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‘नैनो तकनीक की होड़ मची’
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डॉ. आनंद कुमार को स्मृति चिह्न देते प्राचार्य डॉ अरुण पुनियानी व अन्य। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज में भौतिक विज्ञान शाखा की ओर से नैनो प्रौद्योगिकी और नैनो विज्ञान के उद्देश्य विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण ने कहा कि 21वीं सदी नैनो तकनीक की है। आज वस्तुओं के आकार को छोटा और मजबूत बनाने की होड़ सी मची हुई है। नैनो तकनीक विकसित करने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं।
मुख्य वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि नैनो विज्ञान अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो इंसान के जिस्म में उतर कर उसकी धमनियों में चलकर फिर वहीं रोगों का ऑपरेशन कर सके। वर्तमान में देश के अलावा विदेश में भी अच्छी नैनो टेक्नोलॉजिस्ट की काफी मांग है। लगातार रिसर्च एवं डेवलपमेंट की वजह से यह बात कही जा सकती है कि आने वाला समय नैनो टेक्नोलॉजी का ही है।
भौतिक विज्ञान के सहायक प्रो. गौरव कुमार ने बताया कि नैनो विज्ञान ने जीवन के हर क्षेत्र में अपनी गहरी पैठ बनाई है। सूक्ष्मता के मापन और अनुप्रयोग पर आधारित विधा कोई बहुत नई नहीं है। अनुप्रयोग के रूप में यह बहुत प्राचीन है, लेकिन हाल के वर्षों में हुए शोधों ने इसके अध्ययन को एक नई दिशा प्रदान की है। अंत में मुख्य वक्ता ने कॉलेज के विद्यार्थियों से नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी के विषय में प्रश्न पूछे और उनका उचित समाधान भी किया। इस अवसर पर महाविद्यालय का शिक्षक व गैर शिक्षक स्टाफ मौजूद रहा।
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कुरुक्षेत्र। द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज में भौतिक विज्ञान शाखा की ओर से नैनो प्रौद्योगिकी और नैनो विज्ञान के उद्देश्य विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण ने कहा कि 21वीं सदी नैनो तकनीक की है। आज वस्तुओं के आकार को छोटा और मजबूत बनाने की होड़ सी मची हुई है। नैनो तकनीक विकसित करने के लिए दुनिया भर में बड़े पैमाने पर शोध हो रहे हैं।
मुख्य वक्ता एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार ने बताया कि नैनो विज्ञान अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें जो इंसान के जिस्म में उतर कर उसकी धमनियों में चलकर फिर वहीं रोगों का ऑपरेशन कर सके। वर्तमान में देश के अलावा विदेश में भी अच्छी नैनो टेक्नोलॉजिस्ट की काफी मांग है। लगातार रिसर्च एवं डेवलपमेंट की वजह से यह बात कही जा सकती है कि आने वाला समय नैनो टेक्नोलॉजी का ही है।
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भौतिक विज्ञान के सहायक प्रो. गौरव कुमार ने बताया कि नैनो विज्ञान ने जीवन के हर क्षेत्र में अपनी गहरी पैठ बनाई है। सूक्ष्मता के मापन और अनुप्रयोग पर आधारित विधा कोई बहुत नई नहीं है। अनुप्रयोग के रूप में यह बहुत प्राचीन है, लेकिन हाल के वर्षों में हुए शोधों ने इसके अध्ययन को एक नई दिशा प्रदान की है। अंत में मुख्य वक्ता ने कॉलेज के विद्यार्थियों से नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी के विषय में प्रश्न पूछे और उनका उचित समाधान भी किया। इस अवसर पर महाविद्यालय का शिक्षक व गैर शिक्षक स्टाफ मौजूद रहा।
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