{"_id":"69ea89abbe616b900a09ba51","slug":"natural-farming-is-the-only-way-to-avoid-diseases-acharya-devvrat-kurukshetra-news-c-45-1-kur1009-153784-2026-04-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक खेती : आचार्य देवव्रत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीमारियों से बचने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक खेती : आचार्य देवव्रत
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम में संबोधित करते गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। गुजरात के राज्यपाल एवं गुरुकुल के संरक्षक आचार्य देवव्रत ने कहा कि विश्व में आर्य समाज ही ऐसा संगठन है जिसने समाज को जोड़ने और आपसी सौहार्द का वातावरण बनाकर सही दिशा देने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के नियम में मुख्य रूप से कहा है कि प्रत्येक को केवल अपनी ही उन्नति में प्रसन्न नहीं होना चाहिए बल्कि सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। परमार्थ का इससे बड़ा उदाहरण दुनिया में कहीं और नहीं मिल सकता।
वे गुरुकुल के सभागार में कार्यक्रम के दौरान आर्यसमाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि आर्यसमाज ने हमेशा कुरीतियों को दूर करने का सफल प्रयास किया। समस्या का समाधान तलाशना आर्य समाज का मुख्य कार्य रहा है। भारतीय ऋषि परंपरा में दूसरों के दुःख को अपना समझना और समाज में आपसी भाईचारे का वातावरण स्थापित करना ही मानवता कहलाता है। प्राकृतिक खेती के संदर्भ में कहा कि समाज में नैतिक मूल्य, संस्कारों के साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना भी जरूरी है। रासायनिक खेती ने पर्यावरण, जल और भूमि को नुकसान पहुंचाकर मनुष्य शरीर को बीमारियों का घर बना दिया है। उन्होंने कहा कि इससे बचने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक खेती।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जीवनदायिनी कृषि पद्धति है जिससे आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण, पोष्टिक आहार, शुद्ध जल और मित्र जीवों की सौगात उपलब्ध होगी। आर्यजनों से आह्वान किया कि हवन और सत्संग से युवाओं को संस्कारवान बनाने का पुनीत कार्य किया जा रहा है। किसानों को जनहित में प्राकृतिक खेती को मिशन के रूप में अपनाना चाहिए। गोमाता का संरक्षण, भूमिगत जल में सुधार और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। खेतों में उपयोग होने वाला यूरिया, डीएपी, कीटनाशक दवाई स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है।
विज्ञापन
पीएम के मार्गदर्शन में देश में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़कर आर्थिक संपन्नता, पौष्टिकता के साथ शुद्ध अन्न उपलब्ध करा रहे हैं। गुजरात में आठ लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान धर्मवीर आर्य, महामंत्री विजयपाल आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानंद, गुरुकुल प्रधान राजकुमार गर्ग, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, वरिष्ठ भजनोपदेशक रामनिवास आर्य, जयपाल आर्य और जसविंद्र आर्य इत्यादि मौजूद रहे।
विज्ञापन
वे गुरुकुल के सभागार में कार्यक्रम के दौरान आर्यसमाज के लोगों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि आर्यसमाज ने हमेशा कुरीतियों को दूर करने का सफल प्रयास किया। समस्या का समाधान तलाशना आर्य समाज का मुख्य कार्य रहा है। भारतीय ऋषि परंपरा में दूसरों के दुःख को अपना समझना और समाज में आपसी भाईचारे का वातावरण स्थापित करना ही मानवता कहलाता है। प्राकृतिक खेती के संदर्भ में कहा कि समाज में नैतिक मूल्य, संस्कारों के साथ पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना भी जरूरी है। रासायनिक खेती ने पर्यावरण, जल और भूमि को नुकसान पहुंचाकर मनुष्य शरीर को बीमारियों का घर बना दिया है। उन्होंने कहा कि इससे बचने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक खेती।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जीवनदायिनी कृषि पद्धति है जिससे आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण, पोष्टिक आहार, शुद्ध जल और मित्र जीवों की सौगात उपलब्ध होगी। आर्यजनों से आह्वान किया कि हवन और सत्संग से युवाओं को संस्कारवान बनाने का पुनीत कार्य किया जा रहा है। किसानों को जनहित में प्राकृतिक खेती को मिशन के रूप में अपनाना चाहिए। गोमाता का संरक्षण, भूमिगत जल में सुधार और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। खेतों में उपयोग होने वाला यूरिया, डीएपी, कीटनाशक दवाई स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं है।
विज्ञापन
पीएम के मार्गदर्शन में देश में लगभग 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़कर आर्थिक संपन्नता, पौष्टिकता के साथ शुद्ध अन्न उपलब्ध करा रहे हैं। गुजरात में आठ लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान धर्मवीर आर्य, महामंत्री विजयपाल आर्य, वेद प्रचार अधिष्ठाता स्वामी सच्चिदानंद, गुरुकुल प्रधान राजकुमार गर्ग, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, वरिष्ठ भजनोपदेशक रामनिवास आर्य, जयपाल आर्य और जसविंद्र आर्य इत्यादि मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम में संबोधित करते गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। विज्ञप्ति

कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम में संबोधित करते गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। विज्ञप्ति

कुरुक्षेत्र। कार्यक्रम में संबोधित करते गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। विज्ञप्ति