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कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं
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केयू के सीनेट हॉल में कार्यक्रम को संबोधित करते पूर्व छात्र बिशू पराजुली। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। अपने क्षेत्र में ईमानदारी और समर्पण के साथ करके ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। किसी को भी सफलता का सपना नहीं देखना चाहिए, बल्कि सफल होने के लिए कार्य करना चाहिए। ये बातें संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के कंट्री निदेशक एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 1979-81 बैच के पूर्व छात्र बिशू पराजुली ने कहीं।
वे बुधवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं एलुमनी एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सातवें अतिथि व्याख्यान श्रृंखला में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। छात्रों के लिए कार्य और कॅरिअर की संभावनाएं विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि भूख अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अधिक हल करने वाली समस्या है। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा विश्व के गरीब देशों के भूखे लोगों के लिए कार्य कर 30 करोड़ की कमी लाने का कार्य किया है। उन्होंने अपने अनुभव विद्यार्थियों से साझा किया।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पूर्व छात्रों के कारण विश्वविद्यालय की विश्व स्तर पर पहचान है। उन्होंने कहा कि केयू के लिए यह गर्व की बात है कि पूर्व छात्र बिशू पराजुली संयुक्त राष्ट्र (संयुक्त राष्ट्र) विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, जिसे 2020 के लिए प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि मानवता एवं समाज के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय यूएन के विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ हर स्तर पर कार्य करने के लिए तैयार है।
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डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजूला चौधरी ने विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के पाठ्यक्रमों के क्रियान्वयन की बात की। वहीं यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की अध्यक्ष प्रो. निर्मला चौधरी ने अतिथियों को स्वागत किया। संचालन डॉ. अजय सोलखे ने किया। इस अवसर पर डॉ. सरिका यूनिस, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. एमके जैन, प्रो. डीडी अरोड़ा, प्रो. आरके जैन, प्रो. रविभूषण, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. शुचिस्मिता, डॉ. कंवल गर्ग, सौरभ चौधरी व डॉ. अजय सुनेजा मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। अपने क्षेत्र में ईमानदारी और समर्पण के साथ करके ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। किसी को भी सफलता का सपना नहीं देखना चाहिए, बल्कि सफल होने के लिए कार्य करना चाहिए। ये बातें संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के कंट्री निदेशक एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 1979-81 बैच के पूर्व छात्र बिशू पराजुली ने कहीं।
वे बुधवार को विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं एलुमनी एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सातवें अतिथि व्याख्यान श्रृंखला में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे। छात्रों के लिए कार्य और कॅरिअर की संभावनाएं विषय पर आयोजित व्याख्यान में उन्होंने कहा कि भूख अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अधिक हल करने वाली समस्या है। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा विश्व के गरीब देशों के भूखे लोगों के लिए कार्य कर 30 करोड़ की कमी लाने का कार्य किया है। उन्होंने अपने अनुभव विद्यार्थियों से साझा किया।
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कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि पूर्व छात्रों के कारण विश्वविद्यालय की विश्व स्तर पर पहचान है। उन्होंने कहा कि केयू के लिए यह गर्व की बात है कि पूर्व छात्र बिशू पराजुली संयुक्त राष्ट्र (संयुक्त राष्ट्र) विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) टीम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं, जिसे 2020 के लिए प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि मानवता एवं समाज के कल्याण के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय यूएन के विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ हर स्तर पर कार्य करने के लिए तैयार है।
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डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. मंजूला चौधरी ने विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के पाठ्यक्रमों के क्रियान्वयन की बात की। वहीं यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की अध्यक्ष प्रो. निर्मला चौधरी ने अतिथियों को स्वागत किया। संचालन डॉ. अजय सोलखे ने किया। इस अवसर पर डॉ. सरिका यूनिस, प्रो. अनिल मित्तल, प्रो. एमके जैन, प्रो. डीडी अरोड़ा, प्रो. आरके जैन, प्रो. रविभूषण, प्रो. ब्रजेश साहनी, प्रो. शुचिस्मिता, डॉ. कंवल गर्ग, सौरभ चौधरी व डॉ. अजय सुनेजा मौजूद रहे।