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दूतावास और सरकार से नहीं मिल रही सहायता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 01:32 AM IST
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Not getting help from embassy and government, Kurukshetra
वीडियो कॉल से यूक्रेन के हालातों की जानकारी लेते रमन बंसल। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। खारकीव (यूक्रेन) में भारतीय छात्रों पर वीरवार की रात बेहद भारी गुजरी। उनको पूरी रात मेट्रो स्टेशन के बंकर में गुजारनी पड़ी। छात्र भारतीय दूतावास और सरकार पर कोई मदद नहीं मिलने के आरोप भी लगा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार उनको हंगरी और पोलैंड बॉर्डर तक आने के लिए मजबूर कर रही है। खारकीव से दोनों देश का बॉर्डर 1200 किलोमीटर दूर है।
व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिये बातचीत करते हुए ज्योति नगर के रहने वाले रमन बंसल ने बताया रात तीन बजे के आसपास अचानक खारकीव जोरदार धमाके से दहल गया। इससे सभी एकदम तनाव की स्थिति में आ गए। उसके बाद सब लोगों का एक-एक लम्हा बेहद लंबा गुजरा। उसके बाद भी रुक-रुककर बमबारी होती रही। यहां की सरकार ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। किसी को कहीं भी आने-जाने की मनाही है। स्थानीय प्रशासन से भी किसी तरह की कोई मदद नहीं मिल रही है। वहीं क्षेत्र में बर्फबारी के कारण ठंड बेहद बढ़ गई है। बर्फ पड़ने से बंकर में ठहरे लोग ठंड के कारण पलायन करने लगे हैं।
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हरियाणा सरकार से मांगी मदद, मिला आश्वासन : रमन
रमन ने बताया हरियाणा सरकार की ओर से जारी लिंक पर उन्होंने बातचीत की थी। यहां से भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। बस प्रतीक्षा करने और जहां रुके हैं, वहीं रुकने का कहा गया। वहीं भारत सरकार उनको खारकीव से 1200 किलोमीटर दूर पोलैंड और हंगरी बॉर्डर तक आने के लिए मजबूर कर रही है। एक टैक्सी चालक में 80 हजार रुपये में चार लोगों को पोलैंड बॉर्डर पहुंचाने का दावा किया था, मगर रास्ते मे कोई समस्या होने पर जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।
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एजेंट ने दिया धोखा : सुनील धवन
छोटा बाजार वासी सुनील धवन ने बताया कि उसकी बेटी नौ दिसंबर 2021 को एमबीबीएस करने खारकीव की वीएन कराजिन यूनिवर्सिटी गई थी। उसे हॉस्टल के बंकर में रोका गया है। हॉस्टल के कमरे में रुकने की किसी को इजाजत नहीं है। रात को लाइट जलाने की भी इजाजत नहीं है। मोबाइल की रोशनी में खाना पका रहे हैं। उनकी बेटी स्थिति बिगड़ने से पहले ही भारत वापस आ गई होती, लेकिन टीआरसी न मिलने के कारण वह लौट नही पाई। इसे अपडेट करने के लिए उन्होंने एजेंट को साढ़े नौ सौ अमेरिकी डॉलर दिए थे, अब एजेंट उनकी कॉल नहीं उठा रहा है। हालांकि अब बेटी की 27 फरवरी की टिकट बुक है, अब वहां कर्फ्यू जैसा माहौल है।

फोन पर बेटी से बात करते सुनील धवन।  संवाद

फोन पर बेटी से बात करते सुनील धवन। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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