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देशभर में लगाए 700 से अधिक रक्तदान शिविर
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अवार्ड दिखाते विनोद पाल।
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। एशिया बुक अवार्ड से सम्मानित यूथ ब्लड डोनेशन सोसायटी के अध्यक्ष विनोद पाल होलकर पिछले 20 वर्षों से रक्तदान की अलग जगा रहे हैं। वे देशभर में 700 से अधिक रक्तदान शिविर लगा चुके हैं। इसके अलावा वे खुद भी 65 बार रक्त और प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं।
विनोद पाल ने बताया कि 20-22 साल पहले उनके गांव झांसा में चार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित थे। तब उन बच्चों के परिवार के लोग रक्त के लिए इधर-उधर भटकते थे। उनको बच्चों के लिए भटकता देखकर उन्होंने गांव के 10 लोगों की एक टीम बनाई। यह टीम उन बच्चों को रक्तदान करती थी। उसके बाद उनकी टीम बढ़ती चली गई। अब उनकी टीम दो हजार से ज्यादा सदस्य शामिल है। सभी सदस्य हर समय रक्तदान के लिए तत्पर और समर्पित है।
उन्होंने बताया कि 2019 में उनकी संस्था ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती पर नौ दिन लगातार रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। उनके इस कार्य के लिए संस्था को इंडिया बुक अवार्ड से नवाजा गया था। वहीं गत दिवस अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 में 18 दिन तक लगातार रक्तदान शिविर लगाए रखा। उन्हें सबसे अधिक दिन रक्तदान शिविर लगाने पर एशिया बुक ऑफ अवार्ड दिया गया।
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कोरोना वैक्सीन का ट्रायल कराया खुद पर
विनोद पाल ने बताया कि कोरोना काल में भी उनकी संस्था ने रक्तदान शिविर लगाने का कार्य जारी रखा। कोरोना वैक्सीन का ट्रायल उन्होंने खुद पर कराया था। इन कार्यों के लिए उनको भारतीय रेडक्रॉस की ओर सम्मानित किया गया। वहीं अब तक उनकी संस्था को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली के राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। विनोद पाल को साल 2007 में मथुरा के कोसी किला में सात बच्चों की जान बचाने के लिए बहादुरी पुरस्कार भी मिल चुका है।
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कुरुक्षेत्र। एशिया बुक अवार्ड से सम्मानित यूथ ब्लड डोनेशन सोसायटी के अध्यक्ष विनोद पाल होलकर पिछले 20 वर्षों से रक्तदान की अलग जगा रहे हैं। वे देशभर में 700 से अधिक रक्तदान शिविर लगा चुके हैं। इसके अलावा वे खुद भी 65 बार रक्त और प्लेटलेट्स दान कर चुके हैं।
विनोद पाल ने बताया कि 20-22 साल पहले उनके गांव झांसा में चार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित थे। तब उन बच्चों के परिवार के लोग रक्त के लिए इधर-उधर भटकते थे। उनको बच्चों के लिए भटकता देखकर उन्होंने गांव के 10 लोगों की एक टीम बनाई। यह टीम उन बच्चों को रक्तदान करती थी। उसके बाद उनकी टीम बढ़ती चली गई। अब उनकी टीम दो हजार से ज्यादा सदस्य शामिल है। सभी सदस्य हर समय रक्तदान के लिए तत्पर और समर्पित है।
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उन्होंने बताया कि 2019 में उनकी संस्था ने अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती पर नौ दिन लगातार रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। उनके इस कार्य के लिए संस्था को इंडिया बुक अवार्ड से नवाजा गया था। वहीं गत दिवस अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 में 18 दिन तक लगातार रक्तदान शिविर लगाए रखा। उन्हें सबसे अधिक दिन रक्तदान शिविर लगाने पर एशिया बुक ऑफ अवार्ड दिया गया।
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कोरोना वैक्सीन का ट्रायल कराया खुद पर
विनोद पाल ने बताया कि कोरोना काल में भी उनकी संस्था ने रक्तदान शिविर लगाने का कार्य जारी रखा। कोरोना वैक्सीन का ट्रायल उन्होंने खुद पर कराया था। इन कार्यों के लिए उनको भारतीय रेडक्रॉस की ओर सम्मानित किया गया। वहीं अब तक उनकी संस्था को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और दिल्ली के राज्यपाल सम्मानित कर चुके हैं। विनोद पाल को साल 2007 में मथुरा के कोसी किला में सात बच्चों की जान बचाने के लिए बहादुरी पुरस्कार भी मिल चुका है।