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Kurukshetra News: मिसाइल मैन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम का धर्मनगरी से था विशेष लगाव
Sun, 27 Jul 2025 06:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sun, 27 Jul 2025 06:03 AM IST
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कुरुक्षेत्र। मिसाइल मैन के नाम से विख्यात पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम दो बार कुरुक्षेत्र आए थे। उनका गीता स्थली से विशेष लगाव था। यही कारण था कि उन्होंने धर्मनगरी पहुंचकर न केवल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं एनआईटी कुरुक्षेत्र के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की बल्कि गीता जन्म स्थली ज्योतिसर और पवित्र ब्रह्मसरोवर के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की । वे दोनों ही बार यहां के लोगों पर अपनी गहरी छाप छोड़ गए। आज भी उनकी यादें लोगों के जहन में है।
जानकारी के अनुसार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वर्ष 2007 के मई माह में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। इसके बाद वे गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ पहुंचे और वहां के पुजारी से गीता स्थली के बारे में जानकारी हासिल की। बाद में वह पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों व पुरातत्ववेता राजेंद्र सिंह राणा से कुरुक्षेत्र और ब्रह्मसरोवर के महत्व के बारे में जाना।
26 मार्च 2015 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 12वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और गाउन परंपरा को बदलने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि दीक्षांत समारोह में पहना जाने वाला गाउन अंग्रेजों की निशानी है। हमें इसे बदल देना चाहिए। संस्थान की अपनी ड्रेस होनी चाहिए। इसके बाद वर्ष 2018 से एनआइटी में छात्रों के लिए सफेद शर्ट और छात्राओं के लिए क्रीम कलर की साड़ी का पहनावा निर्धारित किया गया था।
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बॉक्स
.... जब मूर्तिकार के चूम लिए थे हाथ
वर्ष 2007 में डॉ. कलाम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। उन्हें ये प्रतिमा इस कदर प्रभावित कर गई कि उन्होंने इसके मूर्तिकार रामसुतार के हाथ चूम लिए थे। पुरातत्ववेता राजेंद्र राणा का कहना है कि ब्रह्मसरोवर पर भ्रमण के दौरान उन्होंने जिस तरह से हर बारीकी पर लगाव दिखाया वह कायल कर देने वाला था।
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जानकारी के अनुसार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम वर्ष 2007 के मई माह में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। इसके बाद वे गीता की जन्मस्थली ज्योतिसर तीर्थ पहुंचे और वहां के पुजारी से गीता स्थली के बारे में जानकारी हासिल की। बाद में वह पवित्र ब्रह्मसरोवर तट पर पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों व पुरातत्ववेता राजेंद्र सिंह राणा से कुरुक्षेत्र और ब्रह्मसरोवर के महत्व के बारे में जाना।
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26 मार्च 2015 में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 12वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और गाउन परंपरा को बदलने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि दीक्षांत समारोह में पहना जाने वाला गाउन अंग्रेजों की निशानी है। हमें इसे बदल देना चाहिए। संस्थान की अपनी ड्रेस होनी चाहिए। इसके बाद वर्ष 2018 से एनआइटी में छात्रों के लिए सफेद शर्ट और छात्राओं के लिए क्रीम कलर की साड़ी का पहनावा निर्धारित किया गया था।
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.... जब मूर्तिकार के चूम लिए थे हाथ
वर्ष 2007 में डॉ. कलाम कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण भी किया था। उन्हें ये प्रतिमा इस कदर प्रभावित कर गई कि उन्होंने इसके मूर्तिकार रामसुतार के हाथ चूम लिए थे। पुरातत्ववेता राजेंद्र राणा का कहना है कि ब्रह्मसरोवर पर भ्रमण के दौरान उन्होंने जिस तरह से हर बारीकी पर लगाव दिखाया वह कायल कर देने वाला था।