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बाबैन में स्कूल मर्ज करने की कोई योजना नहीं : इंदु कौशिक
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कुरुक्षेत्र। बाबैन खंड के सरकारी स्कूलों को मर्ज किए जाने की चर्चाओं के बीच जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी इंदु कौशिक ने स्पष्ट किया है कि जिले के किसी भी प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालय को बंद करने अथवा किसी अन्य स्कूल में विलय करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ कर्मचारी और अध्यापक संगठनों द्वारा जताई जा रही आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं।
इंदु कौशिक ने कहा कि इसके विपरीत सरकार और शिक्षा विभाग बाबैन खंड के विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाबैन प्रदेश का पहला शैक्षणिक खंड है जहां विद्यार्थियों के आवागमन के लिए विशेष रूप से रोडवेज बसों की व्यवस्था की गई है। इसी खंड से 21 मई को विद्यार्थी परिवहन सुरक्षा योजना-2 का शुभारंभ भी किया गया था।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं यहां विद्यार्थियों को एलईडी टीवी और सेट टॉप बॉक्स वितरित किए थे। इसके अलावा कई प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों, अध्यापकों और कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में विभाग का सहयोग करें।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होना चिंता का विषय जरूर है लेकिन इसके लिए अध्यापकों, अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और ग्राम पंचायतों को मिलकर सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सुविधाओं और अध्यापकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। ट्रांसफर ड्राइव पूरी होने के बाद शिक्षकों की उपलब्धता सामान्य हो जाएगी। तब तक जरूरत वाले स्कूलों में नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
अध्यापक संघ इसको लेकर आपत्ति जता चुका
बाबैन में विद्यालय अध्यापक संघ ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मुद्दे को उठा रहा हैं। शुक्रवार को अध्यापक संघ ने बैठक कर कहा था कि सरकार बाबैन और निसंग के स्कूलों को मर्ज करने जा रहा हैं, जो ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला हैं।
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इंदु कौशिक ने कहा कि इसके विपरीत सरकार और शिक्षा विभाग बाबैन खंड के विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाबैन प्रदेश का पहला शैक्षणिक खंड है जहां विद्यार्थियों के आवागमन के लिए विशेष रूप से रोडवेज बसों की व्यवस्था की गई है। इसी खंड से 21 मई को विद्यार्थी परिवहन सुरक्षा योजना-2 का शुभारंभ भी किया गया था।
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उन्होंने बताया कि गत वर्ष मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं यहां विद्यार्थियों को एलईडी टीवी और सेट टॉप बॉक्स वितरित किए थे। इसके अलावा कई प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों, अध्यापकों और कर्मचारी संगठनों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में विभाग का सहयोग करें।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने कहा कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होना चिंता का विषय जरूर है लेकिन इसके लिए अध्यापकों, अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों और ग्राम पंचायतों को मिलकर सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सुविधाओं और अध्यापकों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। ट्रांसफर ड्राइव पूरी होने के बाद शिक्षकों की उपलब्धता सामान्य हो जाएगी। तब तक जरूरत वाले स्कूलों में नियमानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
अध्यापक संघ इसको लेकर आपत्ति जता चुका
बाबैन में विद्यालय अध्यापक संघ ग्रामीणों के साथ मिलकर इस मुद्दे को उठा रहा हैं। शुक्रवार को अध्यापक संघ ने बैठक कर कहा था कि सरकार बाबैन और निसंग के स्कूलों को मर्ज करने जा रहा हैं, जो ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के अधिकार पर सीधा हमला हैं।