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Kurukshetra News: समागम में गुरबाणी से संगत को किया निहाल
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शाहाबाद। समागम में कीर्तन जत्थे को सिरोपा देकर सम्मानित करते प्रधान सुखचैन सिंह। विज्ञप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी दिवस को समर्पित सजाए जा रहे गुरमत समागम की लड़ी में तीसरे दिन भी संगत की भारी उपस्थिति रही।
संगत ने बानी गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष नतमस्तक होकर गुरबाणी का रसपान किया। तीसरे दिन बीबा कंवलजीत कौर मस्कीन जत्था, भाई गुरजोत सिंह जत्था और हजूरी रागी पवनदीप सिंह जत्था ने कीर्तन कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। प्रसिद्ध कथावाचक ज्ञानी साहिब सिंह ने पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के जीवन, उनकी शिक्षाओं और शहादत की विस्तृत कथा संगत को सुनाई।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु साहिब ने अत्यंत कठिन यातनाओं को सहते हुए भी सच्चाई, धर्म और मानवता की राह नहीं छोड़ी। उन्होंने ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी की शहादत केवल सिख इतिहास की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की महानतम घटनाओं में से एक है। उन्होंने सिख धर्म की नींव को शहादत के अमूल्य योगदान से सुदृढ़ किया और यह संदेश दिया कि सच्चाई और न्याय के लिए अपना सब कुछ बलिदान किया जा सकता है। समागम के अंत में ग्रंथी सुबेग सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष सरबत के भले की अरदास की।
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शाहाबाद। गुरुद्वारा श्री गुरु नानक दरबार में श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के शहीदी दिवस को समर्पित सजाए जा रहे गुरमत समागम की लड़ी में तीसरे दिन भी संगत की भारी उपस्थिति रही।
संगत ने बानी गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष नतमस्तक होकर गुरबाणी का रसपान किया। तीसरे दिन बीबा कंवलजीत कौर मस्कीन जत्था, भाई गुरजोत सिंह जत्था और हजूरी रागी पवनदीप सिंह जत्था ने कीर्तन कर संगत को गुरु इतिहास से जोड़ा। प्रसिद्ध कथावाचक ज्ञानी साहिब सिंह ने पंचम पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के जीवन, उनकी शिक्षाओं और शहादत की विस्तृत कथा संगत को सुनाई।
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उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु साहिब ने अत्यंत कठिन यातनाओं को सहते हुए भी सच्चाई, धर्म और मानवता की राह नहीं छोड़ी। उन्होंने ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी की शहादत केवल सिख इतिहास की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की महानतम घटनाओं में से एक है। उन्होंने सिख धर्म की नींव को शहादत के अमूल्य योगदान से सुदृढ़ किया और यह संदेश दिया कि सच्चाई और न्याय के लिए अपना सब कुछ बलिदान किया जा सकता है। समागम के अंत में ग्रंथी सुबेग सिंह ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के समक्ष सरबत के भले की अरदास की।
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