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भारत के प्राचीन गौरव को पुन: स्थापित करेगी नई शिक्षा नीति: आचार्य देवव्रत
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New education policy will restore the ancient glory of India
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। नई शिक्षा नीति 2020 भारत के प्राचीन गौरव को पुन: स्थापित करेगी। इस शिक्षा नीति में आत्मनिर्भर भारत के विजन को ध्यान में रखते हुए यह लक्ष्य रखा गया है कि हर एक विद्यार्थी अपनी स्कूली शिक्षा के साथ कौशल प्राप्त करे। मात्र अक्षरज्ञान न देकर छात्रों को उत्तम स्वास्थ्य व उच्च संस्कार देने पर भी बल दिया गया जो वर्तमान समय की जरूरत भी है।
यह बात सोमवार को गुजरात के राज्यपाल एवं गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल के सभागार में नई शिक्षा नीति पर आधारित कार्यक्रम में कही। आचार्य देवव्रत ने कहा कि जिस संस्कारयुक्त शिक्षा के बल पर भारतवर्ष विश्व-गुरु कहलाया और आर्थिक दृष्टि से सोने की चिड़िया कहलाता था आज उसी शिक्षा पद्धति को नव स्वरूप प्रदान करने की आवश्यकता है क्योंकि संस्कारवान व्यक्ति ही धन का सदुपयोग कर सकता है। बिना संस्कारों के व्यक्ति शिक्षित होते हुए भी कुपथ गामी बन सकता है। वह अपने जीवन के साथ अपने परिवार का जीवन भी अंधकारमय बना सकता है।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की युवा पीढ़ी उस राष्ट्र के निर्माण का आधार होती है। संस्कार युक्त एवं रोजगारपरक शिक्षा पद्धति युवा पीढ़ी में संपूर्णता का भाव पैदा करती है जिसकी आज के आधुनिक भारत को महती आवश्यकता है। बाल्यकाल से ही बच्चे के कोरे मस्तिष्क एवं मन पटल पर माता-पिता एवं गुरुजनों द्वारा किये गये प्रत्येक व्यवहार की अमिट छाप रहती है। आंग्ल विद्वान सिग्मन फ्राइड की चर्चा पर कहा कि एक प्रौढ़ व्यक्ति की तुलना में बच्चे ज्यादा तेजी से अपने आसपास की गतिविधियों को सीखते हैं। गुरुकुल के निदेशक एवं प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता ने कहा नई शिक्षा पद्धति को लागू करने के लिए छात्र बेहद उत्साह है। गुरुकुल नई शिक्षा नीति संबंधित सभी बिंदुओं पर पूरी निष्ठा व ईमानदारी से पालन करेंगे। इस मौके पर गुरुकुल प्रधान कुलवंत सिंह सैनी, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य सहित छात्र मौजूद रहे।
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यह बात सोमवार को गुजरात के राज्यपाल एवं गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने गुरुकुल के सभागार में नई शिक्षा नीति पर आधारित कार्यक्रम में कही। आचार्य देवव्रत ने कहा कि जिस संस्कारयुक्त शिक्षा के बल पर भारतवर्ष विश्व-गुरु कहलाया और आर्थिक दृष्टि से सोने की चिड़िया कहलाता था आज उसी शिक्षा पद्धति को नव स्वरूप प्रदान करने की आवश्यकता है क्योंकि संस्कारवान व्यक्ति ही धन का सदुपयोग कर सकता है। बिना संस्कारों के व्यक्ति शिक्षित होते हुए भी कुपथ गामी बन सकता है। वह अपने जीवन के साथ अपने परिवार का जीवन भी अंधकारमय बना सकता है।
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आचार्य देवव्रत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की युवा पीढ़ी उस राष्ट्र के निर्माण का आधार होती है। संस्कार युक्त एवं रोजगारपरक शिक्षा पद्धति युवा पीढ़ी में संपूर्णता का भाव पैदा करती है जिसकी आज के आधुनिक भारत को महती आवश्यकता है। बाल्यकाल से ही बच्चे के कोरे मस्तिष्क एवं मन पटल पर माता-पिता एवं गुरुजनों द्वारा किये गये प्रत्येक व्यवहार की अमिट छाप रहती है। आंग्ल विद्वान सिग्मन फ्राइड की चर्चा पर कहा कि एक प्रौढ़ व्यक्ति की तुलना में बच्चे ज्यादा तेजी से अपने आसपास की गतिविधियों को सीखते हैं। गुरुकुल के निदेशक एवं प्राचार्य कर्नल अरुण दत्ता ने कहा नई शिक्षा पद्धति को लागू करने के लिए छात्र बेहद उत्साह है। गुरुकुल नई शिक्षा नीति संबंधित सभी बिंदुओं पर पूरी निष्ठा व ईमानदारी से पालन करेंगे। इस मौके पर गुरुकुल प्रधान कुलवंत सिंह सैनी, सह प्राचार्य शमशेर सिंह, मुख्य संरक्षक संजीव आर्य सहित छात्र मौजूद रहे।
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