न हुआ खाने-पीने, रहने के साथ जीने का संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 01:29 AM IST
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Now the crisis of food and drink, living with living arose in front of Indians trapped in Ukraine
यूक्रेन के डेनीपरो हॉस्टल में फंसे भारतीय छात्र। - फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। यूक्रेन में हालात बद से बदतर हो गए हैं। वहां फंसे भारतीयों के सामने खाने-पीने, रहने सहित अन्य संकट पैदा हो गए हैं। आने वाले दिनों में यूक्रेन में राशन की भारी कमी होने वाली है। यह कहना है कि यूक्रेन से गांव कमोदा लौटे मोहित शर्मा का।
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यूक्रेन के डेनीपरों से 18 फरवरी को गांव कमोदा लौटे मोहित शर्मा ने बताया कि रूसी सेना की कार्रवाई से पहले ही इजराइल, इजिप्ट, नाइजीरिया, अमेरिका सहित अन्य देशों की सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से निकाल लिया था। इन देशों के दूतावास से उनके नागरिकों को नोटिस भी दिए गए थे। भारतीय दूतावास की ओर से कोई नोटिस नहीं दिया गया। भारत सरकार की इस चूक का नतीजा वहां फंसे भारतीय भुगत रहे हैं।
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मोहित ने बताया कि उसकी अपने सहपाठी दोस्तों से लगातार बातचीत हो रही है। डेनीपरो शहर यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब 200 किमी दूर है। मोहित के अनुसार दोपहर को हुई बातचीत में जींद वासी सचिन ने उसे बताया कि उनके पास केवल दो-तीन दिन का राशन बचा है। उनका पूरा ग्रुप हॉस्टल में ठहरा हुआ है। गोलाबारी भी चल रही है। हालांकि राहत की बात यह है कि हॉस्टल के आसपास यूक्रेन की सेना ने मोर्चा संभाला है।
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मोहित ने बताया कि वह डेनीपरो मेडिकल अकादमी से एमबीबीएस कर रहा है। यह उसका चौथा साल है। हालात खराब होने से पहले उसके परिजनों ने जिद करके उसे वापस बुला लिया था। अभी उसके कई दोस्त डेनीपरो शहर में ही फंसे हैं।
कब पहुंचेगी मदद, कुछ नहीं पता
ज्योति नगर के रहने वाले यशपाल बंसल ने बताया कि वह हर आधे घंटे बाद अपने बेटे रमन से वीडियो कॉल पर बातचीत कर रहे हैं। सरकार उनकी कोई बात नहीं सुन रही है, जबकि उनके बच्चे यूक्रेन में डर के साए में रह रहे हैं। रमन के अनुसार रोमानिया सहित बॉर्डर क्षेत्र के आसपास फंसे भारतीयों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कीव और आसपास फंसे लोगों तक मदद कब पहुंचेगी, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। वे भगवान से बच्चों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

मेट्रो स्टेशन बंकर में नहीं बची ठहरने की जगह
संजीव जुल्का ने बताया उनका भतीजा अपने दोस्तों के साथ खारकीव में अपने हॉस्टल में रुका है। शाम को वे हॉस्टल से आधा किमी दूर बंकर में ठहरते हैं, वहां कोई सुविधा नहीं है और बैठकर ही रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं। मेट्रो स्टेशन बंकर में रहने की जगह नहीं है, क्योंकि दूरदराज क्षेत्र रह रहे भारतीयों को वहां शरण दी गई है।
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