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नोटबंदी ने बांधे पुलिस के हाथ, जांच प्रभावित
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:25 AM IST
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नोटबंदी ने बांधे पुलिस के हाथ, जांच प्रभावित
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के बाद आम लोगों, बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के अलावा पुलिस की परेशानी भी बढ़ी हुई है। नोट बंदी के पुराने नोट जमा कराने से लेकर नए नोट लेने तक की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा पुलिस विभाग परेशानी में हैं। नोट बदलने और जमा कराने के लिए बैंकों में लगी लंबी कतारों के दौरान विवाद न होने देने से लेकर दिन में करीब दो दो बार लाखों रुपये बैंकों तक पहुंचाने के लिए भी पुलिसकर्मियों का साथ लिया जा रहा है। ऐसे में कई बड़े मामलों की जांच भी प्रभावित हो रही है। पुलिस विभाग को लगी नोट की चोट में यह मामले भी फिलहाल अटके हुए हैं। खास बात यह है कि पिछले दिनों हुई बैंक डकैती की जांच भी इसके चलते प्रभावित हो रही है। जिले में फिलहाल काम कर रहे कुल 950 पुलिसकर्मियों में करीब 300 की ड्यूटी नोटबंदी के बाद से ही बैंकों पर लगाई गई है। जिससे जिले की पुलिस को स्टाफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 1174 पद हैं। इनमें से कई डेप्यूटेशन पर अन्य सुरक्षा या सतर्कता विभागों में डेप्यूटेशन पर हैं। तो कई अलटर्नेट ट्रेनिंग सेशन के लिए बाहर रहते हैं। इस लिहाज से जिले के सभी थानों में कुल 950 पुलिसकर्मी ही मौजूद हैं। इनमें डीएसपी से लेकर सिपाही तक शामिल हैं। ऐसे में पहले से ही स्टाफ की कमी झेल रहे पुलिस विभाग की परेशानी 8 नवंबर से और ज्यादा बढ़ गई है। नोटबंदी के दिन से लेकर अभी तक साढ़े नौ में से 290 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी नियमित रूप से बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था में लगे हैं। ऐसे में पुलिस के अपने काम और जांच के लिए स्टाफ की कमी और ज्यादा बढ़ गई है। ऐेसे में पुराने मामलों की जांच भी प्रभावित हो गई।
यहां लगे हैं इतने पुलिसकर्मी
कुरुक्षेत्र में पांच ऐसे बैंक हैं जहां जिले के अन्य बैंकों का कलेक्शन रखा जाता है। यानी इन पांच बैंकों में हर दिन करोड़ों रुपये रखे होते हैं। इन रुपयों की सुरक्षा के लिए बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था के इतर पांच पांच पुलिसकर्मी भी लगाए गए हैं। यानी पांच बैंकों में ही हर समय 25 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। इसके अलावा 13 अन्य बैंकों की मुख्य शाखाओं में भी तीन-तीन पुलिसकर्मियों यानी 39 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। छोटे बैंकों, डाक घरों और छोटे बैंकों की शाखाओं में सुबह से ही एक एक पुलिसकर्मी तैनात रखा जाता है। जो बैंक खुले रहने तक तैनात होता है।
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पीसीआर और राइडर्स को भी नहीं चैन
पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती के साथ ही पीसीआर और राइडर्स को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। हर थाना क्षेत्रों की पीसीआर बैंक समय तक यानी शाम पांच बजे तक बैंकों के आसपास ही राउंड लगाती है। इसके अलावा रात में राइडर्स भी बैंकों के आसपास ही होते हैं।
आरबीआई कैश वैन के साथ लगता है जाप्ता
जिले से कैश इधर उधर लाने ले जाने के लिए भी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। कैश वैन के साथ पुलिसकर्मियों को भी जाना पड़ता है। इसके अलावा जब आरबीआई की कैश वैन आती है तब दस-दस पुलिसकर्मियों के अलावा पीसीआर भी भेजी जाती है। ऐसे में पुलिस का ज्यादातर स्टाफ फिलहाल नोटों की सुरक्षा में ही लगा हुआ है।
छुट्टियां भी कैंसल
पुलिस वालों का दर्द यह है कि उनकी छुट्टियां भी कैंसल कर दी गई है। जब तक नोट के लिए मारामारी खत्म नहीं होती पुलिसकर्मियों को छुट्टी भी नहीं मिलेगी। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि हमारे घर के काम भी पेंडिंग हो गए हैं। नजदीकी रिश्तेदारों के यहां शादियां निकली है, लेकिन हम नहीं जा पाए।
यह है स्थिति
पुलिस विभाग में फिलहाल स्टाफ की कमी हैं। जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ी है, उस हिसाब से पुलिस विभ्ज्ञाग में भर्ती नहीं हुई। ऐसे में कुरुक्षेत्र में एक एक आईओ के पास दस दस केस की जांच हैं। बैंक डकैती की जांच का जिम्मा हालांकि सीआईए की टीम कर रही है, लेकिन बैंकों की ड्यूटी के चलते यह जांच भी पेंडिंग हो गई है। इसके अलावा मारपीट दुर्घटना सहित कई अन्य मामलों की जांच भी प्रभावित हुई है।
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पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में कुल 1174 पद हैं। इनमें से कई डेप्यूटेशन पर अन्य सुरक्षा या सतर्कता विभागों में डेप्यूटेशन पर हैं। तो कई अलटर्नेट ट्रेनिंग सेशन के लिए बाहर रहते हैं। इस लिहाज से जिले के सभी थानों में कुल 950 पुलिसकर्मी ही मौजूद हैं। इनमें डीएसपी से लेकर सिपाही तक शामिल हैं। ऐसे में पहले से ही स्टाफ की कमी झेल रहे पुलिस विभाग की परेशानी 8 नवंबर से और ज्यादा बढ़ गई है। नोटबंदी के दिन से लेकर अभी तक साढ़े नौ में से 290 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी नियमित रूप से बैंकों में सुरक्षा व्यवस्था में लगे हैं। ऐसे में पुलिस के अपने काम और जांच के लिए स्टाफ की कमी और ज्यादा बढ़ गई है। ऐेसे में पुराने मामलों की जांच भी प्रभावित हो गई।
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यहां लगे हैं इतने पुलिसकर्मी
कुरुक्षेत्र में पांच ऐसे बैंक हैं जहां जिले के अन्य बैंकों का कलेक्शन रखा जाता है। यानी इन पांच बैंकों में हर दिन करोड़ों रुपये रखे होते हैं। इन रुपयों की सुरक्षा के लिए बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था के इतर पांच पांच पुलिसकर्मी भी लगाए गए हैं। यानी पांच बैंकों में ही हर समय 25 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। इसके अलावा 13 अन्य बैंकों की मुख्य शाखाओं में भी तीन-तीन पुलिसकर्मियों यानी 39 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। छोटे बैंकों, डाक घरों और छोटे बैंकों की शाखाओं में सुबह से ही एक एक पुलिसकर्मी तैनात रखा जाता है। जो बैंक खुले रहने तक तैनात होता है।
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पीसीआर और राइडर्स को भी नहीं चैन
पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती के साथ ही पीसीआर और राइडर्स को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। हर थाना क्षेत्रों की पीसीआर बैंक समय तक यानी शाम पांच बजे तक बैंकों के आसपास ही राउंड लगाती है। इसके अलावा रात में राइडर्स भी बैंकों के आसपास ही होते हैं।
आरबीआई कैश वैन के साथ लगता है जाप्ता
जिले से कैश इधर उधर लाने ले जाने के लिए भी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। कैश वैन के साथ पुलिसकर्मियों को भी जाना पड़ता है। इसके अलावा जब आरबीआई की कैश वैन आती है तब दस-दस पुलिसकर्मियों के अलावा पीसीआर भी भेजी जाती है। ऐसे में पुलिस का ज्यादातर स्टाफ फिलहाल नोटों की सुरक्षा में ही लगा हुआ है।
छुट्टियां भी कैंसल
पुलिस वालों का दर्द यह है कि उनकी छुट्टियां भी कैंसल कर दी गई है। जब तक नोट के लिए मारामारी खत्म नहीं होती पुलिसकर्मियों को छुट्टी भी नहीं मिलेगी। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ पुलिसकर्मियों ने बताया कि हमारे घर के काम भी पेंडिंग हो गए हैं। नजदीकी रिश्तेदारों के यहां शादियां निकली है, लेकिन हम नहीं जा पाए।
यह है स्थिति
पुलिस विभाग में फिलहाल स्टाफ की कमी हैं। जिस हिसाब से जनसंख्या बढ़ी है, उस हिसाब से पुलिस विभ्ज्ञाग में भर्ती नहीं हुई। ऐसे में कुरुक्षेत्र में एक एक आईओ के पास दस दस केस की जांच हैं। बैंक डकैती की जांच का जिम्मा हालांकि सीआईए की टीम कर रही है, लेकिन बैंकों की ड्यूटी के चलते यह जांच भी पेंडिंग हो गई है। इसके अलावा मारपीट दुर्घटना सहित कई अन्य मामलों की जांच भी प्रभावित हुई है।